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हल निकालने के बजाए विदेश घूम रहे मनोज तिवारी : सिसोदिया

आप नेता संजय सिंह ने कहा कि सीलिंग को रोकने के लिए आप सांसदों ने संसद में प्राइवेट बिल दिया है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से अब तक लगभग 14 प्राइवेट बिल स्वीकृत हुए हैं और पिछले 5-6 महीनों में 300 से ज्यादा प्राइवेट बिल आ चुके हैं, हालांकि सदन में इस पर सहमति बनेगी या नहीं, इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता।

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया। (Source: Archives)

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने तंज कसा है कि एक ओर सीलिंग से व्यापारी दुखी हैैं और दूसरी ओर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी विदेश घूम रहे हैं। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सीलिंग पर समाधान के लिए मंगलवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। वहीं दिल्ली में जारी सीलिंग के खिलाफ आप के राज्यसभा सांसदों ने सोमवार को संसद में प्राइवेट मेंबर बिल दिया। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने ट्वीट कर कहा, ‘दिल्ली में सीलिंग से दुखी लाखों व्यापारियों की रोजी-रोटी बंद हो रही है, लेकिन जिस भाजपा को इसका समाधान निकालना है उसके प्रदेश अध्यक्ष और सांसद मनोज तिवारी विदेश घूम रहे हैं, व्यापारियों की कमर तोड़कर विदेशों की सैर कर रहे हैं।’

वहीं आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि सर्वदलीय बैठक इसलिए बुलाई गई है ताकि सभी पार्टियां मिल-बैठकर सीलिंग का समाधान निकाल सकें, लेकिन भाजपा की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसके प्रदेश अध्यक्ष व दिल्ली के सांसद मनोज तिवारी देश से बाहर हैं और दिल्ली के व्यापारियों को यहां सीलिंग के जंजाल में लपेट गए। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली के लोगों ने मनोज तिवारी को वोट देकर संसद इसलिए भेजा था, ताकि वे उनके दुख में उनके साथ खड़े हों, लेकिन अफसोस की बात है कि मनोज तिवारी के लिए न सीलिंग महत्त्वपूर्ण मुद्दा है और न ही दिल्ली के व्यापारियों के लिए वक्त है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने मनोज तिवारी को वोट देकर संसद में पहुंचाया, उन्हीं लोगों को अधर में लटाकर वे विदेश में संगीत का मजा उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह पहला मौका नहीं है जब मनोज तिवारी और दिल्ली के दूसरे भाजपा सांसद जनहित के मुद्दे पर गायब हो गए हों।

आप नेता संजय सिंह ने कहा कि सीलिंग को रोकने के लिए आप सांसदों ने संसद में प्राइवेट बिल दिया है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से अब तक लगभग 14 प्राइवेट बिल स्वीकृत हुए हैं और पिछले 5-6 महीनों में 300 से ज्यादा प्राइवेट बिल आ चुके हैं, हालांकि सदन में इस पर सहमति बनेगी या नहीं, इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता। लेकिन महत्त्वपूर्ण यह है कि अगर केंद्र सरकार चाहे तो तुरंत संसद में बिल आ सकता है और सीलिंग भी रुक सकती है।

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