मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव का कार्यक्रम चुनाव आयोग ने गुरुवार को घोषित कर दिया है। उपचुनाव की आधिकारिक अधिसूचना 6 जुलाई को जारी की जाएगी। उम्मीदवार 13 जुलाई तक अपना नामांकन दाखिल कर सकते हैं। नामांकन पत्रों की जांच 14 जुलाई को होगी। नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख 16 जुलाई है। मतदान 30 जुलाई को होगा। 3 अगस्त को वोटों की गिनती होगी।

इलेक्शन कमीशन की आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, दतिया विधानसभा क्षेत्र में आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। सभी मतदान केंद्रों पर ईवीएम और वीवीपीएटी के माध्यम से मतदान किया जाएगा।

दतिया विधानसभा में क्यों रहा उपचुनाव?

दतिया विधानसभा में उपचुनाव कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता जाने की वजह से हो रहा है। राजेंद्र भारती को दो साल की सजा मिलने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता स्वतः समाप्त हो गई थी। इसके बाद मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने इस सीट को रिक्त घोषित कर दिया था।

यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के लिली थॉमस बनाम भारत संघ के फैसले लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 और संविधान के अनुच्छेद 191(1)(ई) के तहत की गई थी।

राजेंद्र भारती को किस मामले में सुनाई गई सजा?

कांग्रेस विधायक राजेंद्र को 1998 के एफडी धोखाधड़ी मामले में सजा सुनाई गई थी। 1998 में दतिया सहकारी ग्रामीण विकास बैंक में एक सावधि जमा (एफडी) से संबंधित कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया। जांचकर्ताओं ने आरोप लगाया कि एफडी की अवधि को तीन साल से बढ़ाकर 15 साल करने के लिए बैंक के रिकॉर्ड में हेरफेर किया गया था।

रिकॉर्ड में हेरफेर के आधार पर आरोप लगाया गया कि 1999 से 2011 के बीच ब्याज भुगतान की रकम निकाली गई थी। उस समय राजेंद्र भारती बैंक के अध्यक्ष और संबंधित संस्था के न्यासी भी थे। बाद में मामले की जांच की गई और आरोप पत्र दाखिल किया गया।

न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि और अयोग्यता

1 अप्रैल, 2026 को मध्य प्रदेश की एमपी-एमएसए कोर्ट ने राजेंद्र भारती को 28 साल पुराने बैंक धोखाधड़ी और जालसाजी मामले में दोषी ठहराया और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इसके अगले दिन 2 अप्रैल को कोर्ट ने उन्हें तीन साल की कैद की सजा सुनाई और 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। हालांकि अदालत ने उन्हें हाई कोर्ट में अपील करने की अनुमति देने के लिए सजा के क्रियान्वयन पर 60 दिनों के लिए रोक लगा दी, लेकिन दोषसिद्धि प्रभावी रही।

उसी दिन, मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने एक अधिसूचना जारी कर 2 अप्रैल से भारती की सदस्यता समाप्त कर दी। परिणामस्वरूप, दतिया विधानसभा सीट को रिक्त घोषित कर दिया गया और चुनाव आयोग को इसकी सूचना दे दी गई।

विधानसभा सीट को तत्काल रिक्त क्यों घोषित किया गया?

लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8(3) के तहत, दो वर्ष या उससे ज्यादा की सजा पाए किसी भी विधायक को अयोग्य घोषित कर दिया जाता है। सुप्रीम कोर्ट के 2013 के लिली थॉमस फैसले के बाद, यह अयोग्यता दोषसिद्धि के तुरंत बाद प्रभावी हो जाती है। अपील दायर करने से सदस्यता बहाल नहीं होती, जब तक कि हाई कोर्ट दोषसिद्धि या अयोग्यता पर रोक न लगा दे।

2023 में नरोत्तम मिश्रा क्यों हारे?

2023 के विधानसभा चुनाव में नरोत्तम मिश्रा की हार में बसाई के शहरी क्षेत्र ने अहम भूमिका निभाई। मतगणना के 13 राउंड में से वे केवल तीन राउंड में ही आगे रहे। 10वें राउंड तक राजेंद्र भारती ने लगभग 8,000 वोटों की बढ़त बना ली थी।

भाजपा को 2018 के “बसई चमत्कार” को दोहराने की उम्मीद थी, जब इस क्षेत्र के मजबूत समर्थन ने मिश्रा को जीत दिलाने में मदद की थी। हालांकि, 2023 में वे 11वें चरण में 866 वोटों से और 12वें चरण में 379 वोटों से पीछे रह गए। अंतिम चरण में उन्हें 735 वोटों की बढ़त मिली, लेकिन यह अपर्याप्त थी और अंततः वे 7,742 वोटों से हार गए।

दतिया विधानसभा चुनाव- 2018

साल 2018 के दतिया विधानसभा चुनाव में भाजपा के नरोत्तम मिश्रा ने जीत हासिल की थी। उन्होंने कांग्रेस के राजेंद्र भारती को 2,656 वोट हराया था।

क्रमांकउम्मीदवारपार्टीकुल वोटवोट प्रतिशत
1डॉ. नरोत्तम मिश्राभाजपा72,20949.0%
2राजेंद्र भारती कांग्रेस69,55347.2%

दतिया विधानसभा चुनाव- 2013

साल 2013 के दतिया विधानसभा चुनाव की बात करें तो इस चुनाव में भी भाजपा के डॉक्टर नरोत्तम मिश्रा ने जीत हासिल की थी। उन्होंने कांग्रेस के राजेंद्र भारती को 12,081 वोटों से हराया था।

क्रमांकउम्मीदवारपार्टीकुल वोटवोट प्रतिशत
1डॉ. नरोत्तम मिश्राभाजपा57,43844.16%
2राजेंद्र भारतीकांग्रेस45,35734.87%
3कालीचरण कुशवाहबसपा20,19115.52%

दतिया विधानसभा चुनाव- 2008

साल 2008 के दतिया विधानसभा चुनाव की बात करें तो इस चुनाव में भी बीजेपी के नरोत्तम मिश्रा ने जीत हासिल की थी। इस चुनाव में उन्होंने बसपा प्रत्याशी राजेंद्र भारती को 11,233 वोटों से मात दी थी।

क्रमांकउम्मीदवारपार्टीकुल वोटवोट प्रतिशत
1डॉ. नरोत्तम मिश्राभाजपा34,48934.10%
2राजेंद्र भारतीबसपा23,25622.99%
3घनश्याम सिंहकांग्रेस19,20918.99%

ऐसे में अगर पिछले चार चुनाव पर नजर डाले तो 2023 का विधानसभा चुनाव छोड़कर उसके बाद के तीन चुनाव में भाजपा के नरोत्तम मिश्रा ने जीत हासिल की है।

दतिया उपचुनाव 2026: प्रमुख दावेदार

कांग्रेस के कई नेता पार्टी टिकट के लिए होड़ में हैं। अयोग्य घोषित होने के बाद राजेंद्र भारती अपने बेटे अनुज भारती को चुनाव में उतारने के लिए पैरवी कर रहे हैं। पाठ्यपुस्तक निगम के पूर्व उपाध्यक्ष अवधेश नायक, जो 2023 के चुनाव से पहले कांग्रेस में शामिल हुए थे। वह भी एक मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं।

भाजपा की ओर से राज्य के पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के चुनाव लड़ने की प्रबल संभावना है। वहीं, दामोदर यादव आज़ाद समाज पार्टी (एएसपी) से चुनाव लड़ने जा रहे हैं। उनका कहना है कि पार्टी ने उन्हें अपना उम्मीदवार चुन लिया है। केवल औपचारिक घोषणा बाकी है।

नरोत्तम मिश्रा का डैमेज कंट्रोल पर फोकस

राजेंद्र भारती की अयोग्यता के बाद से नरोत्तम मिश्रा ने पार्टी कार्यकर्ताओं और मतदाताओं से पुनः संपर्क साधने के लिए सामाजिक सम्मेलन और सामुदायिक सभाएं आयोजित करके अपने प्रयासों को तेज कर दिया है। उन्होंने पिछले दो महीनों में एक दर्जन से ज्यादा सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किए हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, भाजपा दतिया के लिए एक बड़ी सरकारी घोषणा की तैयारी कर रही है। खबरों के मुताबिक, मिश्रा ने विकास योजनाओं पर चर्चा करने के लिए 1 जून को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात की। पार्टी का कहना है कि उन्होंने 2023 के चुनाव में हुई गलतियों से सबक लिया है।

कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती क्या?

कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती उम्मीदवार के चयन को लेकर है। क्योंकि एक सीट के लिए उसके कई दावेदार हैं। ऐसे में टिकट को लेकर कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। राजेंद्र भारती अपने बेटे अनुज भारती के लिए नामांकन की मांग रहे हैं। राजनीतिक हलकों में यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि राहुल गांधी और अखिलेश यादव से कथित तौर पर मुलाकात के बाद टिकट न मिलने पर अनुज भारती बगावत कर सकते हैं।

अवधेश नायक, जो पिछले चुनाव के दौरान पद से हट गए थे। वह खुद को स्वाभाविक दावेदार मानते हैं, जबकि पूर्व विधायक घनश्याम सिंह के समर्थक भी सक्रिय रूप से पैरवी कर रहे हैं। हालांकि, कांग्रेस के जिला अध्यक्ष अशोक डांगी ने गुटबाजी की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी सर्वेक्षण के नतीजों के आधार पर उम्मीदवार का फैसला करेगी।

दामोदर यादव (आजाद समाज पार्टी)

दामोदर यादव किसान सम्मेलनों और संगठनात्मक बैठकों के माध्यम से अपने अभियान को मजबूत कर रहे हैं। उनका दावा है कि बसपा और कांग्रेस दोनों दलों के कार्यकर्ता उनकी पार्टी में शामिल हो रहे हैं। लोगों को मानना है कि उनकी उम्मीदवारी से कांग्रेस के वोट बैंक में काफी सेंध लग सकती है।

उपचुनाव में जातिगत समीकरण

उपचुनाव में स्थानीय मुद्दों के बजाय जातिगत समीकरण भी चुनाव परिणाम निर्धारित करेंगे। दतिया विधानसभा में यादव मतदाता लगभग 18,000 है। यह समुदाय 2023 में भाजपा से काफी हद तक दूर रहा। ऐसे में दामोदर यादव के मैदान में उतरने से, यादव वोटों का लगभग 60% हिस्सा आज़ाद समाज पार्टी की ओर जा सकता है, जिससे कांग्रेस को नुकसान होगा।

कुशवाहा मतदाता लगभग 37,000 है। यह समुदाय दो गुटों में बंटा हुआ है। अगर कुशवाहा समुदाय का कोई और उम्मीदवार चुनाव लड़ता है, तो कांग्रेस को भाजपा से भी ज्यादा नुकसान होने की आशंका है।

ब्राह्मण मतदाता लगभग 35,000 है। ऐसे में भले ही कांग्रेस एक ब्राह्मण उम्मीदवार को मैदान में उतारे फिर भी समुदाय का एक बड़ा हिस्सा नरोत्तम मिश्रा के प्रति वफादार रहने की उम्मीद है।

मोहन यादव लैंड डील: दिग्विजय सिंह के फैक्ट चेक से कांग्रेस में हड़कंप, भाजपा विधायक ने पूर्व सीएम को दिया बड़ा ‘ऑफर’

मध्य प्रदेश कांग्रेस में पिछले तीन दिनों से एक जमीन मामले को लेकर खींचतान देखने को मिली। यह विवाद तब शुरू हुआ जब पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने एक फैक्ट-चेक यानी रिसर्च के जरिए मुख्यमंत्री मोहन यादव पर लगाए जा रहे अपनी पार्टी के आरोपों पर सवाल खड़े कर दिए। पढ़ें पूरी खबर।