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DDA की लालफीताशाही से कर्मचारी परेशान

दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के उपाध्यक्ष के तुगलकी फरमान झेलने के बाद अब विभागीय कार्यों में भेदभाव से अधिकारियों में नाराजगी है।
Author नई दिल्ली | March 23, 2016 03:10 am
दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA File Photo)

दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के उपाध्यक्ष के तुगलकी फरमान झेलने के बाद अब विभागीय कार्यों में भेदभाव से अधिकारियों में नाराजगी है। स्थानांतरण नीति के अभाव में इंजीनियरिंग विभाग के जूनियर कर्मचारियों के पास काम नहीं होने का खमियाजा भी आला अधिकारियों को उठाना पड़ रहा है। शिकायत करने पर वेतन रोकने और काटने तक की बात कही जा रही है। हालत तब है जब रोहिणी से लेकर बरवाला और नरेला से लेकर महिपालपुर, वसंत कुंज तक के आवंटित फ्लैटों का काम अभी तक पूरा नहीं हुआ है। विभाग में कर्मचारियों की कमी की भी समस्या है।

डीडीए के आला सूत्रों के मुताबिक, यहां का इंजीनियरिंग विभाग इस समय सबसे ज्यादा लाल फीताशाही की चपेट में है। अधिशासी अभियंताओं में किसी के पास बहुत ज्यादा काम है तो किसी के पास बिल्कुल नहीं। ऊपर से रोजाना डायरी भरने का एक अलग तुगलकी फरमान लागू है। मुश्किल यह है कि जब किसी अधिकारी को काम दिया ही नहीं जा रहा तो फिर वे डायरी में क्या लिखें? डीडीए में तकरीबन 80 डिविजन हैं। हर डिविजन का एक प्रमुख अधिशासी अभियंता होता है। अभियंता सदस्य अभियंता विभाग का प्रमुख और प्राधिकरण का सदस्य होता है।

मुख्य अभियंता जोन का प्रधान होता है और कार्यों को बंटवारे का अधिकार भी उन्हीं के जिम्मे होता है। इनमें किसी के पास काम नहीं है तो किसी के पास इतना काम है कि वे दिनभर व्यस्त रहते हैं। इंजीनियरिंग विभाग डीडीए के सारे पार्कों का रखरखाव और कालोनियां बनाने से लेकर नए फ्लैटस में सीवर रोड आदि तक का जिम्मा संभालता है। यही नहीं जब तक पूरी तरह से फ्लैट बनाकर निगम या अन्य विभागों को सौंप नहीं दिया जाता तब तक इंजीनियरिंग विभाग व्यावसायिक परिसरों और दुकानों की देखभाल और रखरखाव भी करता है।

सूत्रों का कहना है कि जो लालफीताशाही में फिट बैठते हैं उन्हें ज्यादा काम मिल रहा है और जो इस व्यवस्था से दूर रहते हैं, उन्हें खाली बैठाया जा रहा है। उदाहरण के तौर पर दक्षिणी खंड दो में 300 करोड़ के भवन निर्माण का काम है जबकि दक्षिण-पश्चिमी खंड एक में कोई काम नहीं है। इसी तरह दक्षिण-पूर्वी खंड आठ में जिसके पास पहले से ही निर्माण के तीन बड़े कार्य हैं उसी अधिशासी अभियंता को दक्षिण-पूर्वी खंड 11 का भी चार्ज देकर करोड़ों का काम दे दिया गया है।

सूत्रों का कहना है कि प्राधिकरण में इंजीनियरों और अन्य अधिकारियों के तबादले की कोई व्यवस्थित नीति नहीं हैं। यही कारण है कि जिनके पास ज्यादा काम है, उन्हें ही और काम दिया जा रहा है और जिनके पास काम नहीं है उन्हें खाली बिठाया जा रहा है। हाउसिंग के मामले में वसंत कुंज, महिपालपुर के काम को खंड एक से लेकर खंड दो को दे दिया गया है।

सूत्रों का कहना है सुविधा शुल्क के चक्कर में उन अभियंताओं के पास ठेकेदारों की भीड़ होती है जो कम दरों पर काम करने की बात करते हैं। ऐसे इंजीनियरों के पास आधे दर पर ठेकेदार काम करने को राजी हो जाते हैं जबकि सख्त इंजीनियरों के साथ ठेकेदार काम करने को तैयार ही नहीं होते। सूत्रों का कहना है कि डीडीए के नए उपाध्यक्ष से जब इस तरह की अनियमितताओं और कार्यों के बंटवारे में हेराफेरी की शिकायत की जाती है तो एक ही जवाब मिलता है कि जिनके पास काम नहीं है उनका वेतन रोका जाए या काटा जाए। अभियंताओं के पास लिपिक से लेकर स्टेनो तक के पद खाली हैं। जहां सात स्टाफ चाहिए वहां एक से ही काम चलाया जा रहा है। यह सब स्थानांतरण नीति और कार्य नीति के सुचारू नहीं होने का परिणाम है।

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