अरव‍िंंद केजरीवाल हो सकते हैं नरेंद्र मोदी का विकल्प- मनीष सिसोदिया की राय

दिल्ली के डिप्टी सीएम ने कहा कि भाजपा पिछले दरवाजे से दिल्ली पर कब्जा जमाने के लिए जीएनसीटीडी बिल के माध्यम से जनता से चुनी गई सरकार के अधिकारों को छीन रही है।

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दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया। (फोटो- ताशी तोब्याल इंडियन एक्सप्रेस)

दिल्ली के उपराज्यपाल की शक्तियां बढ़ाने वाला बिल संसद के दोनों सदनों से पास होने के साथ ही दिल्ली के उपराज्यपाल की शक्तियां काफी अधिक हो गई। इसको लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ विपक्ष के करीब-करीब सभी दलों ने विरोध जताया था। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने इसे अलोकतांत्रिक बताते हुए पीएम मोदी पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के कार्यों से डरने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और पूरी केंद्र सरकार दिल्ली सरकार के विकास कार्यों और जनता में लगातार बढ़ते विश्वास से भयभीत हो गई है। अब देश जान गया है कि पीएम मोदी का सही विकल्प अरविंद केजरीवाल ही हो सकते हैं।

कहा अरविंद केजरीवाल जनता से किए अपने सभी वादे पूरे कर रहे हैं। वे जो कहते हैं, उसे करके दिखाते हैं। केवल वादे नहीं करते हैं।उन्होंने कहा कि मोदी सरकार फेल हो गई है। वह जब खुद कुछ नहीं कर पाती तो दूसरों को परेशान करने लगती है। पीएम मोदी दिल्ली सरकार के सभी अच्छे कामों में बाधा डालने में लगे हैं। जब उसमें भी सफल नहीं हो पाए तो वे दिल्ली सरकार के अधिकार ही खत्म करने में लग गए। इसके लिए वे कोई भी कदम उठा सकते हैं। लेकिन दिल्ली की जनता इसे देख रही है। वह इसको सहन नहीं करेगी और केंद्र की भाजपा सरकार जोरदार आवाज से सबक सिखाएगी।

वे बोले कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक (जीएनसीटीडी) 2021 पास होना लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है। सीएम केजरीवाल ने इस कानून के पास होने पर कहा था कि यह लोकतंत्र के लिए “दुखद दिन” है। उन्होंने कहा कि वह लोगों को सत्ता वापस दिलाने के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।

दिल्ली के डिप्टी सीएम ने कहा कि भाजपा पिछले दरवाजे से दिल्ली पर कब्जा जमाने के लिए जीएनसीटीडी बिल के माध्यम से जनता से चुनी गई सरकार के अधिकारों को छीन रही है। उपराज्यपाल के हाथ में सत्ता सौंपने के खिलाफ दिल्ली की जनता जोरदार लड़ाई लड़ेगी।

इससे पहले केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा था कि दिल्ली एक केंद्र शासित प्रदेश है, इसलिए दिल्ली विधानसभा की तुलना अन्य राज्यों की विधानसभा से नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि 1991 में दिल्ली को केंद्र शासित प्रदेश बनाकर बालकृष्ण समिति के आधार पर इसके प्रशासनिक ढांचे को तैयार किया गया।

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