दिल्ली नगर निगम (MCD) ने गुरुवार को चांदनी चौक के कूचा महाजनी इलाके में चार इमारतों के बेसमेंट में चल रही 54 ज्वेलरी की दुकानों को सील कर दिया। इसकी वजह से कई व्यापारियों की सोने और चांदी की ज्वेलरी उनकी दुकानों के अंदर ही बंद हो गई। MCD ऐसी इमारतों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई कर रही है, जो बिना नियम के कमर्शियल गतिविधि चला रहे हैं।
दुकानदारों का कहना है कि MCD अधिकारी गुरुवार सुबह करीब 11:30 बजे बिना किसी पहले से सूचना के इलाके में पहुंचे और उनसे बाहर निकलकर अपनी दुकानें बंद करने को कहा। उन्होंने आगे कहा कि इसके बाद अधिकारियों ने शटर पर सीलिंग ऑर्डर के नोटिस चिपका दिए, दुकानों पर ताला लगा दिया और उन्हें सील कर दिया। सीलिंग ऑर्डर के मुताबिक, इन दुकानों के बेसमेंट में कमर्शियल ट्रेड चल रहा था, जो दिल्ली मास्टर प्लान (MPD) 2021 के तहत मंज़ूर इस्तेमाल का उल्लंघन है।
DMC एक्ट के तहत हुई कार्रवाई
आदेश में कहा गया है कि सबसे पहले 19 नवंबर, 2019 को दिल्ली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (DMC) एक्ट, 1957 के सेक्शन 345-A के तहत एक कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, जिसमें मालिकों/कब्ज़ा करने वालों को 48 घंटे के अंदर बेसमेंट का कमर्शियल गलत इस्तेमाल बंद करने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद 2025 में मालिकों को निजी सुनवाई के कई मौके दिए गए, जिसके बाद व्यापारियों को सालाना कन्वर्ज़न चार्ज का 12 गुना पेनल्टी देने का निर्देश दिया गया। हालांकि इस निर्देश का उन्होंने पालन नहीं किया। इसके बाद इस साल 17 फरवरी को दुकानों के खिलाफ सीलिंग ऑर्डर जारी किया गया।
MCD के आधिकारिक बयान के मुताबिक, “मॉनिटरिंग कमेटी/सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर कार्रवाई करते हुए MCD ने 10.09.2026 को कूचा महाजनी, चांदनी चौक में प्रॉपर्टीज़ के बेसमेंट में चल रही 54 गैर-कानूनी दुकानों के खिलाफ सीलिंग की कार्रवाई की। यह कार्रवाई दिल्ली के यूनिफाइड बिल्डिंग बाय-लॉज (UBBL) 2016 और MPD-2021 का उल्लंघन करके की जा रही गैर-कानूनी कमर्शियल गतिविधियों के खिलाफ की गई, जिसमें फायर डिपार्टमेंट और दूसरी कानूनी मंज़ूरियों का पालन न करना भी शामिल है। DMC एक्ट के सेक्शन 345-A और सेक्शन 347 के तहत सीलिंग के आदेश जारी किए गए, जिसके अनुसार सभी 54 गैर-कानूनी दुकानों को सील कर दिया गया।”
‘हमारा सारा सामान अंदर पड़ा है’
MCD ने यह कार्रवाई दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंज़िला इमारत गिरने के बाद की है, जिसमें सात लोगों की मौत हो गई थी। मोहिनी मार्केट के व्यापारियों में से एक आदेश कुमार जैन का दावा है कि उनकी दुकान बेसमेंट में नहीं, बल्कि ग्राउंड फ्लोर पर थी। उन्होंने कहा, “हमने 2019 में एक अर्जी दी थी कि हम बेसमेंट से दुकान नहीं चला रहे हैं। हम सिर्फ़ 3 फ़ीट नीचे थे, जो बेसमेंट नहीं माना जाता। लेकिन जब दो बार सीवर लाइन बिछाई गई और एक सड़क बनाई गई, तो हमारी दुकानों का बेस और नीचे कर दिया गया। हम 1997 से यहां ये दुकानें चला रहे हैं। हमारे पास GST नंबर, सेल्स टैक्स नंबर और इनकम टैक्स नंबर है, साथ ही उस समय के बिजली के बिल भी हैं। दुकान मालिकों के पास सभी संबंधित अधिकारियों से ज़रूरी रजिस्ट्रेशन भी हैं। जैसा कि आप जानते हैं, सेल्स टैक्स और बिजली अधिकारी दुकान पर आते हैं और वेरिफ़ाई करते हैं कि हम अपना बिजनेस कहां चला रहे हैं। अगर यह ग्राउंड फ़्लोर है, तो वे ग्राउंड फ़्लोर लिखते हैं, अगर यह फर्स्ट फ़्लोर है, तो वे फर्स्ट फ़्लोर लिखते हैं। इसलिए हम सभी दुकानदारों के पास ऐसे डॉक्यूमेंट हैं जिनमें पता साफ़ तौर पर ‘ग्राउंड फ़्लोर’ लिखा है। सीलिंग का ऑर्डर फरवरी में पास हुआ था, और वे (MCD अधिकारी) बिना किसी पहले से बताए अचानक आ गए। इसलिए हमारा सारा सामान अंदर पड़ा है, जैसे चेकबुक, इंटरनेट पासवर्ड। कस्टमर के ऑर्डर भी दुकानों के अंदर पड़े हैं। वे हमें पिछले छह महीनों में बता सकते थे कि सीलिंग का ऑर्डर पास हो गया है और वे कभी भी आ सकते हैं। वे छह महीने तक क्या कर रहे थे?”
इस बीच ऑल इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश सिंघल ने कहा कि वे अधिकारियों से मिले हैं और अपनी चिंताएं बताई हैं। उन्होंने कहा, “हमने पार्षद, सांसद और विधायक से बात की है। हमने मुख्यमंत्री कार्यालय से भी संपर्क किया था। लेकिन उनमें से कोई भी मदद नहीं कर सका, क्योंकि यह ड्राइव सुप्रीम कोर्ट की मॉनिटरिंग कमेटी की सीधी निगरानी में चल रही है। हमने डिप्टी कमिश्नर को दुकानें टेम्पररी तौर पर खोलने के लिए एप्लीकेशन भेजी हैं ताकि व्यापारी अपना सामान इकट्ठा कर सकें।”
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