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नेहरू मेमोरियल को तीन मूर्ति परिसर खाली कराने के नोटिस पर दिल्ली हाईकोर्ट की रोक

दिल्ली उच्च न्यायालय ने तीन मूर्ति एस्टेट परिसर को खाली करने के लिए जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल फंड (जेएनएमएफ) को दिए गए नोटिस पर बृहस्पतिवार को रोक लगा दी।

Author November 2, 2018 11:09 AM
जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल म्यूजियम

दिल्ली उच्च न्यायालय ने तीन मूर्ति एस्टेट परिसर को खाली करने के लिए जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल फंड (जेएनएमएफ) को दिए गए नोटिस पर बृहस्पतिवार को रोक लगा दी।
न्यायालय ने जेएनएमएफ की याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा है। जेएनएमएफ ने उसे इस परिसर को खाली करने के 15 अक्टूबर को संपदा अधिकारी से मिले नोटिस को रद्द करने की मांग की है। न्यायमूर्ति अनु मल्होत्रा ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 16 नवंबर तय की। जेएनएमएफ की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अदालत से कहा कि सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जेदार निष्कासन) अधिनियम, 1971 के प्रावधानों के तहत जारी यह नोटिस मनमानापूर्ण और क्षेत्राधिकार के बाहर है तथा बिना सोचे-समझे जारी कर दिया गया।

जेएनएमएफ ने इन दावों से इनकार किया है कि संबंधित संपत्ति पर उसका अवैध कब्जा है। 1964 में स्थापित यह फंड 1967 से तीनमूर्ति परिसर में स्थापित है। तीनमूर्ति भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु का आवास हुआ करता था। जेएनएमएफ के कार्यालय मुख्य बिल्डिंग का हिस्सा नहीं हैं बल्कि पूर्वी हिस्से में बैरकों में है। उसका प्रवेश भी तीन मूर्ति मार्ग पर अलग से है।

वकीलों- सुनील फर्नांडीस और प्रियांशा इंद्र शर्मा के माध्यम से दायर इस याचिका में कहा गया है कि यह नोटिस दुर्भावनापूर्ण है और इसे निहित राजनीतिक स्वार्थ से जारी किया गया है। याचिका में संपदा अधिकारी की कार्यवाही को एक बड़ी साजिश का हिस्सा करार देते हुए कह गया है, ‘‘नेहरु की विरासत ऐतिहासिक तथ्य है जिसे अब भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार मिटाना चाहती है । भाजपा उन धर्मनिरपेक्ष और समावेशी सिद्धांतों के विरुद्ध है जिनके पक्ष में नेहरु सदैव खड़े रहे।

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