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दिल्ली: व्यवसायी ध्रुवराज त्यागी की हत्या के बाद महापंचायत, कई मुस्लिमों ने छोड़ा घर

पश्चिमी दिल्ली के बसई दारा पुर में बेटी के साथ छेड़छाड़ का विरोध करने वाले व्यवसायी की हत्या के बाद स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। इस बीच कई मुस्लिम परिवार यहां से घर छोड़कर जा रहे हैं।

बसई दारा पुर में सड़क जाम करते प्रदर्शनकारी। (फोटोः गजेंद्र यादव)

पश्चिमी दिल्ली के बसई दारा पुर में रविवार को बेटी के साथ छेड़छाड़ के विरोध में जान गंवाने वाले व्यवसायी ध्रुव राज त्यागी की हत्या के बाद इलाके में तनाव बना हुआ है। त्यागी समुदाय अब महापंचायत की तैयारी कर रहा है। इस बीच यहां कई मुस्लिम अपना घर छोड़कर जा रहे हैं।

यहां रहने वाले 32 वर्षीय रियाज अहमद ने अपनी चार भतीजियों को अपने रिश्तेदार के पास दिल्ली के ही उत्तम नगर भेज दिया।  अहमद उन परिवारों में से एक ही जिन्होंने यहां हत्या के बाद उपजे तनाव के बाद घर छोड़ा है। हत्या का आरोपी अल्पसंख्यक समुदाय से है।

स्थानीय लोग हत्या के विरोध में प्रदर्शन के साथ ही आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। घटना के बाद इलाके में सांप्रदायिक तनाव फैल गया था। अहमद उन लोगों में से है जो पीड़ित और उसके बेटे को बचाने में लगे थे। इससे पहले आरोपियों ने मृतक की बेटी के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की थी। इसका विरोध करने पर ही आरोपी ने व्यवसायी ध्रुव राज त्यागी को चाकू से गोद दिया था।

इंडियन एक्सप्रेस जब पीड़ित परिवार के घर से कुछ दूरी पर स्थित अहमद के घर पहुंचा तो वहां ताला लगा हुआ था। पड़ोसियों ने बताया कि वह सुबह ही घर से निकल गया है। पड़ोसियों ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि वे लोग कब तक लौटेंगे। अहमद के अलावा तीन अन्य मुस्लिम परिवार भी अस्थायी रूप से यहां से जा रहा है।

40 वर्षीय बिजनेसमैन मोहम्मद अकरम ने कहा कि बृहस्पतिवार को हमने लोगों को ‘मुसलमानों बसई छोड़ो’ का नारा लगाते सुना। मैंने अपने परिवार से अपने दोस्त के यहां रमेश नगर चलने के लिए कहा। अकरम ने कहा कि उसके बच्चे अभी छोटे हैं और उसे डर लग रहा है।

बसई दारा पुर मस्जिद के नजदीक रहने वाले प्रॉपर्टी डीलर 45 वर्षीय सोहेल सलमानी अपनी पत्नी और तीन बच्चों के साथ अपने रिश्तेदार के यहां उत्तम नगर जा चुके हैं। सलमानी के कहा कि हम चाहते हैं कि दोषी को सजा मिले लेकिन इसके लिए पूरे समुदाय को सजा नहीं मिलनी चाहिए।

मामले को सांप्रदायिक रंग न दिया जाएः पीड़ित के चचेरे भाई का कहना है कि यदि मुसलमान ने उसके भाई को मारा है तो उनके भतीजे को मुसलमान ने ही बचाया। इस मामले को सांप्रदायिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए। हम इसकी निंदा करते हैं। हम नहीं चाहते कि बसई में मुसलमानों को कुछ हो।

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