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दिल्ली: बड़े अफसर मुख्य सचिव के समर्थन में तो छोटे अफसर- कर्मियों का गुट केजरीवाल के साथ

मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ कथित मारपीट की घटना के बाद नौकरशाहों और केजरीवाल सरकार के बीच चल रहे गतिरोध ने नया मोड़ लिया है। अफसर और कर्मचारियों के बीच ही दरार पड़ने की खबर आ रही है। जहां आईएएस लॉबी और अन्य शीर्ष अफसर मुख्य सचिव के पक्ष में खड़े हैं, वहीं अब […]

Author नई दिल्ली | Published on: March 8, 2018 3:48 PM
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मुख्य सचिव अंशु प्रकाश

मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ कथित मारपीट की घटना के बाद नौकरशाहों और केजरीवाल सरकार के बीच चल रहे गतिरोध ने नया मोड़ लिया है। अफसर और कर्मचारियों के बीच ही दरार पड़ने की खबर आ रही है। जहां आईएएस लॉबी और अन्य शीर्ष अफसर मुख्य सचिव के पक्ष में खड़े हैं, वहीं अब छोटे अफसरों और कर्मचारियों का एक धड़ा केजरीवाल के साथ खड़ा नजर आ रहा है। जिसको लेकर चर्चा है। इस धड़े की अगुवाई कर्मचारी नेता डीएन सिंह कर रहे हैं। उन्होंने बुधवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास पर पहुंचकर सभा अटेंड की।

इस दौरान केजरीवाल ने दिल्ली के कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि एक पक्ष की बात सुनकर फैसला लेने की जरूरत नहीं है। अन्ना आंदोलन के दौरान से ही उनके खिलाफ साजिशें हो रहीं हैं। मुख्य सचिव से जुड़ी घटना पर बोलते हुए केजरीवाल ने कहा कि अधिकारी और कर्मचारी हमारे परिवार के लोग हैं। आपसी समन्वय से हमें काम करना होगा। केजरीवाल ने इस दौरान नौकरशाही और सरकार के बीच चल रहे गतिरोध को अपनी बातों के जरिए दूर करने की कोशिश की।

कर दिया निलंबितः सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहे अधिकारियों और कर्मचारियों के साझा फोरम से बात किए बगैर मुख्यमंत्री आवास पर कर्मचारियों को ले जाने के मामले में अध्यक्ष डीएन सिंह को निलंबित कर दिया गया। यह कार्रवाई दिल्ली सरकार कर्मचारी वेलफेयर एसोसिएशन ने आपात बैठक बुलाकर की। यह जानकारी एसोसिएशन के महासचिव दीपक भारद्वाज ने देते हुए बताया कि सिंह को कारण बताओ नोटिस भी दी गई है।

गरिमा की बात खोखलीः निलंबन के बाद कर्मचारी नेता डीएन सिंह ने कहा कि आईएएस अफसरों की ओर से गरिमा की लड़ाई की बात खोखली है। यदि गरिमा की बात है तो हम सब उस दायरे में आते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शीर्ष अफसर छोटे स्तर के कर्मचारियों की समस्याएं नहीं सुनते और न ही उनकी गरिमा को लेकर ही संजीदा रहते हैं। उन्होंने कहा कि जिस ढंग से बड़े अफसर मख्यमंत्री से माफी मंगवाने की बात पर अड़े हैं, वह ठीक नहीं है। दोनों पक्षों को मिल-बैठकर गतिरोध दूर करना चाहिए। डीएन सिंह ने कहा कि पचास साल से हम लोगों के कैडर का पुनर्गठन नहीं हुआ है। अधिकारी हमारी ही बात नहीं सुनते हैं।

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