केंद्र सरकार की केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (सीबीडीसी) को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) से जोड़ने की दिशा में दिल्ली सरकार ने तैयारी तेज कर दी है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने राजधानी के पांच जिलों की 36 सरकारी राशन दुकानों का चयन कर लिया है, जहां प्रायोगिक परियोजना के तहत डिजिटल रुपये के माध्यम से राशन वितरण शुरू किया जाएगा।

जानकारी के अनुसार, इन दुकानों पर सीबीडीसी योजना एक सितंबर से शुरू की जा सकती है, लेकिन पहले चरण में हरेक चयनित दुकानों से सिर्फ 25 राशनकार्डधारियों को सीबीडीसी योजना के तहत राशन दिया जाएगा। इसके लिए राशनकार्डधारियों के बैंक खाते में डिजिटल मुद्रा भेजी जाएगी, जिसे क्यूआर कोड के जरिए भुगतान कर लाभार्थी अपना राशन प्राप्त कर सकेंगे।

गुजरात और पुडुचेरी में भी चल रही है यह योजना

विभागीय सूत्रों के अनुसार, इसके लिए उन राशन दुकानों की सूची जारी कर दी गई है, जहां प्रायोगिक परियोजना के तहत सीबीडीसी योजना शुरू की जाएगी। इनमें सेंट्रल जिला, पूर्वी जिला, दक्षिण जिला व पश्चिम जिले से छह-छह दुकानों का चयन किया गया है। जबकि सर्वाधिक 12 दुकानों का चयन नई दिल्ली जिले से किया गया है। वर्तमान में गुजरात व पुडुचेरी में पायलेट प्रोजेक्ट के तहत सीबीडीसी योजना को शुरू किया गया है।

विभाग नए तरीके की ई-पोस मशीनों को भी लेकर आ रहा है, जिसके लिए कोटाधारकों को तकनीकी जानकारी मुहैया करवाई जा रही है। इस नई मशीन में चेहरा प्रमाणीकरण, क्यूआर रीडिंग व स्मार्ट कार्ड चिप रीडिंग की तकनीक को जोड़ा गया है। साथ ही आने वाले समय में इस मशीन को तराजू से जोड़कर भी खाद्यान्न वितरण किया जा सकेगा।

विभाग का मानना है कि इससे राशन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता आएगी और सही मात्रा में अनाज लाभार्थी को मिल सकेगा। हालांकि वर्तमान में इस्तेमाल में लाई जा रही ई-पोस मशीनों को भी तराजू से जोड़ने का प्रयास किया गया था, लेकिन वह विफल साबित हुआ है।

बता दें कि वर्तमान में जो ई-पोस मशीनें हैं वो आधार कार्ड से लिंक होने के अलावा अंगूठे का निशान व आंखों के प्रमाणीकरण से जोड़ी गई हैं। वहीं नई मशीन में एप राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआइसी) का ही प्रयोग होगा। जबकि मशीनों की निविदा लिंकवेल कंपनी को दिया गया है और ई-पोस डिवाइज के माडल का नाम विजनटेक है।

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राजधानी दिल्ली के कई क्षेत्रों में सरकारी राशन की दुकानों पर बीते कई दिनों से बेहद घटिया, फफूंद लगा हुआ अनाज आपूर्ति किए जाने का मामला सामने आया है। स्थिति इतनी गंभीर है कि अनाज पशुओं के खाने लायक भी नहीं बचा है। गीली बोरियों में फफूंद लगा हुआ राशन है, जिसमें काले थक्के बने हुए हैं। बिना गुणवत्ता की जांच किए भेजे जा रहे इस खाद्यान्न के चलते कोटाधारकों व राशन कार्डधारियों में परस्पर विरोध भी उत्पन्न हो रहा है। जबकि खाद्य एवं आपूर्ति विभाग कोटाधारकों द्वारा की गई शिकायतों पर मौन है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक