दिल्ली का कंस्ट्रक्शन सेक्टर सर्दियों में प्रदूषण से निपटने के नए प्लान का विरोध कर रहा है। इस प्लान के तहत रोजाना के एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) लेवल की परवाह किए बिना कंस्ट्रक्शन का काम रोका या सीमित किया जा सकता है। सेक्टर का कहना है कि इससे मजदूरों की रोजी-रोटी पर असर पड़ सकता है और सप्लाई चेन में रुकावट आ सकती है।

दिल्ली सरकार के इस बड़े एक्शन प्लान को पिछले महीने नोटिफाई किया गया था। इसमें सर्दियों के महीनों में कंस्ट्रक्शन पर रोक और गाड़ियों पर पाबंदी जैसे उपाय अनिवार्य कर दिए गए हैं। यह मौजूदा सिस्टम से अलग है, जिसमें पाबंदियां प्रदूषण के लेवल के आधार पर लगाई जाती थीं।

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ को पता चला है कि इस कदम के बाद नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (NAREDCO) और कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) के दिल्ली चैप्टर ने अलग-अलग बैठकों में इंडस्ट्रीज मिनिस्टर मंजिंदर सिंह सिरसा और कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) के सामने अपनी चिंताएं जाहिर की हैं।

जाहिर की गई चिंताएं

28 जुलाई को मार्बल और स्टील के व्यापारियों, सीमेंट बनाने वालों, कॉन्ट्रैक्टर्स, आर्किटेक्ट्स और सप्लायर्स के एक ग्रुप ने NAREDCO दिल्ली और निर्माण बचाओ उद्योग मोर्चा (NBUM) के बैनर तले इस बैन के दूरगामी असर पर चर्चा की।

NAREDCO और CII दिल्ली के प्रमुख और रियल एस्टेट डेवलपर हर्ष वर्धन बंसल ने कहा, “प्रोजेक्ट में देरी के अलावा, हमने इस बात पर जोर दिया कि कैसे मौसमी शटडाउन पूरी वैल्यू चेन में लोगों की रोजी-रोटी को प्रभावित करते हैं।”

उन्होंने बताया कि कैसे दिहाड़ी मजदूर अपने गृहनगर लौट जाते हैं और अक्सर समय पर वापस नहीं आते, जबकि सप्लायर्स और उससे जुड़े उद्योगों को कैश फ्लो की भारी दिक्कत का सामना करना पड़ता है, और कई के पूरी तरह बंद होने का खतरा भी रहता है।

अगले दिन, CII के दिल्ली स्टेट चैप्टर के एक प्रतिनिधिमंडल ने सिरसा से मुलाकात की। उन्होंने सर्दियों के एक्शन प्लान की समीक्षा करते समय एक संतुलित और सलाह-मशविरे वाले नजरिए की जरूरत पर जोर दिया, ताकि पर्यावरण से जुड़े लक्ष्यों और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स के काम को जारी रखने, दोनों के बीच तालमेल बना रहे।

बंसल के एक सोशल मीडिया पोस्ट के मुताबिक, सिरसा ने “इंडस्ट्री के नजरिए की सराहना की और इन मुद्दों को हल करने में सरकार के पूरे सहयोग का भरोसा दिलाया।”

सुझाव

28 जुलाई की बैठक में ग्रुप के सदस्यों ने एक ज्यादा व्यावहारिक तरीका अपनाने का सुझाव दिया: सर्दियों के दौरान तोड़-फोड़ या खुदाई जैसे कामों पर तो रोक लगाई जा सकती है, लेकिन कंस्ट्रक्शन से जुड़े बाकी सभी कामों — जैसे फिनिशिंग का काम, इंटीरियर फिट-आउट, इलेक्ट्रिकल, प्लंबिंग और धूल न उड़ाने वाले काम – को जारी रखने की इजाजत दी जानी चाहिए। बंसल ने कहा कि बैठक की एक मुख्य सिफारिश इस दौरान निर्माण कार्यों के लिए ‘क्या करें और क्या न करें’ की एक स्पष्ट सूची लागू करना था।

उन्होंने कहा कि इससे डेवलपर्स, ठेकेदारों और लागू करने वाली एजेंसियों को स्पष्टता मिलेगी और साथ ही यह भी सुनिश्चित होगा कि काम जिम्मेदारी से और नियमों के तहत जारी रहे।

सर्दियों में पाबंदियां

सरकार के सर्दियों के प्रदूषण से जुड़े नियमों को 1 जुलाई को नोटिफाई किया गया था। इसमें हर साल जारी होने वाले कई आदेशों को मिलाकर नियमों का एक स्थायी सेट बनाया गया है, जो हर साल 1 नवंबर से 28 फरवरी तक अपने आप लागू हो जाएगा।

सरकार ने कहा था कि यह फैसला पिछली तीन सर्दियों में हवा की गुणवत्ता के ट्रेंड के आधार पर लिया गया है, जब दिल्ली में हवा की गुणवत्ता लगातार ‘बहुत खराब’ से ‘गंभीर’ श्रेणी में रही थी। ये उपाय ‘ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान’ (GRAP) के साथ-साथ लागू रहेंगे। विशेषज्ञों ने GRAP को बार-बार लागू करने और हटाने की आलोचना की थी।

इसमें ये नियम शामिल हैं:

1 नवंबर से 31 जनवरी तक:

  • तोड़-फोड़ का काम और धूल उड़ाने वाले खुले सिविल निर्माण कार्यों पर रोक रहेगी।

जरूरी सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को इससे छूट मिलेगी।

निर्माण स्थलों के अंदर फिनिशिंग का काम, प्लंबिंग और बिजली के काम की अनुमति जारी रहेगी, बशर्ते धूल-नियंत्रण के नियमों का पालन किया जाए।

10 दिसंबर से 20 जनवरी तक:

इस सख्त अवधि के दौरान, नोटिफिकेशन में कहा गया है कि केवल उन्हीं सरकारी परियोजनाओं को जारी रखने की अनुमति होगी जिन्हें सार्वजनिक उपयोग या आपातकालीन स्थिति के लिए बहुत जरूरी माना जाएगा।

निर्माण सामग्री ले जाने वाले वाहनों के दिल्ली में प्रवेश पर रोक रहेगी।

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केंद्र सरकार ने एक बार फिर पेट्रोल, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स (स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी) की दरों में बदलाव किया है। नई दरें 3 अगस्त 2026 से लागू हो गई हैं। सरकार समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों, रिफाइनिंग मार्जिन और घरेलू ईंधन उपलब्धता को देखते हुए इन दरों की समीक्षा करती है। हालिया फैसला भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक