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नए पोक्सो कोर्ट खोलने में ढिलाई के कारण यौन उत्पीड़न मामलों के निपटारे में देरी

नए पोक्सो कोर्ट खोलने की घोषणा से अब राज्य सरकार पीछे हट गई है। उसका कहना है कि पहले से ही चल रही 56 अदालतों में सुविधाएं बढ़ा कर काम में तेजी लाई जाएगी।

प्रतीकात्मक फोटो (सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस)

महिलाओं और बालिकाओं के यौन उत्पीड़न के हजारों मामलों की सुनवाई के लिए नए पोक्सो कोर्ट स्थापित करने में सरकार नाकाम साबित हो रही है। यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों की सुनवाई कर उनके निपटारे में तेजी लाने के लिए केंद्र सरकार ने देश में 1023 त्वरित निपटान विशेष न्यायालयों की स्थापना के लिए एक योजना बनाई हुई है। यह योजना सिर्फ एक वर्ष के लिए है। राजस्थान में इस योजना के तहत 45 विशेष कोर्ट खोलने पर करीब 34 करोड रूपए की लागत आएगी। इसमें केंद्र सरकार अपनी हिस्सा राशि 20 करोड रुपए देगी। नए पोक्सो कोर्ट खोलने की घोषणा से अब राज्य सरकार पीछे हट गई है। उसका कहना है कि पहले से ही चल रही 56 अदालतों में सुविधाएं बढ़ा कर काम में तेजी लाई जाएगी।

प्रदेश की अदालतों में यौन उत्पीड़न के 11 हजार 800 से ज्यादा मामले विचाराधीन हैं। इनमें भी सात हजार मामले नाबालिगों से बलात्कार से जुड़े हैं। इतनी बड़ी संख्या में मामले अदालतों में विचाराधीन होने के कारण ही सरकार ने इस बार के अपने बजट में 47 नए विशेष कोर्ट खोलने का एलान किया था। सरकार के वित्त महकमे ने अपने इस फैसले को वापस ले लिया है। इस बारे में वित्त विभाग ने विधि विभाग को सूचित भी कर दिया है। इस फैसले से वकील समुदाय में रोष है। उनका कहना है कि यौन उत्पीड़न के मामले अत्यधिक संवेदनशील होते हैं। खास कर नाबालिगों से जुड़े मामले तो बेहद नाजुक होते हैं। इन मामले के दोषियों को सजा मिलने में बहुत अधिक समय लग जाता है, इससे पीड़िताओं को न्याय मिलने में देरी होती है।

वकीलों का कहना है सरकार को विशेष पोक्सो कोर्ट खोलने की अपनी बजट घोषणा को इस साल ही पूरा करना चाहिए। राजस्थान हाईकोर्ट के एडवोकेट दीपक शर्मा का कहना है कि केंद्र सरकार की योजना के तहत विशेष कोर्ट की स्थापना के लिए 60 फीसद रकम का हिस्सा तो केंद्र सरकार ही दे रही है। प्रदेश में 26 कोर्ट की स्थापना के लिए 5 करोड़ रुपए राज्य सरकार के खाते में आ चुके हैं। इसके बावजूद राज्य सरकार कोर्ट खोलने के अपने निर्णय से पीछे हट गई है। यह बजट एक साल के लिए ही है और इस्तेमाल नहीं होने पर लैप्स हो जाएगा।

जयपुर जिला अदालत में यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों की पैरवी से जुड़े वकील वरुण पुरोहित का कहना है कि केंद्र सरकार जब नई अदालतों की स्थापना में मदद करने को तैयार है तो राज्य को इसका फायदा उठाना चाहिए। यौन उत्पीड़न के मामले वर्षों तक अदालतों में चलने से समाज पर उसका उलटा असर होता है। प्रदेश में दुष्कर्म के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। कमजोर तबकों के नाबालिगों के साथ होने वाले अत्याचार के मामलों का तो फौरन निपटारा होना चाहिए। सरकार को ऐसे मामलों के लिए कारगर नीति बनानी होगी तभी लोगों को राहत मिल पाएगी।

राज्य सरकार ने बजट घोषणा में इस बार पोक्सो, फैमिली, एडीजे और एससी-एसटी सहित 86 नवीन अदालतों की स्थापना की घोषणा की थी। इसमें से सरकार ने 39 नए कोर्ट खोल दिए। लेकिन सरकार ने 47 नए पोक्सो कोर्ट खोलने की घोषणा को वापस ले लिया। वित्त विभाग का तर्क है कि पिछले सालों में खुले 56 पोक्सो कोर्ट में सुविधाएं बढा कर उनमें त्वरित मामलों का निपटारा कराया जाएगा। सरकार विचाराधीन नए कोर्ट की स्थापना नए वित्तीय वर्ष में करने पर विचार करेगी।

वकीलों का कहना है सरकार को विशेष पोक्सो कोर्ट खोलने की अपनी बजट घोषणा को इस साल ही पूरा करना चाहिए। राजस्थान हाईकोर्ट के एडवोकेट दीपक शर्मा का कहना है कि केंद्र सरकार की योजना के तहत विशेष कोर्ट की स्थापना के लिए 60 फीसद रकम का हिस्सा तो केंद्र सरकार ही दे रही है। प्रदेश में 26 कोर्ट की स्थापना के लिए 5 करोड़ रुपए राज्य सरकार के खाते में आ चुके हैं। इसके बावजूद राज्य सरकार कोर्ट खोलने के अपने निर्णय से पीछे हट गई है। यह बजट एक साल के लिए ही है और इस्तेमाल नहीं होने पर लैप्स हो जाएगा।

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