Delhi Summer: राजधानी दिल्ली में मार्च की शुरुआत से ही अप्रैल जैसी गर्मी का असर नजर आ रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आइएमडी) के अनुसार, आज यानी सात मार्च को दिल्ली का अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के पार जा सकता है, जबकि न्यूनतम तापमान 16 से 18 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। वहीं, हवाओं की गति बेहद धीमी रहने की संभावना है, जो शून्य से 10 किलोमीटर प्रति घंटा तक रह सकती है।

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष छह मार्च बीते 15 वर्षों में सबसे गर्म दिन के रूप में दर्ज किया गया। शुक्रवार को दिल्ली का अधिकतम तापमान सामान्य से सात डिग्री अधिक 34.4 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। इससे पहले सबसे गर्म छह मार्च का रिकार्ड वर्ष 2012 में बना था, जब अधिकतम तापमान 33.0 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा था। इसके बाद वर्ष 2021 में छह मार्च को तापमान 31.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।

मार्च की शुरुआत से ही राजधानी का तापमान महीने के औसत से अधिक बना हुआ है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इसी वजह से इस साल गर्मी समय से पहले असर दिखा सकती है और लोगों को लू जैसे हालात का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस वर्ष मार्च का महीना वर्ष 2021 का रिकार्ड तोड़ पाएगा।

वर्ष 2021 में 30 मार्च को लू की स्थिति को देखते हुए नारंगी चेतावनी जारी की गई थी और अधिकतम तापमान 40.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। आइएमडी के अनुसार, शुक्रवार को दिल्ली के आयानगर निगरानी केंद्र में अधिकतम तापमान सामान्य से 7.4 डिग्री अधिक 34.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं न्यूनतम तापमान भी सामान्य से 3.6 डिग्री अधिक 17.0 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड हुआ। जबकि राजघाट निगरानी केंद्र में न्यूनतम तापमान सबसे अधिक 20.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक तापमान में बढ़ोतरी की एक बड़ी वजह हवाओं की गति में कमी है। शुक्रवार को सतही हवाओं की रफ्तार घटकर करीब 16 किलोमीटर प्रति घंटा रह गई, जिसके कारण गर्मी का असर अधिक महसूस किया जा रहा है।

यह भी पढ़ें – इस साल गर्मियों में झेलने पड़ सकते हैं लू के अधिक थपेड़े, बिहार-UP समेत इन राज्यों में रह सकती है तेज गर्मी

भारत मौसम विज्ञान विभाग ने शनिवार को अपने महीने के अनुमान में कहा कि मार्च और मई के बीच देश के अधिकतर हिस्सों में लोगों को सामान्य से अधिक दिन लू के थपेड़े झेलने पड़ सकते हैं। इनमें पश्चिमी राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, दक्षिणी व पूर्वी महाराष्ट्र, पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और उत्तरी कर्नाटक और उत्तरी तमिलनाडु के कुछ हिस्से शामिल हैं। पूरी खबर पढ़ें…