Delhi News: विदेश में बैठकर भारत में जबरन वसूली का रैकेट चला रहे गैंग से निपटने के लिए दिल्ली पुलिस ने एक नया और ज्यादा असरदार प्लान तैयार किया है। दिल्ली पुलिस ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के बड़े क्लब और बार की एक बार फिर से मैपिंग करने का फैसला लिया है। सूत्रों ने कहा कि यह कार्य जो फिलहाल प्लानिंग स्टेज में है को साउथ, ईस्ट और वेस्ट दिल्ली के बड़े कल्ब में किया जाएगा, जिसके मालिक बड़े-बड़े उद्योगपति हैं।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल करेगी काम

इस कार्य को पुलिस की एक स्पेशल सेल स्थानीय थाना पुलिस के समनवय में पूरा करेगी। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस की प्लानिंग है कि वो ऐसे क्लब और बार में काम कर रहे लोगों की जांच पड़ताल करे कि कहीं वो क्लब में आने वाले मेहमानों से जुड़ी जानकारी फोरवर्ड तो नहीं कर रहे हैं।

सूत्रों ने कहा कि दिल्ली पुलिस यह फैसला शहर में उद्योगपतियों को मिलने वाली धमकियों की घटना में बढ़ोतरी के बीच आई है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि फेमस उद्योगपति, सट्टेबाज, बुकीज, राजनेता और अभिनेता हमेशा से ऐसे गैंग के प्राइम टारगेट रहे हैं। हालांकि, बीते कुछ महीनों में ऐसा संज्ञान में आया है कि वैसे उद्योगपति जो ना तो बहुत ज्यादा फेमस हैं और ना ही उतने धनवान, उन्हें भी वसूली के लिए धमकी मिली हैं।

जबरन वसूली कमाई का मुख्या जरिया

पुलिस अधिकारी ने आगे कहा, “उद्योगपति अक्सर क्लब और बार में मीटिंग या पार्टिज रखते हैं। संभावना है कि यहां से उनकी जानकारी लीक हो रही है। ये विदेश में बैठे गैंगस्टर के लिए एक इनपुट का सोर्स हो सकता है।” एक अन्य पुलिस अधिकारी के अनुसार इस तरह के गैंग अवैध व्यापार जैसे ड्रग्स और अवैध हथियार की स्पलाई से धन बनाते हैं, लेकिन बीते कुछ वर्षों में जबरन वसूली इनकी कमाई का मुख्य जरिया बन गया है।

पुलिस ने कहा कि पहले इस तरह के गैंग लोकल नेटवर्क के जरिए अपने टारगेट पर पहचानते हैं, फिर ‘डब्बा कॉलिंग’ कॉलिंग के जरिए वाट्सएप कॉल करते हैं। यह जबरन वसूली का एक बढ़िया तरीका है। पहले बिचौलिया टारगेट को कॉल करता है और फिर दूसरे फोन से अपने विदेश में बैठे बॉस को कॉल करता है। फिर दोनों फोन को साथ रखकर स्पीकर ऑन कर देता है। ताकि कथित तौर पर उसका बॉस टारगेट से बात कर सके।

कुछ मामलों में यह गैंग उद्योगपति को वाट्सएप पर धमकी-भरा वॉइस नोट भी भेजता है। अगर, टारगेट इस पर जवाब नहीं देता है तो धमकी भरे मैसेज भेजे जाते हैं। ऐसा करने के बावजूद जब कोई जवाब नहीं आता है तब आखिरी चेतावनी के तौर पर हथियारधारी गुर्गों को उनके घर या कार्यलय के बाहर गोलीबारी के लिए भेजा जाता है।

68 प्रतिशत मामलों को सुलझाया गया

पुलिस अधिकारी ने कहा कि कई मामलों में तो उद्योगपति इतना डर जाते हैं कि वो पुलिस में रिपोर्ट तक नहीं करते और मांगी हुई राशि का भुगतान कर देते हैं। दिल्ली पुलिस के अनुसार साल 2025 में दायर किए गए जबरन वसूली के 68 प्रतिशत मामलों को सुलझा लिया गया है।

हालांकि, पुलिस ने कहा कि जमीनी स्तर पर स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। ऐसा इसलिए क्योंकि वो उन्हीं मामलों को सुलझा पाए हैं, जिनमें गोलीबारी की घटनाओं को अंजाम दिया गया था। इन घटनाओं को प्लान करने वाले मास्टरमाइंड की पहचान नहीं हो पा रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह सारा काम गैंग लीडर के नाम को लेकर किया जाता है। कोई अपना नाम नहीं लेता।

पुलिस के अनुसार, कुछ बड़े नाम जो इस तरह के गैंग चला रहे हैं, उसमें लॉरेंस बिश्नोई गैंग, कपिल सांगवान उर्फ नंदू गैंग, हिमांशु भाऊ गैंग, गोल्डी बरार-रोहित गोदारा गैंग और नीरज बवाना गैंग शामिल हैं। गौरतलब है कि साल 2023 में 204, साल 2024 में 228 और साल 2025 में 212 मामले सामने आए थे।

लॉरेंस बिश्नोई के नाम पर दवा करोबारी से मांगी 30 लाख की रंगदारी, कर्ज में दबे पूर्व कर्मचारी ने वेब सीरीज देखकर बनाया प्लान