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तेजाब हमले के पीड़ित को मिलेगा 12 लाख का मुआवजा

अपने चचेरे भाई के किए गए तेजाब हमले के पीड़ित एक युवक को दिल्ली की एक अदालत ने 12 लाख रुपए का मुआवजा देने का आदेश देते हुए कहा कि यह विडंबना है ...

Author नई दिल्ली | January 11, 2016 2:34 AM

अपने चचेरे भाई के किए गए तेजाब हमले के पीड़ित एक युवक को दिल्ली की एक अदालत ने 12 लाख रुपए का मुआवजा देने का आदेश देते हुए कहा कि यह विडंबना है कि अधिकारों की आड़ में षड्यंत्रकारी खुला घूम रहा है और पीड़ित सदमे में है और उम्र भर का दंश झेलने के लिए मजबूर है।

अदालत ने यह भी कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि तेजाब आसानी से उपलब्ध है और इसका अंधाधुंध उपयोग किया जा रहा है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कामिनी लाउ ने कहा ‘मामला इस बात के चलते और बदतर हो जाता है कि पीड़ितों के लिए मुफ्त इलाज, पुनर्वास और पर्याप्त मुआवजा योजना का पूरी तरह अभाव है।’

अदालत ने सराय रोहिल्ला निवासी विपिन जैन को आदेश दिया कि वह अपने रिश्ते के भाई योगेश जैन को 12 लाख रुपए का मुआवजा दे। विपिन ने ही जनवरी 2005 में अपने दोस्त के साथ बाजार जा रहे योगेश पर तेजाब फेंका था। याचिका में कहा गया है कि विपिन ने योगेश को पीछे से आवाज दी और जब वह मुड़ा तो विपिन ने उस पर तेजाब फेंक दिया। तेजाब से योगेश का चेहरा, उसकी दाहिनी आंख और शरीर के अन्य हिस्से गंभीर रूप से झुलस गए। निचली अदालत ने विपिन को दोषी ठहराते हुए पांच साल की सजा सुनाई जिसके खिलाफ उसने अपील की।

याचिका के अनुसार, दोनों परिवारों के बीच संपत्ति को लेकर विवाद था और पेशागत प्रतिद्वंद्विता भी थी क्योंकि दोनों का काम फर्मास्युटिकल से जुड़ा था। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता पांच लाख रुपए पहले ही खर्च कर चुका है और 20 लाख रुपए त्वचा के प्रतिरोपण एवं प्लास्टिक सर्जरी पर खर्च किए जाने हैं। साथ ही उसे 10 और सर्जरी करानी हैं।

न्यायाधीश ने कहा कि जब मैंने योगेश को अदालत में देखा तो मुझे तेजाब हमले के खतरनाक इरादों के उसकी पीड़ा के बारे में किसी और सबूत की जरूरत नहीं रही। अदालत ने राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो रिकॉर्ड (एनसीबीआर) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि तेजाब के 75 से 80 फीसद पीड़ित महिलाएं हैं।

अदालत ने कहा ‘दुखद बात यह है कि हमारा देश, खासकर दिल्ली ऐसे हमलों के लिए हमेशा से ही केंद्र बिंदु रही है और एनसीबीआर की 2010 से आती रिपोर्टों के आधार पर इस तथ्य को बल मिलता है।’ अदालत ने कहा ‘विडंबना यह है कि अधिकारों की आड़ में जहां षड्यंत्रकर्ता ज्यादातर समय खुला घूमता है और सामान्य जीवन जीता है वहीं पीड़ित सदमे, अकेलेपन का शिकार होता है और हर मिनट, हर दिन और पूरा जीवन दंश झेलता है।’

अदालत ने कहा कि भारतीय दंड संहिता में संशोधन के तहत जोड़ी गई धारा 326 ए में तेजाब हमलों के लिए सजा का प्रावधान है। इसके तहत पुरूष या महिला दोनों ही पीड़ितों के मामले आते हैंं। विपिन को दोषी ठहराने वाली अदालत के द्वारा पीड़ित के लिए किसी मुआवजे का निर्देश नहीं दिए जाने की बात कहते हुए इस अदालत ने कहा, ‘हमारे देश में, बेहद जरूरी होने के बावजूद आपराधिक चोट मुआवजा अधिनियम के तहत पीड़ित को अंतरिम या अंतिम आर्थिक मदद उपलब्ध करवाने का कोई विशेष कानून नहीं है। लेकिन शीर्ष अदालत और विभिन्न उच्च न्यायालयों ने समय-समय पर इलाज और पुनर्वास के लिए ऐसे मुआवजे दिलवाने में उदारता दिखाई है।’

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