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स्‍कूली बच्‍चों के परिवारों में वोटर्स की जानकारी जुटा रही थी दिल्‍ली सरकार, चुनाव आयोग ने लगाई रोक

दिल्ली सरकार ने चुनाव आयोग की बात मानने से यह कहकर इंकार कर दिया है कि यह उसके अधिकार क्षेत्र का मामला नहीं है।

delhi governmentदिल्ली सरकार ने चुनाव आयोग का निर्देश मानने से यह कहकर इंकार कर दिया है कि यह उसके अधिकार क्षेत्र का मामला नहीं है।(फाइल फोटो)

दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार और चुनाव आयोग इन दिनों एक मुद्दे पर आमने-सामने आ गए हैं। दरअसल दिल्ली सरकार ने डायरेक्टरेट ऑफ एजुकेशन (DoE) को निर्देश देकर स्कूलों के छात्रों और उनके परिवारों का डाटा कलेक्ट करने को कहा है। जिसकी शिकायत चुनाव आयोग को मिली तो चुनाव आयोग ने इसे गैरकानूनी बताते हुए इस प्रक्रिया को बंद करने को कहा है। लेकिन दिल्ली सरकार में उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने इससे इंकार कर दिया है और चुनाव आयोग को लिखे एक खत में कहा है कि यह उसके अधिकार क्षेत्र का मामला नहीं है। द इंडियन एक्सप्रेस ने जब इस बारे में मनीष सिसोदिया से संपर्क करने की कोशिश की तो उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया अभी तक नहीं आयी है। वहीं मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने इस पर कोई भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया है। माना जा रहा है कि चुनाव आयोग उसके आदेश की अवहेलना को लेकर जल्द ही बैठक कर इस मुद्दे पर चर्चा कर सकता है।

बता दें कि बीते सितंबर में दिल्ली सरकार ने दिल्ली के सभी स्कूलों को, जिनमें पब्लिक और प्राइवेट शामिल हैं, सभी छात्रों, उनके परिजनों और रिश्तेदारों का डाटा कलेक्ट करने का निर्देश दिया था। इस डाटा के तहत मोबाइल नंबर, वोटर आईडी और एजुकेशनल क्वालिफिकेशन के कागजात आदि की जानकारी ली जा रही है। दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का कहना है कि “यह डाटा इस बात का पता लगाने के लिए एकत्र किया जा रहा है कि दिल्ली के स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों में से कितने दिल्ली में रहते हैं। सरकार का कहना है कि छात्रों का डाटा बैंक एकत्र कर उनके रेजीडेंशियल एड्रेस की पुष्टि की जाएगी। साथ ही इसकी मदद से विभिन्न लॉन्ग टर्म और शॉर्ट टर्म परियोजनाएं बनाने में भी मदद मिलेगी।”

हालांकि दिल्ली सरकार के इस कदम की विपक्षी पार्टियों और कुछ सामाजिक संगठनों ने आलोचना की है और इसे ‘निजता का उल्लंघन करार दिया है। उल्लेखनीय है कि यह मामला फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट में है। शिकायत मिलने के बाद चुनाव आयोग ने भी इस पर आपत्ति जतायी है। आयोग के अधिकारियों का कहना है कि वोटरों का वोटर आईडी से संबंधित जानकारी इकट्ठा करने का अधिकार सिर्फ चुनाव आयोग को है। कोई तीसरा पक्ष ऐसा नहीं कर सकता है। दिल्ली सरकार जो कर रही है, उसकी इजाजत नहीं दी जा सकती। वहीं चुनाव आयोग की आपत्ति के बाद मनीष सिसोदिया ने चुनाव आयोग को एक पत्र लिखा है। जिसमें कहा गया है कि डायरेक्टरेट ऑफ एजुकेशन के काम में दखल देने का अधिकार चुनाव आयोग को नहीं है। खासकर जब राज्य में चुनाव ना हो रहे हों।

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