दिल्ली में प्रदूषण फिर बेकाबू, निर्माण कार्यों पर रोक लगा बोले मंत्री- श्रमिकों के खाते में डाले जाएंगे 5 हजार, 7 तक राजधानी में नहीं घुसेंगे ट्रक

पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने सोमवार को केजरीवाल सरकार के फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि दिल्ली में सभी निर्माण गतिविधियां अगले आदेश तक निलंबित रहेंगी।

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दिल्ली में सभी तरह के निर्माण कार्यों पर लगी रोक (फोटो- @ANI)

दिल्ली में एक बार फिर से प्रदूषण बढ़ने लगा है। सुप्रीम कोर्ट में जारी सुनवाई के बीच अब दिल्ली सरकार ने प्रदूषण पर काबू पाने के लिए सभी तरह के निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी है।

पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने सोमवार को केजरीवाल सरकार के फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि दिल्ली में सभी निर्माण गतिविधियां अगले आदेश तक निलंबित रहेंगी। इसके साथ ही मजदूरों के खाते में पांच-पांच हजार रुपये जमा किए जाएंगे। आवश्यक सेवाओं को छोड़कर सात दिसंबर तक दिल्ली में ट्रकों के प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा।

गोपाल राय ने आगे कहा कि दिल्ली में केवल इलेक्ट्रिक वाहनों और सीएनजी से चलने वाले ट्रकों को ही अनुमति दी जाएगी। रेड लाइट ऑन, गाडी ऑफ अभियान 18 दिसंबर तक के लिए बढ़ा दिया गया है। जल छिड़काव व पीयूसीसी चेकिंग जारी रहेगी।

आप नेता ने आगे कहा कि विशेषज्ञों के अनुसार, कम तापमान और कम हवा की गति के कारण प्रदूषण की स्थिति स्थिर हो गई है। लेकिन आने वाले दिनों में दिल्ली की हवा की गुणवत्ता और खराब होने की आशंका है। मंत्री ने कहा कि अगर बारिश होती है, जैसा कि भारत मौसम विज्ञान विभाग ने अनुमान लगाया है, तो स्थिति में सुधार होगा।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पहले कहा था कि दिल्ली में निर्माण प्रतिबंध से प्रभावित श्रमिकों को 5,000 रुपये की आर्थिक मदद मिलेगी, साथ ही न्यूनतम वेतन के नुकसान के लिए मुआवजा भी मिलेगा। जिसकी घोषणा आज गोपाल राय ने भी कर दी है। वही सरकार ने एक और फैसले में 14 अलग-अलग हिस्सों में सरकारी आवास परिसरों से रहने वाले अपने कर्मचारियों को ले जाने के लिए एक बस सेवा भी शुरू की है।

बता दें कि प्रदूषण के खतरनाक होने की आशंका के बीच सोमवार से सरकार ने दिल्ली के सभी स्कूलों को सभी कक्षाओं के लिए खोल दिया है। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई के दौरान केंद्र से दिल्ली में अपने अधिकार क्षेत्र में हो रही विभिन्न निर्माण गतिविधियों को जारी रखने के मामले पर जवाब मांगा है।

इससे पहले याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा कि सेंट्रल विस्टा परियोजना पर काम चल रहा है और धूल प्रदूषण में योगदान दे रहा है। जिसके बाद कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा।

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