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दिग्गज दंगल: ममता के लिए नाक का सवाल बनी गोरखा बहुल सीट

तृणमूल उम्मीदवार अमर सिंह कहते हैं कि अबकी गोरखालैंड नहीं बल्कि विकास ही इलाके में सबसे बड़ा मुद्दा है। इलाके में बीते एक दशक से भाजपा सांसद होने के कारण विकास का कोई काम ही नहीं हुआ है।

ममता बनर्जी ( फोटो सोर्स : इंडियन एक्सप्रेस )

पश्चिम बंगाल की दार्जीलिंग संसदीय सीट मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी के लिए नाक का सवाल बन गई है। उनकी पार्टी कभी यह सीट नहीं जीत सकी है। इसलिए अबकी गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के विधायक अमर सिंह राई को उम्मीदवार बनाया है। इस सीट पर दूसरे चरण में 18 अप्रैल को मतदान होना है। इस संसदीय सीट पर वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों के मुकाबले अबकी समीकरण बदल गए हैं। जिस गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) के एक इशारे पर इलाके में किसी भी उम्मीदवार की किस्मत तय होती थी, वह अब खुद ही दो गुटों में बंटा हुआ है। मोर्चा का विमल गुरुंग वाला गुट भाजपा के साथ है तो विनय तामंग वाला गुट ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के साथ।

गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (जीएनएलएफ) ने भी भाजपा को ही समर्थन देने का एलान किया है। तीन दशकों में यह पहला मौका है जब इस इलाके में चुनाव गोरखालैंड या संविधान की छठी अनुसूची नहीं बल्कि विकास के मुद्दे पर लड़ा जा रहा है। विमल गुरुंग गुट का दावा है कि अबकी चुनावी नतीजे से साफ हो जाएगा कि पहाड़ियों में किसकी तूती बोलती है। यहां अब भी गुरुंग ही शीर्ष नेता हैं। गोरखा नेता विमल गुरुंग 2017 में हुए हिंसक आंदोलन के बाद से ही भूमिगत हैं।

भाजपा उम्मीदवार एसएस आहलुवालिया पिछली बार इस सीट से जीत कर केंद्र में मंत्री बने थे। लेकिन वर्ष 2017 में पर्वतीय इलाके में अलग राज्य की मांग में महीनों लंबी हिंसा और आगजनी के दौरान उनके इलाके से गायब रहने की वजह से आम लोगों में भारी नाराजगी थी। इसी वजह से उनका पत्ता साफ करते हुए भाजपा ने मोर्चा के विमल गुरुंग गुट और गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (जीएनएलएफ) के समर्थन से एक कारोबारी राजू सिंह बिष्ट को इस सीट पर अपना उम्मीदवार बनाया है। विनय तामंग की अगुवाई वाले मोर्चा गुट ने तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार अमर सिंह राई का समर्थन करने का एलान किया है। दोनों दलों के उम्मीदवार उसी गोरखा तबके से हैं जो यहां निर्णायक हैं। लेकिन राजू सिंह को बाहरी होने के तमगे से जूझना पड़ सकता है।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इलाके के दौरे के दौरान स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा उठा चुकी हैं। तृणमूल उम्मीदवार अमर सिंह राई इलाके के मोर्चा विधायक रह चुके हैं। कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ नेता शंकर मालाकार मैदान में हैं तो माकपा ने अपने पूर्व राज्यसभा सांसद सुमन पाठक को अपना उम्मीदवार बनाया है। गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (जीएनएलएफ) के जमाने में उसके तत्कालीन प्रमुख सुभाष घीसिंग के समर्थन से इंद्रजीत खुल्लर जीतते रहे थे। उसके बाद इलाके में सत्ता बदली और गोरखा जनमुक्ति मोर्चा प्रमुख विमल गुरुंग के समर्थन से पहले जसवंत सिंह जीते और उसके बाद वर्ष 2014 में एसएस अहलुवालिया। अबकी गोरखा मोर्चा में भी सत्ता बदल गई है। उनकी जगह मोर्चा का नेतृत्व संभालने वाले विनय तामंग को तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी का करीबी माना जाता है।

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