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भाजपा सांसद की मांग- अवैध रोंहिग्यायों, बांग्लादेशियों की पहचान कर बाहर करे केजरीवाल सरकार

भाजपा की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने आज मांग की कि दिल्ली सरकार को राष्ट्रीय राजधानी में अवैध रूप से रह रहे रोंिहग्याओं और बांग्लादेशियों की पहचान कर उन्हें बाहर करना चाहिए।

Author August 1, 2018 6:32 PM
मनोज तिवारी ने केजरीवाल सरकार को कहा-बाहर करो रोहिंग्या (image source-PTI)

भाजपा की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने आज मांग की कि दिल्ली सरकार को राष्ट्रीय राजधानी में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्याओं और बांग्लादेशियों की पहचान कर उन्हें बाहर करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे भारत के गरीबों को उनके अधिकारों से वंचित कर रहे हैं। तिवारी ने यहां पत्रकारों को बताया कि उन्होंने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि भाजपा केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से यह मांग पहले ही कर चुकी है और अब दिल्ली सरकार को अवैध प्रवासियों को बाहर निकालने का काम सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाना चाहिए।प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कहा, ‘‘दिल्ली सरकार को शहर के अलग-अलग हिस्सों में अवैध रूप से रह रहे रोंिहग्याओं और बांग्लादेशियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि अवैध प्रवासी भारत के गरीबों को उनके अधिकारों से वंचित कर रहे हैं और उन्हें कभी-कभी आपराधिक गतिविधियों में भी शामिल पाया गया है। तिवारी ने यह मांग ऐसे समय में की है जब असम सरकार ने बीते 30 जुलाई को राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) का अंतिम मसौदा प्रकाशित किया। कुल 3.29 आवेदकों में से 2.9 करोड़ आवेदकों को एनआरसी के अंतिम मसौदे में जगह दी गई है जबकि 40 लाख से ज्यादा लोगों के नाम इसमें शामिल नहीं किए गए हैं।

गौरतलब है कि इन दिनों लोकसभा और राज्यसभा में भी रोहिंग्या मुस्लिमों को लेकर मुद्दा गर्माया हुआ है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के मसौदे को लेकर सोमवार को केंद्र सरकार की आलोचना की और कहा कि नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार वोट की राजनीति कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, असम के 2,89,83,677 लोगों के नाम वाले एनआरसी का पहला पूरा मसौदा सोमवार का प्रकाशित हुआ और कागजात में त्रुटियों के चलते 40,07,707 लोगों को छोड़ दिया गया है।

बनर्जी का आरोप है कि जिनलोगों के पास आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और अन्य दस्तावेज थे, उनको भी छोड़ दिया गया, क्योंकि अधिकारी उन कागजात से संतुष्ट नहीं थे।
उन्होंने आशंका जताई कि बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल में इसे लेकर समस्या पैदा हो सकती है, क्योंकि असम से इनकी सीमा लगती है। बंगाल की मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि मोदी सरकार लोगों को जबरदस्ती बेदखल करने की कोशिश कर रही है।

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