भारत ने चार महीने पहले 14 साल तक की लड़कियों के लिए ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) टीकाकरण कार्यक्रम शुरू किया था। चार महीने में दिल्ली में सिर्फ 13,500 टीके ही लगाए गए हैं। इसे रफ्तार देने के लिए राज्य सरकार ने स्कूलों में नया अभियान शुरू किया है।

इंडियन एक्सप्रेस को मिली जानकारी के मुताबिक, इस अभियान के तहत अगले 100 दिनों में 1.49 लाख लड़कियों को टीके लगाए जाने हैं।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि समीक्षा में पता चला है कि टीकाकरण की रफ्तार बढ़ाने के लिए स्कूलों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग के एक अफसर ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि गर्मियों की छुट्टियों के बाद जब स्कूल खुले हैं तो हम इस अभियान को तेज कर रहे हैं। हालांकि दिल्ली में टीकाकरण की रफ्तार थोड़ा सा तेज हुई है। मई में यह लगभग 11,000 थी, जो अब करीब 13,500 हो गई है।

स्कूलों में जा रहे हैं डॉक्टर

अब जब स्कूल फिर से खुले हैं तो स्वास्थ्य विभाग जिलों के शिक्षा उप निदेशकों (डीडीई) के साथ-साथ स्कूल के प्रिंसिपल के साथ इसे लेकर बैठक कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, एचपीवी और टीके के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए डॉक्टर स्कूलों में जा रहे हैं। विभाग का कहना है कि वैक्सीन को लेकर झिझक इस अभियान की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है।

स्वास्थ्य विभाग लड़कियों के माता-पिता को ऐसी महिलाओं के वीडियो दिखा रहा है जिन्हें 2009 में यह वैक्सीन लगी थी। विभाग का कहना है कि आज ऐसी महिलाएं पूरी तरह स्वस्थ हैं और मां भी बन चुकी हैं। विभाग का कहना है कि सोशल मीडिया पर वैक्सीन को लेकर कई तरह की गलत सूचनाएं फैलाई जाती हैं।

सर्वाइकल कैंसर है खतरनाक

भारत सरकार की ओर से इस साल 28 फरवरी को 14 साल की लड़कियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एचपीवी टीकाकरण कार्यक्रम शुरू किया था। इसके तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हर साल लगभग 1.15 करोड़ लड़कियों को टीके लगाए जाने हैं। भारत में महिलाओं को होने वाले कैंसर में सर्वाइकल कैंसर दूसरे नंबर पर है और बड़ी संख्या में इसकी वजह से महिलाओं की मौत होती है।

इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) द्वारा प्रकाशित GLOBOCAN 2022 का अनुमान है भारत में हर साल 1.2 लाख से ज्यादा महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर होता है। यह भी सामने आया है कि करीब 80,000 महिलाओं की सर्वाइकल कैंसर से मौत हो जाती है। इसलिए यह बहुत जरूरी है कि टीकाकरण और समय पर जांच की जाए।

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जानलेवा इबोला वायरस (Ebola Virus) के खिलाफ वैश्विक जंग में एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि सामने आई है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित और पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) द्वारा तैयार की गई नई इबोला वैक्सीन (ChAdOx1 BDBV) का इंसानों पर पहला क्लिनिकल परीक्षण शुरू हो गया है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।