दिल्ली के आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में तैनात करीब 1,000 डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को पिछले तीन महीनों से वेतन नहीं मिला है। कर्मचारियों का कहना है कि यह देरी मुख्य रूप से प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (पीएम-एबीएचआईएम) के तहत फंड की मंजूरी न मिलने के कारण हो रही है।
इन स्वास्थ्य केंद्रों में मेडिकल ऑफिसर, फार्मासिस्ट और सपोर्ट स्टाफ की नियुक्ति राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और पीएम-एबीएचआईएम दोनों योजनाओं के तहत की गई है। सूत्रों के अनुसार, वेतन भुगतान में देरी का असर दोनों योजनाओं के कर्मचारियों पर पड़ा है, हालांकि इसके पीछे अलग-अलग कारण बताए जा रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत नियुक्त करीब 275 डॉक्टरों और कर्मचारियों का तीन महीने से लंबित वेतन हाल ही में जारी कर दिया गया है। हालांकि पीएम-एबीएचआईएम के तहत भर्ती कर्मचारियों को अभी तक भुगतान नहीं मिला है, क्योंकि इस योजना के तहत फंड की प्रशासनिक मंजूरी लंबित है।
अधिकारी के अनुसार, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कर्मचारियों के वेतन में देरी का एक बड़ा कारण तकनीकी समस्याएं भी थीं। कई कर्मचारियों के आधार से जुड़े बैंक खाते सही तरीके से आधार से लिंक नहीं थे या फिर वेतन भुगतान प्रणाली के पोर्टल पर उनकी स्थिति निष्क्रिय दिख रही थी।
सूत्रों ने बताया कि लगभग 50 कर्मचारियों के खातों में यह तकनीकी गड़बड़ी पाई गई थी, जिसके चलते वेतन प्रक्रिया में बाधा आई। इसके बाद प्रशासन ने सभी कर्मचारियों के बैंक खातों की पुनः जांच पूरी की और आधार लिंकिंग की स्थिति को भी दुरुस्त किया।
एनएचएम से जुड़े 275 कर्मचारियों के वेतन डिजिटल प्रोसेस हुआ
हालांकि कुछ खातों में अभी भी निष्क्रिय स्थिति की समस्या बनी हुई है। इसी बीच राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से जुड़े लगभग 275 कर्मचारियों की लंबित सैलरी अब सरकारी डिजिटल भुगतान प्रणाली के माध्यम से प्रोसेस कर दी गई है।
गौरतलब है कि दिल्ली में इन स्वास्थ्य केंद्रों को पहले मोहल्ला क्लीनिक के नाम से जाना जाता था, जिन्हें आम आदमी पार्टी सरकार के दौरान शुरू किया गया था। पिछले वर्ष नई सरकार बनने के बाद इनका नाम बदलकर आयुष्मान आरोग्य मंदिर कर दिया गया।
वर्तमान में दिल्ली में कुल 371 आयुष्मान आरोग्य मंदिर कार्यरत हैं। सरकार की योजना है कि इनकी संख्या बढ़ाकर 1,139 केंद्रों तक की जाए, ताकि प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत किया जा सके।
वेतन अटकने की इस स्थिति ने कर्मचारियों में असंतोष और चिंता बढ़ा दी है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि लगातार तीन महीने से भुगतान न होने से उनकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ा है और सरकार को जल्द से जल्द फंड जारी कर इस समस्या का समाधान करना चाहिए।
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बेहतर स्वास्थ्य के लिए उपचार की किफायती और सुलभ सुविधाएं मनुष्य की बुनियादी जरूरत है। इनमें चिकित्सक की उपलब्धता, समय पर सस्ते दामों में दवाएं मुहैया कराना और आपातकालीन देखभाल शामिल हैं, ताकि लोगों का जीवन सुरक्षित रहे। अगर व्यवस्था में इन जरूरी सुविधाओं का अभाव हो, तो विकास के दावों का कोई औचित्य नहीं रह जाता है।
देश की राजधानी दिल्ली की एक ऐसी ही तस्वीर सामने आई है। दिल्ली सरकार की जन्म और मृत्यु पंजीकरण पर वार्षिक रपट के मुताबिक, वर्ष 2024 में राष्ट्रीय राजधानी में एक लाख उनचालीस हजार से अधिक लोगों की मौत हुई, जिनमें से 34.84 फीसद लोगों की मौत घर पर ही हुई। सवाल है कि आज के दौर में जब लोग मामूली तकलीफ होने पर भी अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों का रुख करते हैं, तो ऐसी क्या वजह है कि इतनी बड़ी संख्या में मौत घर पर ही हो जाती है? जाहिर है, इसके पीछे स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव और आपात स्थिति में चिकित्सा सहायता समय पर न मिलना भी एक बड़ा कारण हो सकता है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
