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अंधेरे में डूबेगी दिल्‍ली? सिर्फ डेढ़ दिन के कोयले का स्‍टॉक, मंत्री ने केंद्र को लिखी चिट्ठी

15 दिनों के हिसाब से दिल्ली एनसीआर के पावर प्लांट में करीब 8.40 लाख टन कोयला होना चाहिए था, लेकिन इस समय केवल 90 हजार मीट्रिक टन कोयला ही बचा हुआ है।

दिल्ली में हो सकती है बिजली की भारी किल्लत। (file photo)(representational image)

दिल्ली में आने वाले दिनों में बिजली संकट बढ़ सकता है। दरअसल दिल्ली-एनसीआर के पावर प्लांट कोयले के स्टॉक की कमी से जूझ रहे हैं, जिसके चलते आने वाले दिनों में दिल्ली अंधेरे में डूब सकती है। दिल्ली सरकार के ऊर्जा मंत्री सत्येन्द्र जैन ने इस संबंध में केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री को पत्र भी लिखा है।

क्या है कारणः दिल्ली-एनसीआर के थर्मल जनरेटिंग स्टेशनों में नियमनुसार 15 दिनों का कोयले का स्टॉक होना चाहिए, लेकिन मौजूदा स्थिति ये है कि कोयले का स्टॉक सिर्फ डेढ़ दिन का ही बचा हुआ है। आंकड़ों के अनुसार, 15 दिनों के हिसाब से दिल्ली एनसीआर के पावर प्लांट में करीब 8.40 लाख टन कोयला होना चाहिए था, लेकिन इस समय केवल 90 हजार मीट्रिक टन कोयला ही बचा हुआ है। कोयले के स्टॉक में कमी का कारण रेलवे की ओर से ट्रांसपोर्टेशन रेक्स मुहैया नहीं कराया जाना बताया जा रहा है, जिसके चलते कोयले की ढुलाई नहीं हो पा रही है।

दिल्ली के ऊर्जा मंत्री का कहना है कि यदि जल्द ही इस दिशा में कदम नहीं उठाए गए तो दिल्ली में बिजली का भारी कमी हो सकती है। गर्मी को देखते हुए दिल्ली में बिजली की मांग 7000 मेगावॉट तक पहुंच सकती है, वहीं कोयले की कमी के कारण दादरी 1,2 झज्जर और बदरपुर पावर प्लांट बंद करने की नौबत आ सकती है, जिसके चलते दिल्ली में 2000 मेगावॉट तक बिजली की कमी हो सकती है और दिल्ली एनसीआर में हालात बेहद खराब हो सकते हैं। सत्येंद्र जैन ने अपने पत्र में बताया है कि रेलवे के पास ट्रांसपोर्ट वैगन की कमी है। ऐसे में केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री रेलवे के सामने यह मुद्दा उठाएं, ताकि कोयले का ट्रांसपोर्टेशन हो सके। गौरतलब है कि कोयले के स्टॉक में कमी पिछले 10 दिनों से आ रही है और अब यह स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है।

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