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Delhi: सब्जी डिलीवर करने वाले बन बंद घरों को बनाते थे निशाना, कैश-जूलरी लूट हो जाते थे फरार, ऐसे दबोचे गए

मुरादाबाद का रहने वाला शरीफ 10 सालों से फरार है। उसने पुलिस को बताया कि उसका निशाना सिर्फ नकदी और गहने होते थे, क्योंकि इन्हें आसानी से दूर ले जाया जा सकता था। फिंगरप्रिंट्स से बचने के लिए वे हाथों में दस्ताने पहन लिया करते थे।

प्रतीकात्मक तस्वीर (एक्सप्रेस फाइल)

देश की राजधानी दिल्ली में लूट के लिए घर में घुसने का एक नया तरीका सामने आया है। दक्षिण-मध्य दिल्ली की बड़ी सोसाइटीज को निशाने बनाने वाली इस गैंग के लोग बंदूक और चाकू नहीं बल्कि ग्रॉसरी डिलीवरी कंपनी के लीफलेट्स (विज्ञापनों वाले पर्चे) के दम पर सोसाइटी में घुसते थे। फिर बंदूक और अन्य धारदार हथियारों के इस्तेमाल से सूने घरों का ताला तोड़ते थे और वहां से नकदी और गहने लेकर भाग निकलते थे। दिल्ली पुलिस ने दिनदहाड़े वारदात को अंजाम देने वाले इस गैंग के लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। ये ऐसे घरों को निशाना बनाते थे, जिनमें रहने वाले लोग घर पर नहीं होते थे।

गैंग के लोग जिन लीफलेट्स को ले जाते थे उन पर लिखा होता था, ‘फोन करके मंगाइये ताजा सब्जियां, सिर्फ एक घंटे में डिलीवरी, दिल्ली में जल्द आ रहा है।’ इस गैंग के लोग अपनी फर्जी डिलीवरी सेवा का प्रचार करने के बहाने सोसाइटी में घुसते थे। दिल्ली पुलिस को इस गैंग के निशाना बने घरों से फिंगर प्रिंट तक नहीं मिले थे, हालांकि जब अधिकांश सोसाइटीज में ग्रॉसरी डिलीवरी के स्टाफ के घुसने वाली बात एक जैसी निकली तो पुलिस को शक हुआ।

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक डीसीपी (दक्षिण-पश्चिम) देवेंद्र आर्य ने कहा कि एसीपी सतीश कुमार और इंस्पेक्टर दिनेश कुमार के नेतृत्व में एक टीम मामले की जांच कर रही है। टीम ने अपने स्थानीय खुफिया सूत्रों को सक्रिय कर दिया, ताकि संदिग्धों के बारे ज्यादा से ज्यादा जानकारी जुटा सके। जांच में जुटी पुलिस टीम सीसीटीवी फुटेज के सहारे तथ्यों तक पहुंचने की कोशिश कर रही थी। टीम के मुताबिक सीसीटीवी के कवरेज एरिया से निकलते वक्त गैंग के सदस्यों ने टोपी से सिर ढंका हुआ था।

एक अन्य कैमरे में कुछ लोग अपने हथियारों का इस्तेमाल कर दरवाजा खोलने की कोशिश करते दिखे। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक फुटेज में दो लोग लोहे की रॉड से लॉक तोड़कर घर में घुसने की कोशिश करते दिख रहे हैं। इस फुटेज का इस्तेमाल कर पुलिस और जानकारी जुटाने में लगी थी। इसी बीच मंगलवार (14 मई) की रात पुलिस को तीनों के रंगपुरी इलाके में अपने एक दोस्त से मिलने आने की सूचना मिली। पुलिस ने स्कूटी पर आए लोगों को हिरासत में लिया। उनके पास से देसी पिस्तौल, दो चाकू और दरवाजों का ताला तोड़ने के सामान बरामद किए गए।

गैंग के लोगों के इस तरह के कई मामलों में शामिल होने की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया। तीनों की पहचान शरीफ, फहीम (26) और शाहिद (44) के रूप में हुई। फहीम गैंग के सरगना शरीफ का रिश्तेदार है। वहीं शाहिद कासना जेल में सजा काटने के दौरान उसके संपर्क में आया था। तीनों ने पुलिस को कहा कि वे सोसाइटी में घुसने के लिए सब्जी डिलीवरी करने की सर्विस का सहारा लेते थे। तीनों ने अपनी डिलीवरी मैन की पहचान के लिए शर्ट और टोपी खरीदी, साथ ही लीफलेट्स भी छपवाए, ताकि किसी को शक न हो।

मुरादाबाद का रहने वाला शरीफ 10 सालों से फरार है। उसने पुलिस को बताया कि उसका निशाना सिर्फ नकदी और गहने होते थे, क्योंकि इन्हें आसानी से दूर ले जाया जा सकता था। फिंगरप्रिंट्स से बचने के लिए वे हाथों में दस्ताने पहन लिया करते थे। सोसाइटी में घुसने के बाद वे दरवाजे पर घंटी बजाकर इस बात की पुष्टि कर लेते थे कि घर में कोई है या नहीं। जहां घर से कोई निकल आता था वहां ये लीफलेट्स थमा देते थे, जहां कोई जवाब न मिले वो घर इनका निशाना बन जाते थे।

 

तीनों लूटे हुए सामान को उत्तर-पूर्व दिल्ली के एक ऑटो ड्राइवर को सौंप देते थे, जो इन्हें एक जूलर (आभूषण निर्माता) तक पहुंचा देता था। ये तीनों गाजियाबाद की खोड़ा कॉलोनी में किराये का कमरा लेकर रह रहे थे।

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