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निजी स्कूल प्रशासकों ने जरूरी फीस वृद्धि की मांग कर कहा, आर्थिक तंगी के कारण हमारे लिए स्कूल चलाना मुश्किल

स्कूल प्रशासकों का कहना है कि जिन स्कूलों के खातों का आॅडिट करा लिया गया और यह भी पता चल गया कि इन स्कूलों की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है तो फिर पिछले तीन साल से उन्हें फीस बढ़ाने की इजाजत क्यों नहीं मिल रही है।

Author December 8, 2018 7:11 AM
प्रतीकात्मक चित्र।

अजय पांडेय

निजी स्कूल संगठनों का आरोप है कि दिल्ली सरकार स्कूलों को फीस बढ़ाने की इजाजत नहीं दे रही जिससे वे आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। स्कूल प्रशासकों का कहना है कि जिन स्कूलों के खातों का आॅडिट करा लिया गया और यह भी पता चल गया कि इन स्कूलों की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है तो फिर पिछले तीन साल से उन्हें फीस बढ़ाने की इजाजत क्यों नहीं मिल रही है। डीएवी श्रेष्ठ विहार की प्राचार्या प्रेमलता गर्ग ने कहा कि पिछले तीन साल से दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय ने हमें फीस बढ़ाने की इजाजत नहीं दी। हमारा प्रस्ताव सरकार के पास लंबित है। लेकिन सरकार उस प्रस्ताव को न तो स्वीकार कर रही है और न ही अस्वीकार कर रही है। उन्होंने कहा, ‘चाहे शिक्षक-शिक्षिकाओं को वेतन देने का मामला हो अथवा स्कूलों में सुरक्षा की दृष्टि से सीसीटीवी कैमरे लगाने की बात हो, सुरक्षा गार्ड तैनात करने की बात हो, प्रयोगशालाओं को आधुनिक बनाने की बात हो, हर मामले में खर्च लगातार बढ़ रहा है। सभी शिक्षकों को सातवें वेतन आयोग के अनुसार भुगतान करना है लेकिन स्कूल को फीस बढ़ाने की इजाजत नहीं मिल रही।

दूसरी ओर सरकार ने आॅडिट करा के यह पता भी कर लिया कि स्कूल में फीस बढ़ाया जाना जरूरी है। इसके बावजूद हमारे प्रस्ताव को रोक कर रखने से हमारे लिए स्कूल चलाना बेहद मुश्किल हो रहा है’। प्रेमलता गर्ग ने यहां तक कहा कि यदि सरकार खुद स्कूल चलाना चाहती है तो वह अपना ही प्रशासक बैठाकर देख ले, वह प्रशासक भी यही कहेगा कि जिस किस्म की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का माहौल यह स्कूल उपलब्ध करा रहा है, उसके लिए फीस की वृद्धि जरूरी है। बाल भारती स्कूल राजेंद्र नगर के प्राचार्य व नेशनल पब्लिक स्कूल काउंसिल के पूर्व प्रधान एलवी सहगल ने कहा कि दिल्ली में दो तरह के स्कूल हैं। एक वे हैं जिन्हें दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय से फीस में वृद्धि की इजाजत लेना जरूरी है क्योंकि इन्हें संस्थागत जमीन की श्रेणी की दर से डीडीए से जमीन मिली है। ऐसे स्कूलों की संख्या बहुत ज्यादा है।

स्कूलों में सुरक्षा के इंतजाम हों या प्रयोगशालाओं को आधुनिक बनाने की बात हो, हर मामले में खर्च लगातार बढ़ रहा है। सभी शिक्षकों को सातवें वेतन आयोग के अनुसार भुगतान करना है। लेकिन स्कूल को फीस बढ़ाने की इजाजत नहीं मिल रही।
-प्रेमलता गर्ग, प्राचार्या डीएवी श्रेष्ठ विहार

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