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गुरुग्राम : हिंदू संगठनों की पंचायत में फैसला- मुस्लिमों को किराये पर नहीं देंगे घर और दुकान

गुरुग्राम के शीतला कॉलोनी में एक घर में कथित मस्जिद को सील किए जाने के बाद तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। हिंदू संगठनों ने पंचायत कर मुस्लिम परिवारों को किराए पर घर व दुकान नहीं देने का फैसला किया।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (फोटाे- AP)

देश की राजधानी दिल्ली के सटे हरियाणा के गुरुग्राम की शीतला कॉलोनी में एक घर में बनी कथित मस्जिद को लेकर शुरू हुअा विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। 12 सितंबर को इस मस्जिद को नगर निगम ने सील कर दिया था। इस सील को खुलवाने के लिए मुस्लिम संगठन लगातार प्रयासरत हैं। वहीं, दूसरी ओर हिंदू संगठन ने कथित मस्जिद की सील खोलने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। इस सिलसिले में रविवार (16 सितंबर) को शीतला माता मंदिर में हिंदू संगठनों की पंचायत हुई। पंचायत में स्वामी विवेकानंद गिरी की उपस्थिति में मुस्लिम परिवारों को किराए पर घर व दुकान नहीं देने का फैसला लिया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हिंदू संगठनों ने यह चेतावनी दी है कि कथित मस्जिद को सील करने से पहले जिला उपायुक्त ने एसडीएम से इसकी रिपोर्ट तैयार करवाई थी। इसके बाद ही सील करने की कार्रवाई हुई। अब यदि प्रशासन द्वारा इस सील को खोलने का प्रयास किया जाता है तो बड़ा आंदोलन होगा। इसके साथ ही हिंदू संगठनों ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले साल इसी तरह ओम विहार इलाके में एक घर को मस्जिद व मदरसे बता दिया गया था। स्थानीय लोगों द्वारा भारी विरोध के बाद प्रशासन द्वारा इसे बंद कर दिया गया। हिंदू संगठनों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने मुस्लिम समुदाय के लोगों को नमाज पढ़ने के लिए 35 जगह चिन्हित किए। इमें 24 जगह मुस्लिम के हैं। शीतला कॉलोनी में करीब 30 मकान ही मुस्लिम के हैं, लेकिन नमाज के समय सैंकड़ों लोग आ जाते हैं। इससे यहां के हिंदुओं को परेशानी होती है।

इस कथित मस्जिद को लेकर हिंदू और मुस्लिम दोनों समाज के लोग आमने-सामने आ गए हैं। हिंदू संगठनों का कहना है कि निजी मकान को मस्जिद का रूप दे दिया गया है। प्रशासन द्वारा इसे सील किया जाना सही कदम है। वहीं, मुस्लिम संगठनों का कहना है कि हमारे पास इसके दस्तावेज हैं। यह जमीन 2016 में मस्जिद बनाने के लिए खरीदी गई थी। प्रशासन जानबूझ कर माहौल खराब करने की कोशिश कर रहा है। इसे किसी भी कीमत पर बर्दास्त नहीं किया जाएगा। इसका खामियाजा सरकार व प्रशासन को भुगतना होगा।

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