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आप सरकार और उपराज्यपाल के बीच फिर ठनी

उपराज्यपाल अनिल बैजल ने बुधवार को मोहल्ला क्लीनिकों के मसले पर आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के विधायकों से हुए विवाद को गुरुवार शाम सुलझाने की पूरी कोशिश की।
Author नई दिल्ली | September 1, 2017 01:10 am
उपराज्यपाल अनिल बैजल ने बुधवार को मोहल्ला क्लीनिकों के मसले पर आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के विधायकों से हुए विवाद को गुरुवार शाम सुलझाने की पूरी कोशिश की।

उपराज्यपाल अनिल बैजल ने बुधवार को मोहल्ला क्लीनिकों के मसले पर आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के विधायकों से हुए विवाद को गुरुवार शाम सुलझाने की पूरी कोशिश की। उपराज्यपाल ने कहा कि वे भी चाहते हैं कि मोहल्ला क्लीनिक चलें, लेकिन पारदर्शी तरीके से। हालांकि दिल्ली सरकार के अधिकारियों ने इस परियोजना में सरकार की कई खामियों को बताया। इस मामले को लेकर बैजल ने गुरुवार को राजनिवास में शाम 5 बजे मोहल्ला क्लिनिकों पर एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, मंत्री सत्येंद्र जैन, मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, वित्त सचिव, प्रधान सचिव (सतर्कता), स्वास्थ्य सचिव आदि मौजूद थे।

बैठक की शुरुआत में ही उपराज्यपाल ने कहा कि प्राथमिक स्वास्थ्य उपचार एक महत्वपूर्ण सेवा है और हर सरकार का लक्ष्य अपने नागरिकों को इसे प्रभावी ढंग से पहुंचाना होना चाहिए। उन्होंने हमेशा दिल्लीवासियों के स्वास्थ्य सेवा तंत्र को मजबूत बनाने की पहल का समर्थन किया। उपराज्यपाल ने बताया कि पदभार ग्रहण करने के कुछ दिनों बाद ही उन्होंने स्कूलों के लिए अनुमोदित भूमि पर मोहल्ला क्लिनिक स्थापित करने के लिए सैद्धांतिक अनुमोदन दिया था। उपराज्यपाल ने यह पाया कि आम आदमी मोहल्ला क्लिनिक जैसे अतिमहत्वपूर्ण परियोजना को लागू करते समय इस बात को महत्व देना चाहिए कि सभी तरह के मुद्दे संबोधित हों और यह भी सुनिश्चित किया जाए कि कार्यक्रम पारदर्शी ढंग से अपने लक्ष्य की ओर बढ़े। उपराज्यपाल ने मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया कि मोहल्ला क्लिनिक पर फैसला पर्याप्त सुरक्षा उपायों को निहित करके लिया जाएगा ताकि दिल्लीवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पारदर्शी एवं प्रभावी रूप से मिल सकें।

केजरीवाल सरकार का पिछले उपराज्यपाल नजीब जंग से छत्तीस का आंकड़ा रहा। बाद में जब ये समस्या रोजाना सामने आने लगी, तो पूर्व उपराज्यपाल जंग स्वयं से ही ये पद छोड़ गए और उनके स्थान पर अनिल बैजल उपराज्यपाल बने। दिल्ली में नए उपराज्यपाल के पद ग्रहण करते ही मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार नए उपराज्यपाल से तालमेल बनाकर कार्य करेगी। उपराज्यपाल बैजल ने पद संभालते ही राजधानी के विशेष संविधान के तहत कार्य करना शुरू कर दिया। उन्होंने अपनी तरफ से केजरीवाल सरकार के कई फैसलों को माना। एक समय ऐसा लगने लगा कि उपराज्यपाल बैजल और केजरीवाल सरकार में संबंध बेहतर लगने लगे। बाद में शुंगलू कमेटी की सिफारिश पर बैजल ने राजधानी में राऊज एवन्यू स्थित ‘आप’ के कार्यालय को ही अवैध घोषित करके उसे खाली करवाने के आदेश जारी कर दिए। ‘आप’ इस मामले को अदालत ले गई और वहां से यह बंगला खाली करवाने पर रोक लग गई। हाल ही में बवाना विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुआ।

केजरीवाल और उनकी पार्टी के लोगों ने इस सीट को जीतने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी। चुनाव हुआ और ‘आप’ उम्मीदवार यहां से भारी मतों से जीता। केजरीवाल ने उसी दिन शाम से ही भाजपा पर आरोपों की झड़ी लगा दी। उपराज्यपाल निवास पर बुधवार को जो हुआ, उससे लगने लगा है कि राजधानी में अब एक बार फिर से उपराज्यपाल और केजरीवाल सरकार में पहले स्थान का झगड़ा शुरू हो जाएगा। बुधवार को विधायक सौरभ भारद्वाज ने उपराज्यपाल बैजल से मिलने का समय लिया था। तय समय पर सौरभ उपराज्यपाल निवास पर पहुंचे और फिर एक-एक करके वहां पर ‘आप’ के ज्यादातर विधायक पहुंच गए।

उपराज्यपाल वहां पर आए और विधायकों ने मोहल्ला क्लीनिकों की फाइल को रोकने के आरोप लगाने शुरू कर दिए। उपराज्यपाल कुछ समय वहां पर रूके और फिर चले गए। उनके जाने के बाद ‘आप’ विधायक काफी देर तक वहां पर रूके रहे और उपराज्यपाल से इस मामले में कोई संतोषजनक आश्वासन देने की मांग करने लगे। लेकिन वहां से जब उन्हें कोई जवाब नहीं मिला, तो ‘आप’ विधायक वहां से लौट गए।

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