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दिल्ली सरकार ने निजी स्कूलों से मांगे फीस वृद्धि पर प्रस्ताव

दिल्ली सरकार ने डीडीए की जमीन पर चल रहे कम से कम 300 निजी स्कूलों को फीस नहीं बढ़ाने के निर्देश देने के कुछ ही हफ्ते बाद इन स्कूलों से फीस बढ़ाने पर प्रस्ताव मांगे हैं।

Author नई दिल्ली | April 8, 2017 03:31 am
दिल्ली सरकार ने डीडीए की जमीन पर चल रहे कम से कम 300 निजी स्कूलों को फीस नहीं बढ़ाने के निर्देश देने के कुछ ही हफ्ते बाद इन स्कूलों से फीस बढ़ाने पर प्रस्ताव मांगे हैं।

दिल्ली सरकार ने डीडीए की जमीन पर चल रहे कम से कम 300 निजी स्कूलों को फीस नहीं बढ़ाने के निर्देश देने के कुछ ही हफ्ते बाद इन स्कूलों से फीस बढ़ाने पर प्रस्ताव मांगे हैं। शिक्षा निदेशालय (डीओई) ने निजी स्कूलों से 30 अप्रैल तक डीओई की वेबसाइट के जरिए प्रस्ताव देने को कहा है। स्कूलों को भेजी गई सूचना में कहा गया है, ‘डीओई स्कूलों द्वारा भेजे गए प्रस्तावों की जांच किसी अधिकारी अथवा टीम से कराएगा। अगर किसी स्कूल ने कोई प्रस्ताव नहीं भेजा तो फिर वह ट्यूशन फीस नहीं बढ़ा पाएगा’। सूचना के अनुसार स्कूलों को तब तक फीस नहीं बढ़ाने के ‘सख्ती से निर्देश’ दिए गए हैं जब तक उनके प्रस्तावों को विभाग से मंजूरी नहीं मिल जाती।

इसमें कहा गया, ‘पहले से मंजूरी मिले बगैर फीस बढ़ाए जाने के संबंध में किसी भी प्रकार की शिकायत को गंभीरता से लिया जाएगा और स्कूल कार्रवाई का जिम्मेदार होगा’। स्कूलों को रसीदें, भुगतान खाता, आय-व्यय खाता, पिछले साल की बैलेंस शीट सहित सभी अहम दस्तावेज भी जमा कराने होंगे। पिछले माह सरकार ने डीडीए की जमीन पर चलने वाले कम से कम 300 निजी स्कूलों को आगामी शिक्षण सत्र में फीस नहीं बढ़ाने के निर्देश दिए थे।

सरकार ने शेष बचे 1400 निजी स्कूलों को 10 फीसद से अधिक फीस नहीं बढ़ाने के आदेश दिए थे। सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी में अपने एक आदेश में कहा था कि राष्ट्रीय राजधानी में डीडीए से रियायती दरों पर जमीन पाए स्कूल सरकार से अनुमति लिए बगैर फीस नहीं बढ़ा सकते। गौरतलब है कि निजी स्कूलों की फीस को लेकर अभिभावकों और स्कूलों के बीच लंबे समय से खींचतान चल रही है। जो स्कूल सरकारी जमीनों पर चल रहे हैं उनके साथ इस मामले में टकराव बढ़ रहा है।

बता दें कि इससे पहले दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार (27 फरवरी) को दिल्ली सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश के अंतरिम आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी। एकल न्यायाधीश ने अपने अंतरिम आदेश में नर्सरी दाखिले के लिए स्कूल से दूरी के पैमाने पर रोक लगाई थी। मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी और न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की पीठ ने एकल न्यायाधीश को याचिकाओं पर शीघ्र फैसला करने को कहा। पीठ ने कहा, ‘हमनें याचिका (दिल्ली सरकार की) को खारिज कर दिया है। हमनें हालांकि एकल न्यायाधीश को निर्देश दिया है कि वह याचिकाओं (दिल्ली सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली) पर जितनी जल्दी हो सके, फैसला करें।’

पीठ ने यह भी कहा कि एकल न्यायाधीश को अपने अंतरिम आदेश में की गई टिप्पणी को ध्यान में रखकर आगे नहीं बढ़ना चाहिए। खंडपीठ 14 फरवरी के एकल न्यायाधीश के अंतरिम आदेश के खिलाफ दायर आम आदमी पार्टी सरकार की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। एकल न्यायाधीश ने दिल्ली सरकार के नर्सरी दाखिले के नए नियम पर रोक लगाते हुए कहा था, ‘एक छात्र के शैक्षिक भविष्य को सिर्फ इस बात से तय नहीं किया जा सकता कि नक्शे पर उसकी स्थिति कहां है।’ न्यायमूर्ति मनमोहन ने इस पैमाने को ‘मनमाना और भेदभावपूर्ण’ करार देते हुए कहा था कि इससे सिर्फ उन अभिभावकों को फायदा होगा जो अच्छे निजी विद्यालयों के पास रहते हैं।

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