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बिना जंग के पास हुआ जीसएटी, दिल्ली बना जीएसटी लागू करने वाला तीसरा गैरभाजपाई राज्य

उपमुख्यमंत्री ने कहा, ‘दिल्ली की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से सेवा कर पर निर्भर है, लेकिन हजारों करोड़ के संग्रह में मात्र 325 करोड़ रुपया केंद्र से वापस दिल्ली को आता है।

Author नई दिल्ली | August 25, 2016 1:34 AM
दिल्ली विधानसभा। (फाइल फोटो)

दिल्ली विधानसभा ने बुधवार को जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) संबंधी केंद्र के प्रस्ताव को अपना समर्थन दे दिया। प्रस्ताव को कुछ चिंताओं के साथ समर्थन देते हुए उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि जीएसटी से न केवल दिल्ली को वित्तीय लाभ है बल्कि इसके माध्यम से केंद्र ने दिल्ली को ‘विधायिका सहित केंद्र शासित प्रदेश’ माना है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री ने दिल्ली सरकार को पत्र लिखकर ‘राज्य के विधानसभा’ से संसद द्वारा पारित जीएसटी संबंधी संविधान संशोधन की पुष्टि मांगी थी। जीएसटी पर चर्चा के समय विपक्ष सदन से गैर हाजिर रहा। केंद्र के प्रस्ताव की पुष्टि के लिए संकल्प प्रस्तुत करते हुए उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा, ‘जीएसटी देश का अभी तक का सबसे बड़ा कर संबंधी सुधार है, यह एकीकृत और सरल व्यवस्था पूरे देश के लिए जरूरी है, लेकिन दिल्ली के लिए भी यह बहुत जरूरी है’। उपमुख्यमंत्री ने कहा, ‘दिल्ली की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से सेवा कर पर निर्भर है, लेकिन हजारों करोड़ के संग्रह में मात्र 325 करोड़ रुपया केंद्र से वापस दिल्ली को आता है। इस मौजूदा प्रस्ताव से फायदा होगा कि एक फार्मूले के तहत दिल्ली को पैसा मिलेगा’।

हालांकि, उपमुख्यमंत्री ने जीएसटी के कुछ पहलुओं पर चिंता जताते हुए उम्मीद जताई कि जब इसके नियम तय किए जाएंगे तो केंद्र सरकार इनका ध्यान रखेगी। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली में अभी वैट की सीमा 20 लाख है। लेकिन अगर एकीकृत प्रणाली के अंदर इसे घटाकर 10 लाख की जाएगी तो राजधानी के छोटे व्यापारियों को नुकसान होगा। उपमुख्यमंत्री ने केंद्र से इसे 25 लाख करने की मांग की। साथ ही, उन्होंने कहा कि डेढ़ करोड़ तक के टर्नओवर तक के कर संग्रह के अधिकार राज्य सरकार को दी जाए, इसमें केंद्र की तरफ से कोई हस्तक्षेप नहीं हो। जीएसटी पर तीसरी चिंता उपमुख्यमंत्री ने जीएसटी काउंसिल के अधिकार क्षेत्र को लेकर जताई। मनीष सिसोदिया ने कहा कि राज्यों को कर निर्धारण का अधिकार होना चाहिए।

जीएसटी संबंधी संविधान संशोधन विधेयक पर केंद्र द्वारा दिल्ली विधानसभा से पुष्टि मांगे जाने को उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने दिल्ली की राज्य के रूप में पहचान को केंद्र की तरफ से बड़ी व्याख्या माना। सिसोदिया ने कहा कि विधेयक में राज्य की व्याख्या में ‘विधायिका के साथ केंद्र शासित प्रदेश’ को भी शामिल किया गया है। उन्होंने कहा, ‘केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 11 अगस्त को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखकर ‘राज्य विधानसभा’ द्वारा इसकी पुष्टि कर वापस भेजने का आग्रह किया था’। उपमुख्यमंत्री सिसोदिया ने जीएसटी पर चर्चा के दौरान विपक्ष के गायब रहने पर चुटकी लेते हुए कहा कि वे उनकी दुविधा समझ सकते हैं, जिसका 10 सालों से विरोध किया उसका आज समर्थन कैसे करें। सिसोदिया ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष अपनी जिम्मेदारी से भागे हुए हैं। चर्चा के दौरान सदस्यों ने सरकार से छोटे व्यापारियों के हितों और महंगाई में अपेक्षित बढ़ोतरी को ध्यान में रखने को कहा।

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