उत्तराखंड के देहरादून में देहरादून-पांवटा साहिब पुराने राजमार्ग पर नंदा की चौकी (प्रेमनगर) स्थित टौंस नदी पर बने पुल को बारिश की वजह से जो नुकसान पहुंचा था उसका मरम्मत कार्य मंगलवार को ही शुरू हो गया। लगभग 16 करोड़ रुपये की लागत से बने इस पुल को तेज बारिश ने भारी नुकसान पहुंचाया था जिसके बाद प्रशासन ने इसके मरम्मत का कार्य मंगलवार को ही शुरू कर दिया। बड़ी-बड़ी जेसीबी मशीनें इस मरम्मत कार्य में जुट गई हैं और स्थानीय प्रशासन का दावा है कि बहुत जल्द पुल को जनता के लिए खोल दिया जाएगा।
देर रात ब्रिज की कनेक्टिंग सड़क का हिस्सा भी धंस गया
बता दें कि टौंस नदी पर बनाए गए इस पुल को बारिश में भारी नुकसान हुआ। पुल के मरम्मत कार्य के दौरान ब्रिज से जुड़ने वाली कनेक्टिंग सड़क में देर रात भारी धंसाव हो गया, जिससे सड़क पर एक बड़ा गड्ढा बन गया। हालात ये हो गए कि लोगों की भीड़ मौके पर नजारा देखने के लिए उमड़ आई। खास बात ये है कि यह रास्ता मुख्यमंत्री कार्यालय से भी जुड़ता है शायद इसलिए भी इस ब्रिज के मरम्मत का काम तत्काल शुरू हुआ और जल्द ही इसे पूरा भी कर लिया जाएगा।
मरम्मत कार्य में लगा ट्रक भी मिट्टी में धंसा
जानकारी के मुताबिक, यह रास्ता देहरादून के मुख्य बाजार घंटाघर और आईएसबीटी से कनेक्ट होता ।. सीएम ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए PWD सचिव से रिपोर्ट मांग ली है। इस रास्ते को बहाल करने में लगा ट्रक भी दोपहर के वक्त कनेक्टिंग सड़क में धंस गया। ट्रक का पिछला हिस्सा धंसने से वह हवा में झूल गया। रास्ते बने गहरे होल में मिट्टी भरने के लिए इस ट्रक का इस्तेमाल किया जा रहा था। ट्रक के धंसने के बाद राहत कार्य में लगी जेसीबी और वर्कर्स ट्रक को निकालने में जुट गए। क्रेन और दो जेसीबी मशीन की मदद से ट्रक को बाहर निकाला जा सका।
कांग्रेस ने साधा था सरकार पर निशाना
बता दें कि इस पुल का बड़ा हिस्सा मंगलवार को क्षतिग्रस्त हुआ था। ब्रिज के बड़े हिस्से में हुए बड़े गड्ढे को देखने के लिए वहां स्थानीय लोगों की भीड़ भी इकट्ठा हो गई थी। इस घटना को लेकर कांग्रेस पार्टी ने राज्य की बीजेपी सरकार को आड़े हाथ लिया था। कांग्रेस पार्टी ने ब्रिज के वीडियो को शेयर करते हुए कहा था कि देहरादून में 16 करोड़ की लागत से बने पुल का हाल देखिए, ये 16 दिन भी नहीं टिक पाया। शायद इसे ‘ब्लैकहोल टेक्नोलॉजी’ से बनाया गया होगा। कांग्रेस ने कहा था कि इससे ये तो साफ है कि नरेंद्र मोदी और उनके नेताओं का पूरा फोकस सिर्फ घपलेबाजी पर है। जनता मरे या जिए- इन लोगों को फर्क नहीं पड़ता।
