दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत घर-घर जाकर सत्यापन कर रहे बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) के सामने कई तरह की चुनौतियां आ रही हैं। कहीं मतदाता जरूरी दस्तावेज नहीं दिखा पा रहे हैं तो कहीं बंद मकानों, किरायेदारों और लगातार बदलते पते की वजह से सत्यापन मुश्किल हो रहा है। ऐसे में चुनाव आयोग के इस अभियान में जमीनी स्तर पर काम कर रहे BLO पर काम का दबाव भी बढ़ गया है और मतदाताओं के सत्यापन की प्रक्रिया भी कई जगह जटिल होती जा रही है। इसके साथ ही निवासियों के सामने भी कई चुनौतियां आ रही हैं।

दिल्ली के संगम विहार में रहने वाली 65 वर्षीय गीता देवी से बीएलओ ने कहा कि दस्तावेज पर्याप्त नहीं हैं। जिसके बाद वह अपने घर गईं और कुछ ही देर बाद अपना मतदाता पहचान पत्र लेकर लौटीं। सहायक बीएलओ मुकेश चंद मीना ने कार्ड पर एक पल के लिए नज़र डाली और उसे वापस कर दिया। उन्होंने कहा, “मुझे आपका 2002 का वोटर आईडी चाहिए।”

स्थानीय निवासियों की परेशानियां

संगम विहार के ब्लॉक ए में अकेली रहने वाली गीता ने साल 2009 में मतदान करना शुरू किया था। उन्हें याद आया कि एक स्थानीय भाजपा कार्यकर्ता ने पड़ोस के कई निवासियों को मतदाता पहचान पत्र बनवाने में मदद की थी। उससे पहले उनका नाम दिल्ली की मतदाता सूची में कभी नहीं था। मुकेश ने अपना फोन निकालते हुए और चुनाव आयोग के ECINET एप्लिकेशन को खोलते हुए कहा, “कोई बात नहीं, हम इसे आपके माता-पिता से जोड़ देंगे। आप दिल्ली कहां से आई हैं?”

मुकेश ने बताया कि वह उनका जनगणना फॉर्म तो स्वीकार कर लेंगे लेकिन उसे उन मतदाताओं की श्रेणी में रखेंगे जिनका नाम 2002 की मतदाता सूची से मेल नहीं खाता। मतदाता सूची का ड्राफ्ट प्रकाशित होने के बाद उन्हें एक नोटिस मिलेगा जिसमें उनसे जन्मतिथि और जन्मस्थान प्रमाणित करने वाला सरकारी दस्तावेज़ प्रस्तुत करने को कहा जाएगा। इस स्पष्टीकरण से गीता की उलझन और बढ़ गई। उन्होंने कहा, “मैं इतने लंबे समय से वोट दे रही हूँ। अब मुझे क्यों परेशान कर रहे हैं?” मुकेश ने नरमी से जवाब दिया “माताजी, “हम जानते हैं कि आप एक वास्तविक मतदाता हैं लेकिन अब सरकार हर बात का दस्तावेज चाहती है।”

संगम विहार में मतदाता सूची से सबसे अधिक नाम हटाए गए

संगम विहार में पिछले सप्ताह तक मतदाता सूची से सबसे अधिक नाम हटाए गए , 1.5 लाख से अधिक। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अधिकारियों ने इससे पहले द इंडियन एक्सप्रेस को बताया था कि उन्हें उम्मीद है कि दिल्ली भर में लगभग 30% से 40% नाम मतदाता सूची से हटा दिए जाएंगे। एक अधिकारी ने कहा, “दिल्ली में प्रवासी मजदूरों, सरकारी कर्मचारियों और निजी क्षेत्र के पेशेवरों की बड़ी आबादी है जो सभी अक्सर एक जगह से दूसरी जगह जाते रहते हैं और अक्सर अपने पते अपडेट नहीं करते हैं। यही कारण है कि नाम हटाए जाने की संख्या 30% से अधिक हो सकती है।” अधिकारियों का कहना है कि शहरी क्षेत्रों में ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक नाम हटाए जाते हैं क्योंकि वहां की आबादी अधिक होती है।

दिल्ली में मतदान अधिकारी तैनात किए जा रहे

चुनाव आयोग के मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) के लिए पूरी दिल्ली में मतदान अधिकारी तैनात किए जा रहे हैं और 2002 के बाद रजिस्टर्ड हजारों मतदाताओं से 1 जनवरी, 2002 को मौजूद मतदाता सूची से मिलान करने के लिए कहा जा रहा है। 8 अगस्त की समय सीमा से पहले दिल्ली की मतदाता सूची का संशोधन पूरा करने के लिए 13,000 से अधिक बीएलओ तेजी से काम कर रहे हैं।

चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार, बीएलओ (जनगणना अधिकारी) से अपेक्षा की जाती है कि वे प्रत्येक घर में कम से कम तीन बार जाकर उसे ‘असंग्रहीत’ श्रेणी में रखें। इस श्रेणी में वे मतदाता शामिल हैं जो अनुपस्थित हैं, स्थानांतरित हो गए हैं, जिनकी मृत्यु हो गई है, जिनके नाम पर दोहरी प्रविष्टियां हैं या जो अन्य कारणों से आते हैं।

हमें अधिकतर फॉर्म खुद ही भरने पड़ते- BLO

बुधवार तक, बीएलओ शकुंतला ने अपने निर्वाचन क्षेत्र में आवंटित 1497 मतदाताओं में से 558 का डिजिटलीकरण कर लिया था। डिजिटलीकरण में भरे हुए जनगणना फॉर्म को इकट्ठा करना और उनके अपडेट को चुनाव आयोग के पोर्टल पर अपलोड करना शामिल है। उन्होंने बताया, तीन बार जाना शायद ही कभी काफी होता है। हम घरों में पांच या छह बार जाते हैं। अगर मैं बहुत सारे लोगों को विस्थापित दिखाने लगूँ तो हमारे वरिष्ठ अधिकारी सवाल उठाएंगे कि क्या वे सचमुच विस्थापित हुए हैं। हम अंत तक इसलिए भी इंतज़ार करते हैं क्योंकि कोई व्यक्ति बाद में आकर फॉर्म जमा कर सकता है। हम नहीं चाहते कि कोई भी वास्तविक मतदाता छूट जाए।”

मुकेश का कहना है कि काम में समय लगने का एक और कारण यह है कि कई मतदाता, जिनमें पढ़े-लिखे लोग भी शामिल हैं खुद फॉर्म भरने में कठिनाई महसूस करते हैं। वे कहते हैं, “आखिरकार हमें अधिकतर फॉर्म खुद ही भरने पड़ते हैं।” उनका अनुमान है कि उनकी सूचियों में शामिल लगभग 40% नाम उन लोगों के हैं जो पिछली एसआईआर के बाद से अपना पता बदल चुके हैं।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के एक अधिकारी ने दावा किया कि शहर में डिजिटलीकरण फिलहाल 60% तक हो चुका है जबकि लगभग 80% आबादी से फॉर्म एकत्र किए जा चुके हैं। अधिकारी ने कहा, “हम समय सीमा को दोबारा नहीं बढ़ाएंगे क्योंकि प्रक्रिया नियंत्रण में है।”

आप ने SIR के क्रियान्वयन के तरीके पर सवाल उठाए

आम आदमी पार्टी ने एसआईआर (SIR) के क्रियान्वयन के तरीके पर सवाल उठाए हैं। AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने पिछले सप्ताह एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया, “भाजपा सरकार का यह दावा कि 99% फॉर्म वितरित किए जा चुके हैं, पूरी तरह गलत है।” उन्होंने दावा किया कि अनधिकृत कॉलोनियों के लगभग 50% निवासियों ने कहा कि उन्हें एसआईआर फॉर्म प्राप्त नहीं हुए हैं। हालांकि, भाजपा के एक सूत्र ने बताया कि अंतिम दिनों में बड़ी संख्या में लोगों द्वारा अपने फॉर्म जमा करने की उम्मीद है। सूत्र ने आगे कहा कि दिल्ली के कई मतदाता राजधानी और अपने गृह नगरों दोनों की मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने के आदी हो चुके हैं।

कैलाश कॉलोनी के समृद्ध इलाके में, मतदाता सूची निदेशक अमित कुमार को उम्मीद है कि उनकी मतदाता सूची से 20% से 30% नाम अंततः हटाए जा सकते हैं। संगम विहार के विपरीत जहां पलायन, गुम दस्तावेज और दशकों पुराने चुनावी रिकॉर्ड इस प्रक्रिया पर हावी हैं, कुमार अपना अधिकांश समय निवासियों को मतदान में भाग लेने के लिए राजी करने में व्यतीत करते हैं।

अमित ने बताया, “इनमें से ज्यादातर परिवारों ने अपने घरेलू सहायकों के लिए भी मतदाता पहचान पत्र बनवाए थे। उनमें से कई लोग कई घरेलू सहायकों को काम पर रखते हैं इसलिए जब वे अपना घर बदलते हैं तो उन नामों को भी हटाना पड़ता है।” स्थानीय निवासी कभी-कभी अमित कुमार को चुनाव अधिकारी मानने से इनकार कर देते हैं और उन्हें चले जाने के लिए कहते हैं। घर के नौकर-चाकर दिन में घर के मालिकों के बाहर रहने पर उन्हें शक की निगाह से देखते हैं। उन्होंने बताया कि एक बार एक निवासी ने उन पर कुत्ता छोड़ दिया था। चूंकि उनका फोन नंबर हर जनगणना फॉर्म पर छपा होता है इसलिए उन्हें सुबह-सुबह और देर रात तक फोन आते रहते हैं।

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दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शनिवार को लक्ष्मी योजना पोर्टल को लॉन्च किया। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को 2500 रुपये हर महीने दिए जाएंगे। लक्ष्मी योजना का पोर्टल लॉन्च करने के बाद सीएम रेखा गुप्ता ने कहा, “ये आज हम सभी के लिए बहुत ही खुशी का अवसर है। दिल्ली की बहनों के लिए जो संकल्प हमने सरकार बनाते हुए लिया था, वो आज सिर्फ डेढ़ साल की अल्प अवधि में ही पूरा कर लिया।” खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें