ताज़ा खबर
 

हाई कोर्ट के सवाल उठाने के एक दिन बाद ही बोले योगी, गोहत्यारों को भेजेंगे जेल

योगी आदित्य नाथ की टिप्पणी से एक दिन पहले यानी सोमवार को ही इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक आदेश में यूपी के गो हत्या कानून के दुरुपयोग पर चिंता जताई थी।

UP News, State Newsयूपी के सीएम योगी आदित्य नाथ। (गजेंद्र यादव)

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने गोहत्या पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की टिप्पणी के एक दिन बाद इस मामले में प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने मंगलवार को घाटमपुर और बांगरमऊ विधानसभा सीटों के उपचुनाव के लिए भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में आयोजित जनसभाओं में कहा कि प्रदेश में गो हत्यारों के साथ कानून के मापदंडों के भीतर सख्ती से निपटा जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य में गो हत्या को स्वीकार नहीं किया जाएगा। योगी आदित्य नाथ की टिप्पणी से एक दिन पहले यानी सोमवार को ही इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक आदेश में यूपी के गो हत्या कानून के दुरुपयोग पर चिंता जताई थी।

कोर्ट ने कहा था कि अगर इस कानून को मूल भावना के साथ लागू किया जाए तो पशु स्वामियों द्वारा छोड़ी गई बूढ़ी या दूध ना देने वाली गायों की देखभाल की जररुत है। जस्टिस सिद्धार्थ ने प्रदेश में गोहत्या निषेध कानून के दुरुपयोग पर जिंता जताते हुए रहमुद्दीन सहित दो व्यक्तियों को जमानत दे दी। ये दोनों व्यक्ति कथित तौर पर गोहत्या में शामिल थे। बता दें कि जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि वो गायों को बचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और जो इन्हें मारता पाया गया उसे जेल जाना होगा। गायों को सुरक्षित रखने के लिए हर जिले में गोशालाएं बनाई जा रही हैं। गायों की रक्षा करना सभी की जिम्मेदारी है।

उल्लेखनीय है कि सोमवार को सुनावई के दौरान याचिकाकर्ता की दलील थी कि एफआईआर में उसके खिलाफ कोई विशेष आरोप नहीं हैं और उसे घटनास्थल से गिरफ्तार नहीं किया गया। इसके अलावा बरामद किया गया मांस गाय का था या नहीं, इसकी पुलिस द्वारा जांच भी नहीं की गई। संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने कहा, ‘इस कानून का निर्दोष लोगों के खिलाफ दुरुपयोग किया जा रहा है। जब कभी मांस बरामद किया जाता है, इसे आम तौर पर गाय के मांस के तौर पर दिखाया जाता है और फॉरेंसिक लैब द्वारा इसकी जांच नहीं कराई जाती है। ज्यादातर मामलों में मांस को विश्लेषण के लिए नहीं भेजा जाता है। आरोपी एक ऐसे अपराध के लिए जेल में पड़े रहते हैं जो अपराध किया ही नहीं गया।’

अदालत ने मालिकों या आश्रय स्थलों द्वारा गायों को खुला छोड़ने के मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए कहा, ‘गोशालाएं दूध नहीं देने वाली गायें या बूढ़ी गायें नहीं लेतीं और इन गायों को सड़कों पर घूमने के लिए छोड़ दिया जाता है। ग्रामीण इलाकों में पशुओं को चारा देने में असमर्थ लोग उन्हें खुला छोड़ देते हैं। पुलिस के भय से इन पशुओं को प्रदेश के बाहर नहीं ले जाया जा सकता। अब चारागाह भी नहीं रहे। इसलिए ये जानवर यहां वहां घूमकर फसलें खराब करते हैं।’

अदालत ने कहा, ‘चाहे गायें सड़कों पर हों या खेत में, उन्हें खुला छोड़ने से समाज बुरी तरह प्रभावित होता है। यदि गोहत्या कानून को सही ढंग से लागू करना है तो इन पशुओं को आश्रय स्थलों या मालिकों के पास रखने के लिए कोई रास्ता निकालना पड़ेगा।’ (एजेंसी इनपुट)

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 लालू राज पर बिना नाम लिए पीएम मोदी का हमला, कहा- उनका मंत्र रहा है, पैसा हजम, परियोजना खत्म
2 मुंगेर में फायरिंग पर बरसे तेजस्वी, नीतीश सरकार से बोले, जनरल डायर बनने को किसने कहा
3 सीएम रहते कमलनाथ निकले नहीं, अब हर जिले में घूम रहे, उन्हें वोट नहीं नोट की परवाह, सिंधिया का वार
यह पढ़ा क्या?
X