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दिल्ली: सरकारी स्कूलों में आठवीं तक के छात्रों को नहीं देनी होगी परीक्षा, ‘प्रोजेक्ट’ और ‘असाइनमेंट’ के आधार पर घोषित होंगे नतीजे

शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी दिशा-निर्देश सरकारी और सरकार से सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षण सत्र 2020-21 के लिए प्रभावी होगा।

Author नई दिल्ली | Updated: February 24, 2021 11:44 PM
Bihar education dpt, Bihar, education newsतस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (Representational image)

दिल्ली सरकार ने आठवीं कक्षा तक के छात्रों के आकलन के लिए बुधवार को सभी सरकारी स्कूलों को दिशा-निर्देश जारी कर सामान्य परीक्षाएं लेने से मना कर दिया और उनके ‘‘प्रोजेक्ट’’ और ‘‘असाइनमेंट’’ के आधार पर परिणाम घोषित करने को कहा है। शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी दिशा-निर्देश सरकारी और सरकार से सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षण सत्र 2020-21 के लिए प्रभावी होगा। इस शिक्षण सत्र में कोविड-19 के कारण स्कूल लंबे समय तक बंद रहे और सारा पठन-पाठन ऑनलाइन हुआ।

दिल्ली में शिक्षा विभाग की अवर निदेशक रीता शर्मा ने बताया, ‘‘चूंकि प्राथमिक और मिडिल स्तर पर कक्षाओं में कोई पठन-पाठन नहीं हुआ है, ऐसे में सामान्य परीक्षाओं की जगह विषयवार प्रोजेक्ट और असाइनमेंट के माध्यम से तीसरी से आठवीं कक्षा तक के छात्रों का मूल्यांकन किया जाए।’’ दिशा-निर्देश के अनुसार, तीसरी से पांचवीं कक्षा तक वर्कशीट पर 30 अंक, सर्दियों की छुट्टियों में दिए गए असाइनमेंट पर 30 अंक और एक से 15 मार्च के बीच दिए जाने वाले प्रोजेक्ट और असाइनमेंट पर 40 अंक दिए जाएंगे।

इसी तरह छठवीं से आठवीं कक्षा तक के लिए वर्कशीट पर 20 अंक, र्सिदयों की छुट्टियों में दिए गए असाइनमेंट पर 30 अंक और एक से 15 मार्च के बीच दिए जाने वाले प्रोजेक्ट और असाइनमेंट पर 50 अंक दिए जाएंगे। शर्मा ने कहा, ‘‘अगर किसी छात्र के पास डिजिटल उपकरण (मोबाइल/लैपटॉप) और इंटरनेट नहीं है तो कोविड-19 दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए ऐसे बच्चों के माता-पिता को स्कूल बुलाकर उन्हें प्रोजेक्ट और असाइनमेंट की हार्ड कॉपी दी जाएगी।’’

इधर उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल कोविड-19 महामारी के कारण यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के आखिरी प्रयास में शामिल नहीं हो पाने वाले छात्रों की उन्हें एक और मौका दिए जाने के अनुरोध वाली याचिका बुधवार को खारिज कर दी। न्यायमूर्ति एएम खानविलकर के नेतृत्व वाली पीठ ने यूपीएससी सिविल सेवा के अर्भ्यिथयों की ओर से दायर उस याचिका को खारिज कर दिया ,जिसमें उन्होंने वैश्विक महामारी के कारण अक्टूबर 2020 में सिविल सेवा परीक्षा का आखिरी अवसर गंवाने वाले छात्रों को एक और मौका दिए जाने का अनुरोध किया गया था। इन अर्भ्यिथयों ने याचिका में महामारी के कारण परीक्षा की तैयारियों में मुश्किलों का हवाला दिया था।

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