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दिल्ली के छात्रों को डीयू में आरक्षण देने पर राजी हुए उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया

सिसोदिया ने गोयल की इन तीनों मांगों पर अपनी सहमति जताई और भरोसा दिया कि वे इस पर उनके साथ मिलकर काम करेंगे।

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने भाजपा सांसद विजय गोयल की उस मांग का समर्थन किया है जिसमें उन्होंने कहा था कि दिल्ली विश्वविद्यालय में उन छात्रों को प्राथमिकता मिले, जिन्होंने 12वीं कक्षा दिल्ली से पास की है, चाहे वह किसी भी राज्य से आकर क्यों न बसे हों। गोयल कई साल यह मांग उठाते रहे हैं।

गोयल ने शनिवार को एक प्रतिनिधिमंडल के साथ मनीष सिसोदिया से मुलाकात की और उनको बताया कि किस तरह हर साल दिल्ली के उन ढाई लाख छात्रों के साथ अन्याय हो रहा है, जो दिल्ली से 12वीं कक्षा पास करते हैं और जिन्हें दिल्ली के ही कॉलेजों में दाखिला नहीं मिल पाता।

गोयल ने मांग की है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के 61 कॉलेजों में से 28 कॉलेज जोकि दिल्ली सरकार के हैं, उनमें 85 फीसद सीटें दिल्ली के छात्रों के लिए आरक्षित हों, अन्य राज्यों के मुकाबले दिल्ली के छात्रों को कटआॅफ लिस्ट में 5 फीसद की छूट मिले और बिहार व अन्य प्रदेशों में जहां बड़ी तादाद में नकल होती है, उसे देखते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिले से पहले एक बेसिक योग्यता परीक्षा हो।

सिसोदिया ने गोयल की इन तीनों मांगों पर अपनी सहमति जताई और भरोसा दिया कि वे इस पर उनके साथ मिलकर काम करेंगे। गोयल ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वे और सिसोदिया इस मुद्दे पर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी से मिलेंगे ताकि जरूरत पड़ने पर केंद्र इस मुद्दे में दखल दे सके।

गोयल ने कहा कि बिहार समेत कई राज्यों में अलग-अलग शिक्षा बोर्ड हैं, इनमें से कई में धांधली होती है, ऐसे में सीबीएसई से उनकी तुलना नहीं की जा सकती। सभी बोर्डों का स्तर एक जैसा नहीं है दिल्ली सरकार के 28 कॉलेजों में से 18 वित्तपोषित हैं, जिनमें आसानी से 85 फीसद आरक्षण हो सकता है, जैसा कि दिल्ली सरकार के तीन कॉलेजों में पहले से ही 85 फीसद आरक्षण है। गोयल ने सिसोदिया से यह भी कहा कि दिल्ली सरकार नए कॉलेज खोले और पहले के कॉलेजों में शाम की पाली शुुरू करे।

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