ताज़ा खबर
 

हाई कोर्ट ने पूछा, टैक्स के बदले लोगों को मिल रही है सुरक्षा?

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को केंद्र सरकार और पुलिस से पूछा कि दिल्ली के लोग कर का भुगतान कर रहे हैं लेकिन ‘‘क्या बदले में उन्हें सुरक्षा मिल रही है।’’

Author नई दिल्ली | January 21, 2016 3:58 AM
दिल्ली उच्च न्यायालय (फाइल फोटो)

दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार और पुलिस से पूछा कि दिल्ली के लोग कर का भुगतान कर रहे हैं लेकिन ‘क्या बदले में उन्हें सुरक्षा मिल रही है।’ अदालत ने केंद्र सरकार से पूछा कि वह राष्ट्रीय राजधानी से ‘सौतेला’ व्यवहार क्यों कर रही है। अदालत ने कहा, ‘आप (केंद्र) धन के लिए लोगों पर कर लगा रहे हैं, यह आपकी जेब से नहीं आ रहा है। हर कोई भुगतान कर रहा है… लेकिन क्या बदले में उन्हें सुरक्षा मिल रही है? पता नहीं केंद्र दिल्ली में बेहतर पुलिस व्यवस्था में रूचि क्यों नहीं दिखा रहा। यह सौतेला व्यवहार क्यों?’

दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि उन्हें 64 हजार कर्मियों की जरूरत थी लेकिन केंद्र ने इसमें कटौती कर दी जिस कारण कर्मियों की संख्या घट कर करीब 14 हजार रह गई है। दिल्ली पुलिस के इस बयान के बाद न्यायमूर्ति बदर दुरेज अहमद और न्यायमूर्ति संजीव सचदेव ने ये सवाल किए। अदालत ने यह भी कहा कि गृह मंत्रालय ने 14 हजार अतिरिक्त पुलिसकर्मियों के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी लेकिन वित्त मंत्रालय ने इस पर ‘अड़ंगा’ डाल दिया और केंद्र से पूछा कि क्या ‘धन की कमी’ है। इसने कहा, ‘अगर गृह मंत्रालय ने इसे मंजूरी दी तो धन की व्यवस्था करना वित्त मंत्रालय का काम है।’

अदालत ने वित्त मंत्रालय के विचार को ‘अस्वीकार्य’ करार दिया कि क्या अतिरिक्त मानव शक्ति और प्रौद्योगिकी को उन्नत बनाए जाने की जरूरत है या नहीं। इसने पूछा कि ‘लोगों और पुलिस का जरूरी अनुपात’ क्या है और कहा कि वह 27 जनवरी तक उपयुक्त जवाब और सटीक आंकड़े चाहती है जो सुनवाई की अगली तारीख है।

दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने कहा कि समस्या ‘इच्छा की कमी’ है न कि धन की। उन्होंने कहा कि जब जिंदगी और स्वतंत्रता की बात हो तो धन कोई कारण नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार सीसीटीवी पर 450 करोड़ खर्च नहीं करना चाहती और और दिल्ली सरकार को 20 करोड़ रुपए की लागत से कैमरा लगाने नहीं देती।

मेहरा ने कहा, ‘अगर वे (केंद्र) दिल्ली पुलिस का प्रशासन नहीं देख सकते या देखने की इच्छा नहीं है तो उन्हें इसका नियंत्रण छोड़ देना चाहिए। बेड़ियां तोड़िए। हम ऐसा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’

सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि तीन वर्ष पहले उसने दिल्ली पुलिस में मानव शक्ति बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू की थी। इसने कहा, ‘बहरहाल, केंद्र का रूख काफी नकारात्मक रहा। उसके लिए मायने नहीं है कि यह सरकार है या पिछली सरकार।’

अदालत ने कहा कि सीसीटीवी लगाने के लिए 450 करोड़ कोई मॉल बनाने के खर्च से कम है और कहा कि लगता है कि लोगों की जिंदगी सस्ती है। इसने दिल्ली पुलिस को सुझाव दिया कि वह इस मुद्दे पर केंद्र की ‘पिछलग्गू नहीं बने’ और ‘स्वतंत्र रूप से काम करे।’

पीठ ने कहा कि इस समस्या के लिए दिल्ली पुलिस को अपने रुख में ‘ज्यादा आक्रामकता’ लानी होगी। इसने कहा, ‘अगर आप केंद्र के साथ चलेंगे तो कुछ नहीं होगा।’

अदालत ने कहा, ‘यह एक महत्त्वपूर्ण मुद्दा है लेकिन हमारा सोचना है कि इसे काफी हल्के में लिया जा रहा है।’ दिल्ली पुलिस की तरफ से वरिष्ठ वकील चेतन शर्मा और विशेष लोक अभियोजक शैलेंद्र बब्बर ने अदालत को आश्वासन दिया कि वे स्वतंत्र रूप से मुद्दे पर गौर करेंगे।

केंद्र ने हाल में हलफनामा देकर बताया था कि इसने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आपराधिक जांच को अलग करने के लिए 4227 पदों को मंजूरी दी है। केंद्र ने कहा था कि इन पदों को दो चरणों में लागू किया जाएगा जिसमें आधा 2016-17 और बाकी 2017-18 में योजना की समीक्षा के बाद।

केंद्र की पिछलग्गू न बने पुलिस
* अदालत ने कहा कि सीसीटीवी लगाने के लिए 450 करोड़ कोई मॉल बनाने के खर्च से कम है और कहा कि लगता है कि लोगों की जिंदगी सस्ती है। इसने दिल्ली पुलिस को सुझाव दिया कि वह इस मुद्दे पर केंद्र की ‘पिछलग्गू नहीं बने’ और ‘स्वतंत्र रूप से काम करे।’

* पीठ ने कहा कि इस समस्या के लिए दिल्ली पुलिस को अपने रुख में ‘ज्यादा आक्रामकता’ लानी होगी। इसने कहा, ‘अगर आप केंद्र के साथ चलेंगे तो कुछ नहीं होगा।’

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App