देश की राजधानी दिल्ली में रविवार को विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत मतदाताओं की आपत्तियों और परेशानियों के समाधान के लिए विभिन्न चिन्हित स्थानों पर शिविर लगाए गए। जनसत्ता ने जब इन शिविरों में पहुंचकर मतदाताओं से बातचीत की तो मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और नोटिस जारी होने से जुड़े कई अलग-अलग मामले सामने आए। कहीं माता-पिता और बच्चों की उम्र में अधिक अंतर आपत्ति की वजह बना तो कहीं पता बदलने और SIR प्रक्रिया की जानकारी समय पर नहीं मिलने से लोगों को परेशानी उठानी पड़ी।

मोहन गार्डन स्थित राजकीय उच्चतर माध्यमिक बालिका विद्यालय में पहुंचे अभिजीत ने बताया कि उनका और उनकी जुड़वां बहन का नाम सिर्फ इसलिए काट दिया, क्योंकि उनके पिता की उम्र उनसे 42 साल अधिक है। दोनों को इस संबंध में नोटिस जारी किया गया है।

क्या दस्तावेज मांगे गए?

अभिजीत के मुताबिक, उन्होंने बीएलओ को बताया कि पांच बेटियों के बाद वह और उनकी बहन जुड़वां पैदा हुए थे, इसलिए माता-पिता और उनके बीच उम्र का अंतर अधिक है। इसके अलावा दोनों के जन्म के बीच नौ महीने का अंतर नहीं होने को लेकर भी उनसे सवाल किया गया है। उन्होंने बताया कि बीएलओ ने प्रमाण के तौर पर माता-पिता के आधार कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र, टीकाकरण कार्ड समेत अन्य दस्तावेज मांगे हैं। इन्हीं दस्तावेजों को जमा कराने वह शिविर पहुंचे। उन्हें बताया गया है कि चार दिसंबर 2026 को जानकारी दी जाएगी कि मामले में कोई अन्य आपत्ति है या नहीं। इस संबंध में बीएलओ ने बताया कि अक्सर इस तरह का अंतर दादा-पोते के बीच होता है। इसी कारण आपत्ति के तहत नोटिस भेजा गया है।

दस्तावेज जमा करवाने के बाद SIR में नाम जोड़ दिया जाएगा। उत्तम नगर निवासी आस्था ने बताया कि उनका मतदाता पहचान पत्र उनके वास्तविक घर के बजाय सामने वाले मकान के पते पर बना दिया गया था। वर्ष 2020 में इसे ठीक कराने के लिए आवेदन किया था, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका। अब इसी वजह से उनका नाम एसआइआर से कट गया है। वह वर्तमान में नंगली विहार में रहती हैं। उनका कहना है कि न तो नंगली विहार में उनका नाम जोड़ा जा रहा है और न ही उत्तम नगर में। उन्होंने कई बार बीएलओ से फोन पर संपर्क किया, लेकिन नाम नहीं जुड़ा। अब वह शिविर में फार्म जमा कराने पहुंची हैं, ताकि मतदाता सूची में उनका और उनके पति का नाम दोबारा जोड़ा जा सका।

86 वर्षीय बुजुर्ग का नाम कटा

विपिन गार्डन के एक स्कूल में बनाए गए शिविर में 86 वर्षीय अरविंद श्रीवास्तव अपना नाम दोबारा जुड़वाने पहुंचे। उन्होंने बताया कि करीब दो वर्ष पहले वह विपिन गार्डन के ही दूसरे ब्लाक में रहते थे। SIR फार्म भरने के दौरान उन्होंने बीएलओ को फोन कर बताया था कि उनका मकान बदल गया है। उम्र अधिक होने के कारण उन्होंने नए पते पर आकर फार्म भरवाने का अनुरोध भी किया था। अरविंद के मुताबिक, बीएलओ नए पते पर नहीं आए और उनका नाम सूची से कट गया। बच्चे भी उनके साथ नहीं रहते हैं, इसलिए कोई फार्म जमा नहीं कर सका। अब उन्होंने दोबारा फार्म भरा है और वर्ष 2002 से पहले के अपने सभी उपलब्ध दस्तावेज भी जमा किए हैं।

किरायेदार दंपति का नाम कटा

नीतू प्रजापति और उनके पति का नाम भी SIR प्रक्रिया की जानकारी समय पर नहीं मिलने के कारण प्रभावित हुआ। नीतू ने बताया कि वोे करीब 15 वर्षों से एक ही मकान में किराये पर रह रहे हैं। इसी पते पर उनका मतदाता पहचान पत्र बना हुआ है। नीतू के मुताबिक, मकान मालिक ने एसआइआर फार्म बांटे जाने की जानकारी उन्हें नहीं दी, जबकि वह कई बार इसके बारे में पूछ चुकी थीं। अब वह शिविर में अपना फार्म जमा कराने पहुंची हैं, ताकि मतदाता सूची में उनका और उनके पति का नाम दोबारा जोड़ा जा सके।

नाम पहले से है, फिर भी जांच कराने पहुंचे लोग

बिंदापुर में लगाए गए शिविर में नाम जोड़ने और आपत्तियों के समाधान के लिए आने वाले लोगों के अलावा ऐसे मतदाता भी बड़ी संख्या में पहुंचे, जिनका नाम SIR में पहले से दर्ज है। वे सिर्फ यह सुनिश्चित करने के लिए शिविर पहुंचे कि उनका नाम किसी कारण से सूची से हट तो नहीं गया।

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