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बे-कार होने को लोग नहीं तैयार, पुलिस पर गुस्साई सरकार

चौथे कार फ्री डे के दिन सड़कों पर भीड़ रही और दिन भर कारें भी रेंगती रहीं। औपचारिकता दिखाती साइकिल रैली भी निकली।

बे-कार होने को लोग नहीं तैयार, पुलिस पर गुस्साई सरकार

चौथे कार फ्री डे के दिन सड़कों पर भीड़ रही और दिन भर कारें भी रेंगती रहीं। औपचारिकता दिखाती साइकिल रैली भी निकली। कार्यक्रम की अगुआई कर रहे मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाया कि वह इस कार्यक्रम को सफल बनाने के प्रयास नहीं कर रही है।

शुक्रवार को दिल्ली में ठंड अधिक होने से लोग घरों से कम निकले। सुबह आठ बजे के बाद जब कैलेवरे लेन पर साइकिल रैली निकाली गई तो उसमें ज्यादातर आप के कार्यकर्ता और स्कूली बच्चे थे। शुक्रवार को कोहरा होने के कारण भी यातायात धीमा रहा, जिसके कारण दिल्ली के बाकी जगहों की तरह विश्वविद्यालय मेट्रो स्टेशन और छत्रसाल स्टेडियम मार्ग पर जगह-जगह जाम लगा रहा। फ्री सेवा का वादा कर आॅटो यूनियन भी नदारत रही।

परिवहन मंत्री गोपाल राय ने बताया कि उन्हें विशेष आयुक्त यातायात से एक पत्र मिला था, जिसमें कहा गया था कि 22 तारीख को कार फ्री डे के दिन सिविल डिफेंस यातायात का प्रबंधन नहीं करेंगे बल्कि यातायात पुलिस इसकी जिम्मेदारी उठाएगी। राय का कहना था कि हम इससे बहुत खुश थे, लेकिन सड़कों पर कारें चल रही हैं। ऐसे में कार फ्री डे का क्या मतलब।

वहीं सिविल डिफेंस के कार्यकर्ता 11 बजे के बाद क्या करें उनके पास कोई दिशा निर्देश नहीं था। 1967 से सिविल डिफेंस में काम कर रहे 60 साल के रमेश चंद्र ने बताया कि कार फ्री डे मनाकर सरकार केवल खानापूर्ति कर रही है। एक अन्य सिविल डिफेंस नीरज ने बताया कि साईकिल रैली में निकले करीब तीन सौ लोगों में ज्यादातर पार्टी के कार्यकर्ता थे।

जीटीबी नगर, मॉडल टाऊन और मुखर्जी नगर इलाके के लोग तो रैली में दिखे ही नहीं। एक डीटीसी बस कंडक्टर हरिकिशन का कहना था कि सुबह साइकिल रैली निकलने के बाद करीब दो घंटे तक सड़क का एक लेन बंद था। वहीं ढाका गांव के रहने वाले कार सवार रवि रंजन आनंद का कहना था कि मेट्रो में भीड़ आएगी और दूसरे सार्वजनिक यातायात की व्यवस्था दुरुस्त नहीं होने से नहीं चाहते हुए भी आॅफिस जाने के लिए कार से जाना पड़ रहा।

रोहिणी के एक स्कूली वैन के ड्राइवर राज ने कहा कि स्कूली बच्चों को लाना ले जाना ही मेरा काम है। इसे कैसे छोड़ दूं। राजौरी गार्डन की रहने वाली कार चालक ज्योति का कहना था कि मुझे दोपहिया चलाना बिल्कुल नहीं आता और घर से निकलने के बाद अपनी कार ही एक सहारा है। बाकी ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था तो सम-विषम के दौरान दिख गई थी। विश्विद्यालय मेट्रो स्टेशन से निकली रैली में करीब तीन सौ साइकिल सवार थे। जिसमें कम से कम 50 लोग अपनी साइकिल लाए थे। बाकी की साइकिलें दिल्ली सरकार ने मुहैया कराई थीं।

वहीं माडल टाऊन की बत्ती पर दो कारें आपस में भिड़ गर्इं। इसके बाद कार सवारों में हाथापाई हुई। लेकिन वहां मौजूद सिविल डिफेंस के कार्यकर्ताओं ने बीच-बचाव कर मामले को शांत किया। दिल्ली सरकार का पहला कार फ्री डे 22 अक्तूबर को लाल किले से इंडिया गेट तक मनाया गया। दूसरा कार फ्री डे 22 नवंबर को द्वारका में था और तीसरा 22 नवंबर को विकास मार्ग लक्ष्मी नगर में मनाया गया।

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