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26 जनवरी पर प. बंगाल, तमिलनाडु की झांकी को रिजेक्ट करने पर राजनाथ ने दोनों को चिट्ठी लिख बताया ये कारण

रक्षा मंत्री ने कहा कि अनेक राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों, केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों से प्राप्त झांकी के प्रस्तावों का विशेषज्ञ समिति की बैठकों में सिलसिलेवार मूल्यांकन किया जाता है। इस समिति में कला, संस्कृति, ललित कला, मूर्तिकला, संगीत, शिल्पकला, नृत्य आदि क्षेत्रों के जानेमाने लोग हैं।

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Republic Day Parade : गणतंत्र दिवस पर हर साल राजपथ पर परेड में विभिन्न राज्यों और विभागों की झांकी निकाली जाती है। (Express Photo: Tashi Tobgyal)

इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड के लिए पं बंगाल और तमिलनाडु की ओर से भेजे गए झांकी के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किए जाने को दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री ने इसे राज्य की जनता का अपमान बताया है। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे एक पत्र में, पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने बोस और उनकी भारतीय राष्ट्रीय सेना पर आधारित राज्य की झांकी को अस्वीकार करने पर “आश्चर्य” व्यक्त किया था।

इसमें रवींद्रनाथ टैगोर, ईश्वरचंद्र विद्यासागर, स्वामी विवेकानंद और श्री अरबिंदो जैसे अन्य बंगाली महापुरुषों के प्रतीक भी शामिल थे। बनर्जी ने प्रधानमंत्री से इस फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह करते हुए कहा कि अगर इसे नहीं बदला गया तो इससे पश्चिम बंगाल के लोगों को ‘दर्द’ होगा।

उधर, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन से मंगलवार को कहा कि इस साल गणतंत्र दिवस परेड के लिए झांकियों का चयन निर्दिष्ट दिशानिर्देशों के अनुसार किया गया है। एक दिन पहले ही स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर उनके राज्य के झांकी के प्रस्ताव को स्वीकृत नहीं किये जाने पर हस्तक्षेप का अनुरोध किया था। मोदी को पत्र लिखकर स्टालिन ने कहा था कि झांकी के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया जाना ‘निराशाजनक’ है और इससे राज्य की जनता की भावनाएं आहत होंगी।

दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पत्र लिखकर झांकियों को नहीं स्वीकार किए जाने की वजह बता दी है। उन्होंने मंगलवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखकर सूचित किया कि सीपीडब्ल्यूडी पहले ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस को उनकी 125वीं जयंती पर श्रद्धांजलि देते हुए झांकी निकाल रही है, ऐसे में उसी विषय पर दूसरी झांकी को निकालना सही नहीं होगा।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन को जवाब में लिखे पत्र में रक्षा मंत्री ने कहा कि झांकी के चयन के लिए हुईं बैठकों के पहले तीन दौर में तमिलनाडु के प्रस्ताव पर विचार किया गया लेकिन इस साल गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने के लिए चयनित 12 झांकियों की अंतिम सूची में उसे जगह नहीं मिली। सिंह ने कहा, ‘‘गणतंत्र दिवस परेड में भाग लेने के लिए झांकियों के चयन की एक भलीभांति स्थापित प्रणाली है जिसके अनुसार रक्षा मंत्रालय सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों से झांकियों के लिए प्रस्ताव आमंत्रित करता है।’’

रक्षा मंत्री ने कहा कि अनेक राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों, केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों से प्राप्त झांकी के प्रस्तावों का विशेषज्ञ समिति की बैठकों में सिलसिलेवार मूल्यांकन किया जाता है। इस समिति में कला, संस्कृति, ललित कला, मूर्तिकला, संगीत, शिल्पकला, नृत्य आदि क्षेत्रों के जानेमाने लोग हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘विशेषज्ञ समिति थीम, अवधारणा, डिजाइन और दृश्य प्रभाव के आधार पर प्रस्ताव का आकलन करती है और फिर सिफारिश देती है।’’ सिंह ने कहा कि इस साल गणतंत्र दिवस परेड के लिए तमिलनाडु समेत राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से कुल 29 प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ साल में 2017, 2019, 2020 और 2021 में तमिलनाडु की झांकी को परेड के लिए चुना गया था। उन्होंने स्टालिन से कहा, ‘‘उक्त जानकारी के मद्देनजर आप इस बात की सराहना करेंगे कि झांकियों का चयन निर्दिष्ट दिशानिर्देशों के अनुसार हुआ है।’’

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