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खतरे में दिल्ली की 48,000 झुग्गियां! PM से बोलीं औरतें- रेल पटरी पर लेट जाएंगे, पर जगह छोड़ नहीं जाएंगे

सुप्रीम कोर्ट अदालत ने 31 अगस्त को एक फैसले में दिल्ली में रेलवे लाइन के किनारे बनी 48,000 झुग्गियों को तीन महीने के अंदर हटाने का निर्देश दिया था।

PM MODI, CM kejriwalतस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (पीटीआई)

राजधानी दिल्ली में रेलवे लाइन के किनारे झुग्गियों को हटाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मामला विवादों में बना हुआ है। हालांकि केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि शहरी विकास मंत्रालय, रेल मंत्रालय और दिल्ली सरकार एक साथ बैठकर चार सप्ताह के भीतर इस मामले को हल कर लेंगे और तब तक झुग्गियां नहीं ठहाई जाएंगी। दिल्ली में 140 किमी रेल पटरियों के किनारे करीब 48,000 झुग्गियां हैं।

इस बीच झुग्गियों से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचने पर यहां लोगों में डर बना हुआ है। एक महिला ने बताया कि वो बुल्डोजर और फोर्स लेकर आएंगे, और हमें जानवरों की तरह पीटकर भगा देंगे। महिला ने बताया कि पिछले 25 सालों से यहीं रह रही हैं, झुग्गी छिन जाएगी तो वो कहां जाएंगे। महिला ने कहा, ‘तिनका-तिनका करके घर बनाया है। अब सरकार चाहे तो इसे तोड़ दे। मगर इसके बदले में सरकार हमें कहीं और जमीन दे दे।’

वजीराबाद स्थित झुग्गियों में रह रहीं मनोरमा देवी कहती हैं कि ‘पीएम मोदी ने हमसे कहा था कि हमें वोट दीजिए, जहां झुग्गी होगी वहीं मकान देंगे। केजरीवाल ने भी ऐसी ही बातें कहीं। सरकार हमें कहीं और बसाकर चाहे तो झुग्गियां तोड़ दे।’ ऐसे ही एक बुजर्ग ने मोदी जिंदाबादा का नारा लगाते हुए कहा, ‘हम खाने के लिए मोदी जी के घर जाएंगे। भूखे मर रहे हैं कोई देखने वाला नहीं, सुनने वाला नहीं।’

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पूछने पर कि कोर्ट का आदेश है कि झुग्गियां हटाई जाएंगी। इस पर महिलाओं ने कहा कि वो आएं (प्रशासन) और झुग्गियां गिरा दें। मगर हम पटरियों पर लेट जाएंगे। चाहें तो हमारे ऊपर बुल्डोजर चलाकर चले जाएं… फिर चाहे इन झुग्गियों को गिराते रहें। कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

दूसरी तरफ दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वह दिल्ली में रेलवे लाइन के आसपास बनी झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोगों को विस्थापित नहीं होने देंगे और उनकी सरकार उन्हें घर मुहैया कराने के लिए केंद्र के साथ मिलकर काम करेगी। सुप्रीम कोर्ट अदालत ने 31 अगस्त को एक फैसले में दिल्ली में रेलवे लाइन के किनारे बनी 48,000 झुग्गियों को तीन महीने के अंदर हटाने का निर्देश दिया था।

इस मुद्दे पर दिल्ली विधानसभा के एक दिवसीय सत्र के दौरान बहस हुई और इस दौरान सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी और विपक्षी दल भाजपा ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाया। केजरीवाल ने कहा, ‘मेरा मानना है कि महामारी के इस दौर में 48,000 झुग्गियों को हटाना सही नहीं है। यदि वह स्थान कोरोना वायरस हॉटस्पॉट बन गया तो क्या होगा? कानून कहता है कि पुनर्वास से पहले उन्हें हटाया नहीं जाना चाहिए। हर झुग्गी वाले का यह कानूनी अधिकार है कि उसका एक घर हो।’

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