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रैन बसेरों का हालः हाथ धोने तक की व्यवस्था नहीं, खाने की गुणवत्ता खराब

बिहार के मुज्जफरपुर निवासी मनोज की मौत दिनाक 23 अप्रैल को रात में राजन बाबु टीबी हॉस्पिटल में क्षयरोग के चलते हुई। इसी तरह अजय नामक बेघर रिट्ज सिनेमा हाल (कश्मीरी गेट) के पास मिला, जिसको एम्बुलेंस लेडी हार्डिंग ले गई और जाचं के बाद कोरोना के लक्ष्ण पाए गए। 15 अप्रैल को लेडी हार्डिंग में कोविड-19 से अजय की मौत हो गई। एं

Author Published on: May 1, 2020 2:50 AM
करीब 20 दिन बाद भी दिल्ली के दजनों रैन बसेरोंं-आश्रय गृहों की हालात दयनीय और चिंताजनक बनी हुई है।

प्रियरंजन

दिल्ली के तीन रैन बसेरोंं में हुई हिंसा और अग्निकांड से दिल्ली सरकार ने कोई सबक नहीं है। 11 अप्रैल को खाने की कमी, कोरोना संक्रमण की आशंका और अपने साथी की मौत से आंदोलित बेघर लोगों ने यमुना पुस्ता, गीता घाट, निगम बोध घाट स्थित रैन बसेरोंं को आग के हवाले कर दिया था।

करीब 20 दिन बाद भी दिल्ली के दजनों रैन बसेरोंं-आश्रय गृहों की हालात दयनीय और चिंताजनक बनी हुई है। कोरोना संक्रामण बचाव के दिशा निर्देशों की सरेआम उड़ रही धज्जियों को लेकर उतरी जिला की पुलिस उपायुक्त मोनिका भारद्वाज (आइपीएस) ने जिला उपायुक्त (सेंट्रल) निधि श्रीवास्तव (आइएएस) को एक रिपोर्ट भेजकर कई चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे हैं। जिला उपयुक्त को भेजी गई इस विशेष रिपोर्ट ने सरकार और एजंसियों के दावों को कटघरे में ला खड़ा कर दिया है। मोनिका भारद्वाज की रिपोर्ट पर जिला उपायुक्त ने संबंधित एसडीएम से कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) तलब कर ली है। बता दें कि आगजनी के बाद सामने आई कुछ और मौतों ने जिले की उपायुक्त आइपीएस मोनिका भारद्वाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि बेघरों के साथ सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। उन्होंने करीब एक दर्जन से ज्यादा रैन बसेरों, आश्रयगृहों का दौरा कर एक रिपोर्ट तैयार की। जिसमें उन्होंने बताया कि हाथ धोने की जरूरी व्यवस्था से लेकर, पीने के पानी, खाना, साफ सफाई की कमी से आश्रयगृह जूझ रहें हैं। कई जगह पंखे तक काम नहीं कर रहे हैं। लोग वहां भागने को उतावले हैं। सिविल डिफेंस का कर्मचारी तक कई जगह नहीं हंै और जहां है उनका व्यवहार आश्रितों को लेकर बेहद खराब है। इतना ही नहीं सामाजिक दूरी का पालन नहीं होने से कोरोना संक्रमण फैलने का अंदेशा बरकरार है। देख रेख में लगे एनजीओ की भूमिका भी संदेशप्रद हैं। वे दो बार खाना तो देते हैं लेकिन उसकी गुणवत्ता खराब है।
इतना ही नहीं सेंटर फॉर होलिसिंटक डेवलपमेंट (सीएचडी) ने भी जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) को एक शोध रिपोर्ट इसी मुद्दे पर सौंपी है। सीएचडी के कार्यकारी निदेशक सुनिल कुमार अलेडिया ने बताया कि रैन बसेरोंं की स्थिति भयावह है। लोग मर रहे हैं। कोरोना से पहले भुखमरी और टीबी से जान जा रही है। जिसकी तथ्यात्मक जानकारी शोध रिपोर्ट के जरिए सरकार को दी जा चुकी है।

मसलन डीडीएमए को सौंपी रिपोर्ट में यह बताया गया है कि रैन बसेरों में हुई हिंसा और अग्निकांड के अगले दिन यानि 12 अप्रैल को सुधीर प्रजापति नाम के एक बेघर को अस्पताल ने दाखिला देने से मना कर दिया। वह क्षयरोग (टीबी) से ग्रसित था और जिसका इलाज पहले से चल रहा था। पुलिस को पता चला कि आश्रय गृह में आग लगने से उसके सारे कागजात जल गए। बाद में सुधीर को चाबी गंज सर्वोदय विधालय आश्रय गृह में स्थानंतरित करवाया गया। लेकिन 20 अप्रैल की रात में क्षयरोग के चलते उसकी मौत हो गई। सुधीर का एक वीडियो आसपास के लोगों के पास मौजूद है जिसमें वह अपने दस्तावेजों के जल जाने और 24 घंटे से भूखा होने,और मूख से मरने की आशंका जता रहा है। सुधीर प्रजापति की तरह मनोज की भी स्थिति कमौवेश वैसी ही थी। पुलिस उपायुक्त मोनिका भारद्वाज के सहयोग से 5 घंटे के मशक्कत के बाद उसे राजन बाबू टीबी अस्पताल पहुंचाया गया। बिहार के मुज्जफरपुर निवासी मनोज की मौत दिनाक 23 अप्रैल को रात में राजन बाबु टीबी हॉस्पिटल में क्षयरोग के चलते हुई। इसी तरह अजय नामक बेघर रिट्ज सिनेमा हाल (कश्मीरी गेट) के पास मिला, जिसको एम्बुलेंस लेडी हार्डिंग ले गई और जाचं के बाद कोरोना के लक्ष्ण पाए गए। 15 अप्रैल को लेडी हार्डिंग में कोविड-19 से अजय की मौत हो गई। एंबुलेंस के स्टाफ को एकांतवास में भेज दिया गया। उन्होंने कहा- दिल्ली में पूर्णबंदी की सबसे ज्यादा मार उन बेघरों पर पड़ी है जो डेहाड़ी और भिखारी हैं। शारीरिक दूरी बना चुकी दिल्ली की आम जनता अपने घरों में एकांतवास में हैं। लेकिन जिनके घर ही नहीं वे कहां जाए। लिहाजा रैन बसेरोंं में स्वास्थ्य शिविर लगाने औरकोरोना से बचाव के उपाय लागू करने की फौरन जरूरत है।

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