Delhi High Court News: दिल्ली उच्च न्यायालय ने आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए निजी विद्यालयों को ‘स्कूल स्तरीय फीस विनियमन समिति’ (एसएलएफआरसी) गठित करने के दिल्ली सरकार के आदेश का अनुपालन शनिवार को स्थगित कर दिया। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने कहा कि सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं के लंबित रहने के दौरान, एसएलएफआरसी का गठन स्थगित रहेगा और स्कूल शैक्षणिक वर्ष 2026-2027 के लिए वही फीस वसूलने के हकदार होंगे, जो उन्होंने पिछले शैक्षणिक वर्ष में वसूली थी।

अधिसूचना पर रोक लगाने का अनुरोध

पीठ ने कहा कि किसी भी प्रकार की अत्यधिक फीस को कानून के अनुसार विनियमित किया जाएगा। पीठ ने यह आदेश कई स्कूल संघों की याचिकाओं पर दिया। याचिकाओं में दिल्ली सरकार द्वारा एक फरवरी को जारी उस अधिसूचना पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया था, जिसमें विद्यालयों को 10 दिनों के भीतर एसएलएफआरसी गठित करने को कहा गया था। याचिकाकर्ताओं में दिल्ली पब्लिक स्कूल सोसाइटी, एक्शन कमेटी अनएडेड रिकग्नाइज्ड प्राइवेट स्कूल्स, द फोरम ऑफ माइनॉरिटी स्कूल्स, फोरम फार प्रमोशन ऑफ क्वालिटी एजुकेशन फार आल, रोहिणी एजुकेशनल सोसाइटी और एसोसिएशन ऑफ पब्लिक स्कूल्स शामिल हैं।

अदालत ने कहा कि एक फरवरी की अधिसूचना में दी गई समय-सीमा के तहत, आगामी सत्र के लिए प्रत्येक स्कूल की फीस एक अप्रैल से पहले तय होने की संभावना नहीं है। उसने कहा कि दिल्ली स्कूल शिक्षा (फीस निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम में यह प्रावधान है कि स्कूल अधिनियम के प्रावधानों के तहत फीस निर्धारित या अनुमोदित होने तक पिछले शैक्षणिक वर्ष की फीस वसूल सकते हैं, इसलिए यदि इस स्तर पर अधिसूचना को स्थगित कर दिया जाता है तो कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

अदालत ने कहा कि यदि अधिसूचना पर रोक लगा दी जाती है तो छात्रों को कोई अपूरणीय क्षति नहीं होगी, क्योंकि मामले की सुनवाई के दौरान ली गई कोई भी फीस याचिकाओं के परिणाम के अधीन होगी और विद्यालयों को किसी भी अतिरिक्त राशि को वापस करने के लिए उत्तरदायी होना पड़ेगा।

अदालत का आदेश जनता की जीत : आशीष सूद

निजी स्कूलों की शुल्क बढ़ोतरी मामले पर आए उच्च न्यायालय के आदेश पर शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने प्रतिक्रिया जाहिर की। मंत्री ने अदालत के आदेश को सरकार की मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति का प्रमाण बताते हुए आम जनता की बड़ी जीत का दावा किया है। शिक्षा मंत्री ने न्यायालय द्वारा 12 मार्च तक फीस वृद्धि पर रोक लगाने के निर्णय को दिल्ली की जनता को फीस-माफिया से सुरक्षा प्रदान करने वाला कदम बताया है।

बढ़ा हुआ शुल्क देने के लिए मजबूर होना पड़ेगा

आम आदमी पार्टी के दिल्ली संयोजक सौरभ भारद्वाज ने कहा कि निजी स्कूलों के मालिकों और भाजपा की दिल्ली सरकार का गठजोड़ आज उच्च न्यायालय में फिर बेनकाब हो गया है। उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय के फैसले का सीधा मतलब यह है कि अप्रैल 2025 में ज्यादातर स्कूलों द्वारा की गई भारी शुल्क वृद्धि अब वापस नहीं ली जाएगी। अब मध्यम वर्ग के माता-पिता को वह बढ़ी हुई स्कूल शुल्क देने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।