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दिल्ली विधानसभा में NPR-NRC के खिलाफ प्रस्ताव पास, केजरीवाल बोले- केंद्र सरकार लाकर रहेगी एनआरसी

अब तक पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और केरल सरकार एनपीआर के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर चुकी हैं, तमिलनाडु में भी इस पर रोक लगाई गई।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | Updated: March 13, 2020 8:13 PM
Arvind Kejriwalदिल्ली विधानसभा में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल। (फोटो- ट्विटर)

दिल्ली विधानसभा में शुक्रवार को नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (एनपीआर) और नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन (एनआरसी) के खिलाफ प्रस्ताव पास हो गया। आम आदमी पार्टी विधायकों के बहुमत वाले सदन में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि एनपीआर और एनआरसी के तहत जनता से अपनी नागरिकता साबित करने को कहा जाएगा। 90% लोगों के पास ये साबित करने के लिए कोई सरकारी जन्म प्रमाण पत्र नहीं है। क्या सबको डिटेंशन सेंटर भेजा जाएगा? यहां विधानसभा में 70 विधायक हैं। लेकिन सिर्फ 9 विधायकों ने कहा की उनके पास जन्म प्रमाण पत्र है। सभी को डिटेंशन सेंटर भेज दिया जाएगा। केजरीवाल ने चुनौती देते हुए कहा कि सभी केंद्रीय मंत्री सरकार द्वारा जारी किए अपने जन्म प्रमाण पत्र भी दिखाएं।

केजरीवाल ने आगे कहा, “20 जून 2019 को राष्ट्रपति जी ने साफ-साफ कहा था की- “केंद्र सरकार ने तय किया है कि एनआरसी को अमल किया जाए।’ 10 दिसंबर 2019 को संसद में गृहमंत्री ने कहा था की – “हम इस पर बिल्कुल साफ है कि एनआरसी तो हो कर रहेगा। इस गलतफहमी में मत रहना की एनआरसी नही होगा। एनपीआर के बाद ये एनआरसी करवाएंगे। राष्ट्रपति और गृहमंत्री ने स्पष्ट किया था की एनआरसी होकर रहेगा।”

‘शाह ने ये नहीं कहा कि एनआरसी में दस्तावेज नहीं मांगे जाएंगे’: केजरीवाल ने कहा, “गृहमंत्री अमित शाह ने देश को एक क्रोनोलॉजी बताई थी- पहले सीएए आएगा, फिर एनपीआर आएगा और फिर एनआरसी आएगा। ते तीनों कानून एक दूसरे से जुड़े है। देश के सारे लोगों की नागरिकता पर ये सवाल उठाएंगे। कल गृहमंत्री ने कहा कि एनपीआर में कोई दस्तावेज नही मांगे जाएंगे। उन्होंने ये नही कहा कि एनआरसी में दस्तावेज नहीं मांगे जाएंगे। ” केजरीवाल ने कहा कि मेरे परिवार और पूरे कैबिनेट के पास जन्म प्रमाण पत्र नहीं हैं। ये डर सबको सता रहा है। केंद्र से मेरी अपील है की एनपीआर और एनआरसी को रोक दिया जाए।

इससे पहले सरकार में मंत्री गोपाल राय ने प्रस्ताव रखते हुए कहा कि एनपीआर से देश में ज्यादातर लोग परेशान होंगे। राय ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह चाहे जो भी आश्वासन दें, लेकिन वे एनपीआर के 2003 के नियमों के तहत बाद में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन (एनआरसी) लाकर रहेंगे।

राय ने कहा, “पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने नागरिकता कानून में बदलाव किया था, जिसके आधार पर यह तय हुआ था कि एनपीआर का डेटा नागरिकता के साथ जोड़ा जाएगा। इसी के तहत बाद में वेरीफिकेशन की प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी। संदिग्ध लोगों का डेटा डाउटफुल (डी) के वर्ग में रखा जाएगा। गृह मंत्री अमित शाह कह चुके हैं कि एनपीआर में कोई डी कैटेगरी नहीं होगी। लेकिन उन्होंने यह भी कहा है कि वे सिर्फ 2003 के नियम अपना रहे हैं और यह नियम कहते हैं कि एनपीआर के डेटा के आधार पर ही एनआरसी के लिए जानकारी जुटाई जाएगी।”

राय ने गृह मंत्री के ऐलान पर सवाल खड़े करते हुए पूछा कि आखिर वे किस आधार पर एनआरसी नहीं होने की बात कह रहे थे। क्या 2003 के नियम बदले गए हैं? अगर नहीं, तो एनआरसी की प्रक्रिया अपने आप एनपीआर के बाद होगी। राय ने कहा कि हर शख्स इससे चिंता में है। असम में हुई एनआरसी प्रक्रिया का जिक्र करते हुए राय ने कहा कि एनआरसी और एनपीआर का धर्म से कोई लेना-देना नहीं। बता दें कि असम में एनआरसी के तहत 19 लाख हिंदू और मुस्लिमों के नाम नागरिकता रजिस्टर से बाहर कर दिए गए थे।

दिल्ली सरकार में मंत्री गोपाल राय ने कहा कि लोगों के मन में एनपीआर-एनआरसी को लेकर कई सवाल हैं, क्योंकि प्रधानमंत्री और गृहमंत्री हर बार इन मुद्दों पर अलग बयान देते हैं। कल शाह संसद में कह रहे थे कि एनपीआर और एनसीआर में कोई लिंक नहीं है, जबकि कुछ महीनों पहले ही वे क्रोनोलॉजी समझा रहे थे। इसलिए दिल्ली में एनपीआर अपडेशन को रोक देना चाहिए और अगर केंद्र सरकार जोर डालती है, तो इसे 2010 के फॉर्मेट में ही कराया जाना चाहिए।

बता दें कि अब तक कुछ राज्यों ने एनपीआर के खिलाफ प्रस्ताव पारित किए हैं। इनमें ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले पश्चिम बंगाल और लेफ्ट पार्टी नीत केरल शामिल हैं। एक दिन पहले (12 मार्च) को एनडीए में भाजपा की सहयोगी एआईएडीएमके ने भी तमिलनाडु में एनपीआर लागू करने से इनकार कर दिया।

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