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सम-विषम, आप-भाजपा और नेशनल हेराल्ड मामले दिल्ली हाईकोर्ट में छाए रहे

वर्ष 2015 के दौरान आप सरकार की विवादित सम-विषम योजना और राष्ट्रीय राजधानी को नियंत्रण में लेने के लिए केंद्र के साथ उसके कटु सत्ता संघर्ष के मामले दिल्ली उच्च न्यायालय में छाए रहे..

Author नई दिल्ली | December 27, 2015 11:16 PM
दिल्ली उच्च न्यायालय (फाइल फोटो)

वर्ष 2015 के दौरान आप सरकार की विवादित सम-विषम योजना और राष्ट्रीय राजधानी को नियंत्रण में लेने के लिए केंद्र के साथ उसके कटु सत्ता संघर्ष के मामले दिल्ली उच्च न्यायालय में छाए रहे। यही नहीं दिल्ली उच्च न्यायालय ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके पुत्र राहुल गांधी को गंभीर झटका देते हुए नेशनल हेरल्ड मामले में सुनवाई के लिए एक निचली अदालत के समक्ष आरोपी के तौर पर पेश होने का भी निर्देश दिया। दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) मामले में वित्त मंत्री अरुण जेटली के खिलाफ मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की कथित अपमानजनक टिप्पणी के बाद आम आदमी पार्टी और केंद्र सरकार के बीच कटुता और बढ़ गई। मामले में अरुण जेटली ने मुख्यमंत्री और उनके साथी वरिष्ठ पार्टी नेताओं पर 10 करोड़ रुपए के हर्जाने का मुकदमा दायर किया है।

बहरहाल, राजनीतिक कानूनी लड़ाई के जिस मामले को इतिहास में याद किया जाएगा वह है नेशनल हेरल्ड मामला। 90.25 करोड़ रुपए की कथित अनियमितता को लेकर भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की शिकायत पर कांग्रेस नेताओं – सोनिया गांधी, राहुल गांधी, सुमन दुबे, मोती लाल वोहरा, ऑस्कर फर्नांडीज और सैम पित्रोदा- को जारी सम्मनों को चुनौती देने वाली उनकी याचिकाओं को खारिज करना चर्चित रहा।

कांग्रेस नेताओं के अलावा आप को भी उसके तत्कालीन कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर, पार्टी नेता सुरेंद्र सिंह के खिलाफ कथित फर्जी डिग्री के मामलों को लेकर और पूर्व कानून मंत्री सोमनाथ भारती के खिलाफ घरेलू हिंसा मामले के कारण उच्च न्यायालय में असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। अन्य दो विधायकों जरनैल सिंह और गुलाब सिंह ने भी हमले के मामलों में अग्रिम जमानत मांगी।

आप नेताओं के खिलाफ अलग अलग मामलों ने जहां उनका नाम खराब किया तो वहीं नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) से बिजली वितरण कंपनियों के आॅडिट कराए जाने का आप सरकार का बहुचर्चित कदम उच्च न्यायालय द्वारा खारिज किया जाना भी आप के लिए सबसे बड़ी शार्मिंदगी वाली घटना रही।

हालांकि, पार्टी के लिए कुछ खुशी के भी क्षण रहे क्योंकि सम-विषम योजना के भारी विरोध के बावजूद उच्च न्यायालय ने आप सरकार के इस कदम पर रोक नहीं लगाई और कहा कि यह महज 15 दिनों के लिए प्रायोगिक कदम है। दिल्ली सरकार के सम-विषम योजना लाने से काफी पहले उच्च न्यायालय ने वायु प्रदूषण के मुद्दे पर स्वत: संज्ञान लिया। उच्च न्यायालय ने शहर में हवा की गुणवत्ता को किसी ‘गैस चैम्बर’ के समान बताते हुए इससे उत्पन्न ‘आपात’ जैसी स्थिति से निपटने के लिए एक ठोस कार्य योजना बनाने में विफल रहने पर केंद्र और आप सरकार दोनों को ही आड़े हाथ लिया।

इस बीच, उच्च न्यायालय ने समय समय पर इंटरनेट आधारित टैक्सी सर्विस देने वाली उबर और ओला जैसी कंपनियों के खिलाफ कई आदेश जारी किए और उन्हें केवल सीएनजी वाहन चलाने का आदेश दिया। दूसरी ओर ग्रीनपीस कार्यकर्ता प्रिया पिल्लई को विमान से उतारे जाने के मामले को अदालत द्वारा अवैध बताया जाना नरेंद्र मोदी सरकार के लिए बड़े झटके वाली बात रही।

एफसीआरए पंजीकरण रद्द किए जाने के मामले का सामना कर रहे गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) के चेन्नई में पंजीकृत होने के कारण बाद में ग्रीनपीस संबंधी मामलों को लेकर ध्यान मद्रास उच्च न्यायालय पर केंद्रित हो गया।

2014 के कोयला नीलामी अध्यादेश सहित केंद्र को उसके कई नीतिगत फैसलों का बचाव करना मुश्किल भरा रहा। उच्च न्यायालय ने कोयला नीलामी अध्यादेश के संबंध में स्पष्टता की कमी का हवाला दिया और हालिया कॉल ड्रॉप मामले में हर्जाने का नियम लाने पर कॉरपोरेट सेक्टर के चुनौती देने पर भी केंद्र को सवालों का सामना करना पड़ा।

इन सभी घटनाक्रमों के बीच 16 दिसंबर 2012 का खौफनाक गैंगरेप और हत्या मामला भी तब सुर्खियों में आ गया जब उच्च न्यायालय ने किशोर दोषी (अब बालिग) को रिहा करने पर रोक लगाए जाने से इनकार कर दिया। इस मामले में मध्यरात्रि के समय दिल्ली महिला आयोग की ओर से उच्चतम न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग भी विफल रही।

आय से अधिक संपत्ति मामले में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और भ्रष्टाचार से जुड़े दो मामलों में पूर्व केंद्रीय मंत्री अंबुमणि रामदास जैसे राजनीति के क्षेत्र में दो बड़े दिग्गज आपराधिक मामलों में उलझे रहे। उच्च न्यायालय ने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओ पी चौटाला और उनके बेटे अजय चौटाला को शिक्षक भर्ती घोटाला में 10 साल जेल की सजा सुनाई।

उच्च न्यायालय ने नीतीश कटारा हत्याकांड मामले में दोषी ठहराए गए उत्तर प्रदेश के विवादित नेता डी पी यादव के बेटे विकास और उसके चचेरे भाई विशाल को दोषी ठहराए जाने के फैसले को बरकरार रखते हुए उनकी सजा बढ़ाकर बिना किसी छूट के 25 वर्ष तक की उम्रकैद की सजा कर दी। साथ ही सबूत मिटाने के लिए अतिरिक्त पांच साल की सजा के साथ दोनों पर 50-50 लाख रुपए का जुर्माना लगाए जाने का फैसला दिया।

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