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वरिष्ठ नेताओं ने खोला शीला दीक्षित के खिलाफ मोर्चा

दिल्ली की राजनीति में हाशिए पर पहुंच गई कांग्रेस विरोधी दलों से मुकाबला करने के बजाए आपस में लड़कर अपने वजूद को ही खत्म करने में लगे हुए हैं। 80 की उम्र पार करके दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष बनीं शीला दीक्षित और दिल्ली के प्रभारी पीसी चाको लोकसभा चुनाव से ही आमने-सामने हैं।

Author July 14, 2019 3:16 AM
पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता शीला दीक्षित। (फोटो सोर्स इंडियन एक्सप्रेस)

दिल्ली कांग्रेस की अध्यक्ष और 15 साल मुख्यमंत्री रहीं शीला दीक्षित के खिलाफ प्रभारी पीसी चाको के साथ-साथ तीनों कार्यकारी अध्यक्षों और अनेक वरिष्ठ नेताओं ने मोर्चा खोल दिया है। 29 वरिष्ठ नेताओं की बैठक में कहा गया कि शीला दीक्षित के बीमार रहने के चलते उनके नाम पर फैसला कोई और ले रहा है। प्रभारी के मना करने के बावजूद कल दीक्षित ने फिर से 280 ब्लॉक और जिलों के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किए। चाको ने उनको इस बारे में पत्र लिखा है वहीं तीनों कार्यकारी अध्यक्षों ने दीक्षित को पत्र लिखकर कहा है कि फैसलों में उनकी भागीदारी नहीं कराई जा रही है। वहीं, आज दिल्ली कांग्रेस के करीब तीन दर्जन वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने बैठक कर राहुल गांधी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप करने की अपील की है।

दिल्ली की राजनीति में हाशिए पर पहुंच गई कांग्रेस विरोधी दलों से मुकाबला करने के बजाए आपस में लड़कर अपने वजूद को ही खत्म करने में लगे हुए हैं। 80 की उम्र पार करके दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष बनीं शीला दीक्षित और दिल्ली के प्रभारी पीसी चाको लोकसभा चुनाव से ही आमने-सामने हैं। कांग्रेस नेताओं को चिंता इस बात की है कि भाजपा और ‘आप’ विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी हुई है और कांग्रेस के नेता आपसी लड़ाई में। 10 जनवरी को शीला दीक्षित को दिल्ली कांग्रेस का अध्यक्ष और उनके साथ हारून युसूफ, राजेश लिलोठिया और देवेंद्र यादव को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया। राहुल को लिखे पत्र में कहा गया है कि दीक्षित के बीमार रहने के चलते कुछ लोग स्यंभू पदाधिकारी बनकर फैसला कर रहे हैं और कार्यकारी अध्यक्षों को विश्वास में नहीं ले रहे हैं।

दीक्षित के अध्यक्ष बनने से पहले तब के अध्यक्ष अजय माकन ने प्रभारी चाको की स्वीकृति से सभी 280 वार्डों के और 14 जिलों के अध्यक्ष बनाए, उसे बदला गया तो चाको ने रोक लगा दी लेकिन फिर से 12 जुलाई को नई सूची जारी कर दी गई है। कांग्रेस के इतिहास में पहली बार प्रभारी की मनाही के बावजूद फैसले किए जा रहे हैं। इतना ही नहीं लोकसभा चुनाव की समीक्षा के लिए बनी कमेटी की भी कोई भूमिका नहीं रही है। तीन पेज की चिट्ठी पर जिन 29 नेताओं के हस्ताक्षर हैं उनमें पूर्व विधायक हरिशंकर गुप्ता, नसीब सिंह, आसिफ मोहम्मद खान, मतीन अहमद, सुरेन्द्र कुमार, दिल्ली महिला कांग्रेस अध्यक्ष शर्मिष्ठा मुखर्जी, वरिष्ठ नेता चतर सिंह, ब्रह्म यादव और कमल कांत शर्मा शामिल हैं।

पत्र राहुल गांधी के नाम लिखा गया है और उसकी प्रति कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और पीसी चाको को भेजी गई है। वहीं, पीसी चाको ने दीक्षित को पत्र लिखकर बिना प्रभारी और कार्यकारी अध्यक्ष की जानकारी में फैसला करने पर ऐतराज किया है। उन्होंने इन मुद्दों पर फौरन कमेटी की बैठक बुलाने के निर्देश दिए हैं। दीक्षित को लिखे एक अलग पत्र में दिल्ली के तीनों कार्यकारी अध्यक्षों-हारून युसूफ, राजेश लिलोठिया और देवेन्द्र यादव ने कहा कि ब्लॉक और जिला अध्यक्ष को हटाना, नए ब्लॉक और जिला अध्यक्ष की नियुक्ति और लोकसभा चुनाव की समीक्षा करने वाली समिति के फैसलों में भी उनकी सलाह नहीं ली गई। इन नेताओं का आरोप है कि दीक्षित की बीमारी का फायदा उठाकर कुछ लोग मनमाना फैसला कर रहे हैं।

कहां खो गई कांग्रेस
’पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने पर कई दिन इंतजार करने के बाद महिला कांग्रेस ने प्रदर्शन किया
’दिल्ली में बिजली के दाम तय करने के लिए दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (डीईआरसी) की जनसुनवाई में कांग्रेस के नेता पहुंचे ही नहीं ‘आप’ और भाजपा के नेता ही इस मुद्दे पर जूझते दिखे
’मानसून के पहले नालों की सफाई नहीं हो पाई है और दिल्ली सरकार स्कूलों के नतीजों पर झूठे दावे करती रही, कांग्रेस शांत रही
’हौज काजी तनाव पर कांग्रेस कुछ करते नहीं दिखी
’‘आप’ सरकार हो या नगर निगम में शासन कर रही भाजपा के तमाम कमियों के खिलाफ कांग्रेस कोई आंदोलन नहीं कर पाई

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