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ओपी चौटाला को झटकाः आय से अधिक संपत्ति केस में 4 साल की जेल और 50 लाख का जुर्माना; खुद को बताया था 90% दिव्यांग

बहस के दौरान ओपी चौटाला कोर्ट रूम में ही मौजूद थे। ओपी चौटाला की ओर से पेश हुए वाकजील हर्ष शर्मा ने कम सजा के लिए चिकित्सा आधार का हवाला दिया था।

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओपी चौटाला (Source- File Photo/ ANI)

आय से अधिक संपत्ति रखने के मामले में दिल्ली की स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओपी चौटाला को चार साल कैद की सजा सुनाई है और साथ ही उन पर 50 लाख रुपए जुर्माना लगाया गया है। कोर्ट ने उनकी चार संपत्तियों को भी जब्त करने का आदेश दिया है।

हरियाणा के चार बार के मुख्यमंत्री रहे ओम प्रकाश चौटाला को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति मामले में दोषी करार दिया था। स्पेशल सीबीआई जज (पीसी ऐक्ट) विकास ढुल ने चौटाला को दोषी करार दिया था और सजा तय करने के लिए 26 मई की तारीख तय की थी। आईएनएलडी प्रमुख पर 1993 से 2006 के बीच अज्ञात स्रोतों से लगभग 6.09 करोड़ की ज्यादा संपत्ति अर्जित करने का आरोप था।

चिकित्सा आधार पर कम सजा की मांग: ओपी चौटाला के वकील हर्ष शर्मा ने कम सजा के लिए चिकित्सा आधार का हवाला देते हुए कहा कि ओपी चौटाला जन्म से ही पोलियो से संक्रमित हैं और आंशिक रूप से अक्षम हैं। चौटाला के वकील ने तर्क दिया कि उनके ऊपर 1993-2006 के दौरान आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है। यह 20 साल से ज्यादा का समय है और इस बीच उन्होंने हमेशा जांच में सहयोग किया है।

सीबीआई ने की अधिकतम सजा की मांग: सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक अजय गुप्ता ने खराब स्वास्थ्य और उम्र के आधार पर रियायत देने की ओपी चौटाला के वकील की दलीलों का विरोध किया। सीबीआई ने अदालत से अनुरोध किया कि पूर्व मुख्यमंत्री को अधिकतम सजा दी जाए क्योंकि इस केस से समाज में बड़ा संदेश जाएगा। सीबीआई ने कहा, “इस केस में व्यक्ति एक बड़ी हस्ती है और न्यूनतम सजा देने से गलत संदेश जाएगा। उसका पुराना इतिहास भी साफ नहीं है। यह दूसरा ऐसा मामला है जिसमें उसे दोषी पाया गया है।”

संतोषजनक हिसाब देने में फेल हुए चौटाला: अदालत ने पिछले हफ्ते चौटाला को दोषी ठहराते हुए कहा था कि आरोपी अपनी आय के स्रोत और इस अवधि के दौरान आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में संतोषजनक हिसाब देने में असफल रहा है। जांच दल ने ओपी चौटाला पर 2005 में मामला दर्ज किया था और मार्च 2010 में आरोप पत्र दायर किया गया था। जिसमें आरोप लगाया गया था कि 1993 और 2006 के बीच उन्होंने अपनी वैध आय से ज्यादा संपत्ति जमा की थी।

सीबीआई की एफ़आईआर के अनुसार चौटाला ने 24 जुलाई 1999 से 5 मार्च 2005 के बीच हरियाणा के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य करते हुए अपने परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों की मिलीभगत से संपत्ति अर्जित की। ये संपत्ति चौटाला के नाम पर, उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर थी, जो कि उनकी आय के ज्ञात स्रोतों का 189.11 प्रतिशत थी।

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