दिल्ली के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने 1,79,825 राशन कार्डों को निरस्त करने का आदेश जारी किया है। इन राशनकार्डधारियों को विभाग की ओर से अपील का समय दिया गया था, लेकिन अपील ना होने व अन्य कई कारणों के चलते चार श्रेणियों में राशन कार्ड निरस्त किए गए हैं व लाभार्थियों के नामों को भी राशनकार्ड से काटने का कार्य किया गया है। ताकि जरूरतमंद लोगों के नए राशन कार्ड बनाए जाने का रास्ता बनाया जा सके।

बता दें कि विभाग के विशेष आयुक्त की ओर से इस आदेश को जारी करते हुए बताया गया कि चार श्रेणियों के तहत अवरुद्ध स्थिति वाले सभी राशन कार्ड और लाभार्थियों को रद्द कर दिया जाएगा। इनमें पहली श्रेणी में उन राशन कार्डधारियों को रखा गया है, जिनके परिवारों में एक या अधिक सदस्यों की आय केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के अनुसार छह लाख रुपए से अधिक है। ऐसे संपूर्ण रूप से निरस्त किए गए कार्डाें की संख्या 1,44,075 है, जिनमें 6,47,473 लाभार्थी शामिल हैं।

जबकि दूसरे श्रेणी में उन राशन कार्डधारियों को रखा गया है, जिन्होंने 12 महीने या उससे अधिक समय से राशन नहीं लिया है। इससे यह साफ होता है कि उन्हें सरकारी राशन की आवश्यकता नहीं है।

ऐसे राशन कार्डों की संख्या 35,750 है, जिनमें 97,634 लाभार्थी जुड़े हुए हैं। यानी इन दोनों श्रेणियों के तहत कुल 1,79,825 राशन कार्डों को निरस्त किया गया व ऐसे लाभार्थियों की संख्या 7,45,107 हैं, जो अब सरकारी राशन का लाभ नहीं ले पाएंगे।

दो राज्यों से लाभ लेने वाले 20,391 लोगों के नाम हटेंगे

विभाग द्वारा कुछ ऐसे लाभार्थियों को भी छंटनी प्रक्रिया के दौरान पाया गया है जो दिल्ली के साथ ही अन्य राज्यों के राशनकार्ड में लाभार्थी बने हुए थे। यानी एक साथ दो राज्यों से सरकारी राशन का लाभ ले रहे थे, जबकि नियमत: सरकारी राशन का लाभ पूरे भारत में सिर्फ एक राज्य से ही लिया जा सकता है। ऐसे ही 20,391 लाभार्थियों के नाम को भी निरस्त किए जाने का आदेश विशेष आयुक्त द्वारा आइटी विभाग को दिया गया है।

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राजधानी दिल्ली के कई क्षेत्रों में सरकारी राशन की दुकानों पर बीते कई दिनों से बेहद घटिया, फफूंद लगा हुआ अनाज आपूर्ति किए जाने का मामला सामने आया है। स्थिति इतनी गंभीर है कि अनाज पशुओं के खाने लायक भी नहीं बचा है। गीली बोरियों में फफूंद लगा हुआ राशन है, जिसमें काले थक्के बने हुए हैं। बिना गुणवत्ता की जांच किए भेजे जा रहे इस खाद्यान्न के चलते कोटाधारकों व राशन कार्डधारियों में परस्पर विरोध भी उत्पन्न हो रहा है। जबकि खाद्य एवं आपूर्ति विभाग कोटाधारकों द्वारा की गई शिकायतों पर मौन है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक