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कम से कम 100 बच्चों वाले अनाथालय में देना होगा भोजन- दिल्ली HC ने आरोपी को सुनाई सजा, जानिए पूरा मामला

Delhi High Court: पार्टियों ने आपस में मामले को सुलझा लिया और उनके बीच 26 सितंबर को एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए, जिसमें कहा गया था कि शिकायतकर्ता एफआईआर जारी नहीं रखना चाहते हैं।

कम से कम 100 बच्चों वाले अनाथालय में देना होगा भोजन- दिल्ली HC ने आरोपी को सुनाई सजा, जानिए पूरा मामला
दिल्ली हाईकोर्ट (express file photo)

Delhi High Court: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक शख्स के खिलाफ दर्ज FIR यह कहते हुए रद्द कर दी कि उसे कम से कम 100 बच्चों वाले अनाथालय में भोजन देना होगा। शख्स पर कार से बाइक सवार को टक्कर मारने के आरोप में एफ़आईआर दर्ज थी। अदालत ने आरोपी को दशहरा और दीपावली पर अनाथालय में सौ बच्चों को भोजन देने के लिए कहा है। उसके बाद ही रिहाई के निर्देश दिए गए हैं।

दशहरा और दीपावली पर अनाथालय में भोजन उपलब्ध कराए: न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने याचिकाकर्ता आरोपी व्यक्ति को आदेश दिया है कि वह 5 अक्टूबर और 24 अक्टूबर 2022 यानि दशहरा और दीपावली पर अनाथालय में भोजन उपलब्ध कराने के लिए कहा हाई। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि परोसा गया भोजन स्वच्छ होना चाहिए और सुरक्षित वातावरण में अच्छी तरह से पकाया जाना चाहिए। इसके अलावा कोविड प्रोटोकॉल का भी पालन किया जाना चाहिए।

दिल्ली हाईकोर्ट ने अतिरिक्त लोक अभियोजक से कहा कि वह अनाथालय की पहचान करके इसका नाम याचिकाकर्ता के वकील को दें। अदालत ने यह भी कहा कि अनाथालय में बच्चों की संख्या 100 से कम नहीं होनी चाहिए। याचिकाकर्ता दोनों दिन सौ बच्चों वाले अनाथालय को भोजन उपलब्ध कराएगा।

एफ़आईआर रद्द करने के आदेश: इस मामले में 13 सितंबर 2022 को शख्स के खिलाफ हरीनगर थाने में गैर इरादतन हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज किया गया था। घटना के बाद से ही आरोपी न्यायिक हिरासत में है। आरोपी को सामाजिक कार्य करने का आदेश देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट की पीठ ने एफ़आईआर रद्द करते हुए उसकी रिहाई के आदेश दिए हैं।

समझौते के आधार पर मांग: याचिकाकर्ता ने दर्ज एफ़आईआर को रद्द करने की मांग करते हुए कहा था कि पक्षकारों ने बिना किसी धमकी, दबाव, जबरदस्ती या अनुचित प्रभाव के मर्जी से समझौता कर लिया है। अपना फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश ने कहा कि चूंकि पार्टियों ने आपस में विवाद को सुलझा लिया है। ऐसे में अब एफ़आईआर को आगे बढ़ाने का कोई मकसद नहीं नजर आ रहा। हालांकि, अदालत ने माना कि चूंकि सत्र न्यायालय और उच्च न्यायालय दोनों ने इस मामले पर काफी समय बिताया है इसलिए याचिकाकर्ता को कुछ सामाजिक भलाई करनी चाहिए।

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First published on: 01-10-2022 at 01:17:36 pm
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