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Delhi Assembly Elections 2020: दिल्ली में दिग्गजों की पहचान, अब वारिसों के नाम मैदान

दिल्ली में हो रहे दिलचस्प त्रिकोणीय चुनावी मुकाबले में इनके लिए अपने बच्चों को जीत की मंजिल तक पहुंचाना आसान काम नहीं है। विरासत की सियासत के तहत एक दिलचस्प मुकाबला मॉडल टाउन विधानसभा क्षेत्र में भी देखने को मिल रहा है।

Author नई दिल्ली | Updated: January 29, 2020 1:05 AM
विरासत की सियासत के तहत एक दिलचस्प मुकाबला

अजय पांडेय
बेटे-बेटियों के बहाने दिल्ली विधानसभा के इस चुनाव में विभिन्न राजनीतिक दलों से ताल्लुक रखने वाले दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है। खुद चुनाव मैदान में न उतरकर अपने बच्चों को आगे करने वाले इन कद्दावर नेताओं ने पर्दे के पीछे से अपने बच्चों की खातिर पूरा जोर लगा रखा है। दीगर है कि दिल्ली में हो रहे दिलचस्प त्रिकोणीय चुनावी मुकाबले में इनके लिए अपने बच्चों को जीत की मंजिल तक पहुंचाना आसान काम नहीं है।

सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) ने इस बार पश्चिम दिल्ली के द्वारका विधानसभा क्षेत्र से पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री के पोते और अनिल शास्त्री के बेटे आदर्श शास्त्री का टिकट काट दिया। ‘आप’ ने शास्त्री की जगह कांग्रेस के पूर्व सांसद व पार्टी के पूर्वांचल के कद्दावर नेता महाबल मिश्र के बेटे विनय मिश्र को अपना उम्मीदवार बना दिया। टिकट कटने से नाराज शास्त्री ने पार्टी छोड़ दी और कांग्रेस का दामन थाम लिया। बदले में कांग्रेस ने उनको द्वारका विधानसभा क्षेत्र से ही अपना उम्मीदवार बना दिया। अब यहां पर सियासी मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है।

भाजपा ने यहां से पूर्व विधायक प्रद्युम्न राजपूत को अपना उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुके विनय मिश्र आप के टिकट पर इसलिए चुनाव मैदान में कूदे हैं क्योंकि उन्हें यकीन है कि झाड़ू चुनाव निशान उनकी जीत की गारंटी बन सकता है। पिता की विरासत उनके साथ है। दूसरी ओर शास्त्री भी एक मशहूर राजनीतिक घराने से संबंध रखते हैं और उनके करीबियों का मानना है कि उनका टिकट काटे जाने से क्षेत्र में उनके प्रति सहानुभूति है। यहां पर दोनों राजनीतिक परिवारों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।

कांग्रेस ने आरके पुरम विधानसभा क्षेत्र से दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री व दिल्ली विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष योगानंद शास्त्री की बेटी प्रियंका सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है। पहली बार चुनाव मैदान में कूदी प्रियंका के लिए सरकारी कर्मचारियों की बड़ी संख्या में मौजूदगी वाले इस विधानसभा क्षेत्र से जीत दर्ज कर अपना दम-खम दिखाने की चुनौती तो है ही अपने पिता की राजनीतिक विरासत को भी चमकाने का दायित्व है। भाजपा ने यहां से अनिल शर्मा को अपना उम्मीदवार बनाया है जबकि आम आदमी पार्टी ने प्रमिला टोकस को यहां से चुनाव मैदान में उतारा है। बेटी के बहाने योगानंद शास्त्री को यह साबित करना है कि उनकी ताकत अब भी कायम है।

विरासत की सियासत के तहत एक दिलचस्प मुकाबला मॉडल टाउन विधानसभा क्षेत्र में भी देखने को मिल रहा है। कांग्रेस ने यहां से पूर्व विधायक व दिल्ली विधानसभा में पार्टी के पूर्व मुख्य सचेतक कुंवर करण सिंह की बेटी आंकाक्षा ओला को चुनाव मैदान में उतारा है। उनके सामने भाजपा के कपिल मिश्रा हैं तो आम आदमी पार्टी ने अपने विधायक अखिलेशपति त्रिपाठी को यहां से एक बार फिर से चुनाव मैदान में उतारा है। कुंवर करण सिंह इस क्षेत्र से कई बार विधानसभा का चुनाव जीत चुके हैं। हालांकि पिछले दो चुनावों में उन्हें लगातार दो हार का सामना करना पड़ा। लिहाजा, इस चुनाव में उनकी बेटी को भी अपनी और अपने पिता के भी सियासी दमखम का परिचय देना है क्योंकि उनके बहाने उनके पिता की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है।

कांग्रेस ने देवली सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र से देश के पूर्व गृह मंत्री रहे बूटा सिंह के बेटे अरविंदर सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है। उनके लिए भी नए सिरे से अपनी ताकत दिखाने की चुनौती है। बूटा सिंह कांग्रेस के दमदार नेताओं में शुमार रहे और देवली विधानसभा क्षेत्र में उनके बेटे को चुनाव जीतकर अपनी शक्ति दिखलानी है। कांग्रेस ने कालकाजी विधानसभा क्षेत्र से दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा की बेटी शिवानी चोपड़ा को उतारा है और यहां बेटी के बहाने सुभाष चोपड़ा की प्रतिष्ठा दांव पर है।

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