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Mohammed Zubair Case: मोहम्मद जुबैर की जमानत की अर्जी खारिज, कोर्ट ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा

दिल्ली पुलिस ने शनिवार को कहा कि जुबैर की कंपनी को पाकिस्तान, सीरिया और अन्य खाड़ी देशों से चंदा मिला है।

Mohammed Zubair Case: मोहम्मद जुबैर की जमानत की अर्जी खारिज, कोर्ट ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा
ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर की जमानत याचिका खारिज। ( फोटो सोर्स: ANI )।

दिल्ली की एक अदालत ने पत्रकार मोहम्मद जुबैर की जमानत याचिका खारिज कर दी है। उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। इस मामले के लेकर शनिवार को विवाद भी हुआ। अदालत के फैसले से पहले एक पुलिस अधिकारी ने मीडिया को जानकारी दे दी कि जुबैर की बेल याचिका खारिज हो गई है। जिस समय पुलिस अधिकारी ने ये जानकारी दी, उस समय कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया भी नहीं था। इसे लेकर जमकर विवाद हुआ और जुबैर के वकील ने इस खबर को लेकर सवाल भी उठाया।

इससे पहले पेशी के दौरान दिल्ली पुलिस ने मोहम्मद जुबैर पर साजिश रचने और सबूतों को नष्ट करने का आरोप लगाया। ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर की जमानत याचिका खारिज करने का अदालत से आग्रह करते हुए दिल्ली पुलिस ने शनिवार को कहा कि उनकी कंपनी को पाकिस्तान, सीरिया और अन्य खाड़ी देशों से चंदा मिला है।

बता दें कि दिल्ली पुलिस ने ईडी को जुबैर की बैंक डिटेल सौंपी है। कहा जा रहा है कि इसमें विदेशों से पैसे आने की जानकारी है। ED को दिल्ली पुलिस ने 29 जून को Pravda foundation ICICI बैंक की डिटेल्स दी है। इस खाते में पिछले तीन महीनों में 56 लाख रुपए आए हैं। जिसे करीब चार हजार लोगों ने भेजे हैं। सूत्रों का कहना है कि अकाउंट में पाकिस्तान और सऊदी से भी पैसे आए हैं। स्पेशल सेल की आईएफएसओ के पुलिस अधिकारियों के मुताबिक जुबैर के बैंक अकाउंट में पैसे यूपीआई, ई-वॉलेट, कार्ड व इंटरनेट बैंकिंग से आए हैं।

दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस यूनिट ने सोमवार (27 जून, 2022) को जुबैर को गिरफ्तार किया था। दिल्ली पुलिस ने एक व्यक्ति की शिकायत के आधार पर पहले प्राथमिकी दर्ज की फिर जुबैर को गिरफ्तार किया। शख्स ने सोशल मीडिया पर दिल्ली पुलिस को टैग करते हुए आरोप लगाया था कि जुबैर ने उसकी भावनाओं को चोट पहुंचाई है।

उसने अपनी शिकायत में कहा था कि जुबैर के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को भड़काने के आरोप में कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। इस महीने की शुरुआत में उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 153-ए (विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) और 295-ए (दुर्भावनापूर्ण कृत्य, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

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