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हर साल नहीं करानी होगी वाहनों की फिटनेस

प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई को और सख्त व आसान बनाने के लिए केंद्र सरकार ने मोटर वाहन अधिनियम में नए प्रावधानों को मंजूरी दी है। नए प्रावधान के तहत अब आठ साल तक के पुराने वाहनों के लिए दो साल के लिए फिटनेस जारी हो सकेगा, जबकि वाहन अगर आठ साल से अधिक पुराना है तो गाड़ी मालिक को केवल एक साल का ही फिटनेस मिलेगा।

Author November 12, 2018 4:16 AM
प्रतीकात्मक फोटो

पंकज रोहिला

प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई को और सख्त व आसान बनाने के लिए केंद्र सरकार ने मोटर वाहन अधिनियम में नए प्रावधानों को मंजूरी दी है। नए प्रावधान के तहत अब आठ साल तक के पुराने वाहनों के लिए दो साल के लिए फिटनेस जारी हो सकेगा, जबकि वाहन अगर आठ साल से अधिक पुराना है तो गाड़ी मालिक को केवल एक साल का ही फिटनेस मिलेगा। इसके लिए मोटर वाहन अधिनियम (सीएमवीआर) 1989 के प्रावधानों में संशोधन किया गया है। नए प्रावधान लागू हो जाने से वाहन चालक को हर साल प्राधिकरण के पास फिटनेस प्रमाण के लिए नहीं जाना होगा। देशभर में इस नई व्यवस्था को लागू किया गया है और इसकी अधिसूचना केंद्रीय सड़क व परिवहन मंत्रालय ने जारी कर दी है। प्रावधानों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि नए वाहन के पंजीकरण के समय में अब फिटनेस प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं होगी। इन्हें दो साल के लिए फिटनेस प्रमाणपत्र मिलेगा। परिवहन विभाग के सूत्रों ने बताया कि संशोधन में एक और नया प्रावधान जोड़ा गया है। इसमें नियम 138बी के तहत कोई भी भारवाहक वाहन खुले में कोई भी सामान नहीं ले जा सकेगा।

अब तक जब वाहन बिल्डिंग मैटिरियल या कचरा आदि लेकर जाता है तो वह उसे ढके बिना नहीं ले जा सकेगा। इसके तय प्रावधानों का उल्लंघन माना जाएगा और तय नियमों के तहत चालक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। परिवहन विभाग के अफसरों ने बताया कि इसकी मदद से प्रदूषण कणों की मात्रा में कमी लाने में मदद होगी। अभी खुले वाहन होने की वजह से धूल कण आदि की मात्रा अधिक रहती है। यह सूचना भारत सरकार के संयुक्त सचिव प्रियंक भारती की ओर से जारी की गई है। नए प्रावधानों में प्रमाण जैसे पंजीकरण, इंश्योरेंस, फिटनेस, परमिट, लाइसेंस आदि को अब नियम 139 के दायरे में लाया गया है। इसका लाभ यह होगा कि सभी प्रमाणों को आॅनलाइन जांचा जा सकेगा। इस प्रावधान की मदद से प्रमाणपत्र ऑनलाइन हो जाएंगे और चालकों को सभी दस्तावेजों की प्रतियां लेने की जरूरत नहीं रहेगी। हालांकि इस व्यवस्था के आइटी अधिनियम 2000 में पहले ही प्रावधान किया गया था। इन्हें अब सख्ती से लागू किया जा रहा है।

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