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केजरी सरकार का आदेश: दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में मिले मुफ्त दवा

केजरीवाल सरकार के आदेशानुसार एक फरवरी से दिल्ली के सभी सरकारी अस्पतालों में मुफ्त दवा दी जानी है। लेकिन क्या अस्पताल इसके लिए तैयार हैं?

Author नई दिल्ली | February 3, 2016 4:51 AM

केजरीवाल सरकार के आदेशानुसार एक फरवरी से दिल्ली के सभी सरकारी अस्पतालों में मुफ्त दवा दी जानी है। लेकिन क्या अस्पताल इसके लिए तैयार हैं? दिल्ली सरकार के सबसे बड़े लोक नायक जयप्रकाश नारायण (एलएनजेपी) अस्पताल का जायजा लेने से जो तथ्य सामने आए उससे यही तस्वीर उभरी कि सरकारी फरमान, अस्पताल प्रशासन की तैयारियों के दावों और मरीजों की दवा की जरूरतों के बीच तालमेल में बहुत बड़ा अभाव है।
एलएनजेपी अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. योगेश कुमार सरीन का दावा है, ‘अस्पताल पूरी तरह से तैयार है, हमारे पास 95 फीसद तक दवाओं का भंडार है, कुछ-एक दवाएं जो नहीं है वे कल-परसों तक अधिकृत केमिस्ट से खरीद ली जाएंगी’। डॉक्टर सरीन ने यह भी बताया कि डॉक्टरों को कहा गया है कि वे सूची के अंदर की दवा लिखें और अगर कोई अन्य दवा लिखनी हो तो उसकी सूचना एमएस आॅफिस को दी जानी चाहिए।
चिकित्सा अधीक्षक के इन दावों के बीच अस्पताल के फार्मेसी काउंटर पर मरीजों और उनके परिजनों की लगी लंबी कतार तैयारियों की पोल खोलती नजर आई। और जब हमने कतार में खड़े लोगों से इस सरकारी तोहफे को लेकर उनकी राय जाननी चाही तो आशंका काफी हद तक सही साबित हुई। कई लोग स्टॉम्प के लिए चक्कर लगाते नजर आए, तो कई सोमवार की लिखी दवा के लिए मंगलवार को कतार में खड़े रहे, तो कई काउंटर स्टाफ पर जानबूझ कर देरी का आरोप लगाते दिखे।

काउंटर संख्या 2
’गाजियाबाद के लोनी से आर्इं तपस्वी ने कहा, ‘अपने दो पोतों के लिए एलर्जी की दवा लेनी है, तीन घंटे से खड़ी हूं, पता नहीं दवा मिलेगी या नहीं, इतनी लंबी कतार है, न कोई गार्ड, न कोई देखने वाला’। बेटे के इलाज के लिए जनकपुरी से आर्इं कुसुम ने बताया, ‘लाइन से निकाल दिया, बच्चों की एक ही लाइन है, औरत और मर्द दोनों इसी में खड़े हैं’। सूबेदार थोड़े खुशकिस्मत निकले। उन्हें बेटे के लिए तीन में से दो दवा मिल गई। तीसरी दवा कैसे मिलेगी, पूछने पर कहा, ‘कुछ बताया ही नहीं, इतनी भीड़ थी, बाहर से खरीदना होगा’।
काउंटर संख्या 4
’यहां खड़ी महिलाओं का रोष और ज्यादा दिखा। महिलाओं की इस कतार में खड़ी लोनी से आर्इं शकीला ने कहा, ‘पैर में रॉड डले होने के बावजूद मैं सोमवार को सुबह 9 से शाम 6 तक खड़ी रही, लेकिन दवा नहीं मिली, काउंटर बंद हो गया, सोमवार को तो मैं चक्कर खा कर गिर पड़ी, आज भी दवा मिलती है कि नहींं’। वहीं पचास साल के हृदय रोगी रुखसाना का आरोप था, ‘दवा देने में जानकर तेजी नहीं दिखाते ताकि लोग लौट जाएं, सुबह 6 बजे घर से निकली हूं, 2 बज रहे हैं, गार्ड अलग बदतमीजी करते हैं’। वहीं लोनी से आर्इं राजपती पर्ची पर स्टाम्प नहीं होने की वजह से चार चक्कर लगा चुकीं, अंत में उन्हें एमएस आॅफिस जाना पड़ा, फिर स्टाम्प लगी। कतार में कई लोग ऐसे दिखे जिनकी पर्ची पर स्टाम्प नहीं थी, लेकिन उन्हें नहीं मालूम कि इसके बिना दवा नहीं मिलेगी।
काउंटर संख्या 7
’मां के लिए दवा लेने आए सोनू ने कहा, ‘मेरे पास कल की पर्ची है, कल काउंटर शाम 5.30 को ही बंद कर दिया। आज 11 बजे से कतार में हूं, लेकिन दवा मिलेगी भी या नहीं यह पता नहीं क्योंकि काउंटर पर बैठे स्टाफ एक तो धीमी गति में काम करते हैं और ऊपर से बीच-बीच में काउंटर बंद कर गायब हो जाते हैं, कुछ कहने पर जवाब मिलता है कि दवा अपनी मर्जी से देंगे, मरीजों की मर्जी से नहीं’।
वरिष्ठ नागरिक काउंटर
’बहू के इलाज के लिए सुबह 8 बजे से दवा की उम्मीद में खड़े 70 साल के हंजर ने कहा, ‘खड़े-खड़े बुरा हाल है, बहू की तबीयत बहुत खराब है’। उनके आगे एक वृद्ध कतार में ही फर्श पर बैठे नजर आए। साठ साल की नफीसा बेगम खुद के लिए दवा के इंतजार में सुबह नौ बजे से खड़ी दिखीं।

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