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जान देने चला था दलित डॉक्‍टर, रोते हुए सुनाई आपबीती- सर्जरी नहीं करने देते, चाय सर्व करवाते हैं

दलित पोस्टग्रेजुएट मेडिकल स्टूडेंट डॉ. मरिराज ने शुक्रवार को नींद की गोलियां खाकर खुदकुशी करने की कोशिश की। फिलहाल मरिराज खतरे से बाहर है।
जान देने चला था दलित डॉक्‍टर (यूट्यूब स्क्रीनशॉट)

अहमदाबाद के बीजे मेडिकल कॉलेज से एक बेहद ही दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक दलित डॉक्टर ने अपने साथ हो रहे बर्ताव से दुखी होकर आत्महत्या करने की कोशिश। दलित पोस्टग्रेजुएट मेडिकल स्टूडेंट डॉ. मरिराज ने शुक्रवार को नींद की गोलियां खाकर खुदकुशी करने की कोशिश की। फिलहाल मरिराज खतरे से बाहर है। उसने अस्पताल के बिस्तर से ही एक वीडियो के माध्यम से अपनी आपबीती लोगों के सामने रखी। तमिलनाडु के तिरुनेलवेली के रहने वाला मरिराज अहमदाबाद के बीजे मेडिकल कॉलेज से पोस्टग्रेजुएशन कर रहा है। उसने वीडियो में खुद के साथ जातिगत भेदभाव होने का आरोप लगाया है।

दिल को छू लेने वाला यह वीडियो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। वीडियो में दलित डॉक्टर ने बताया कि किस तरह कॉलेज के प्रोफेसर्स उसके साथ बुरा बर्ताव करते हैं। उसने कहा, ‘वे लोग मुझसे चाय सर्व करवाते हैं। मुझे सर्जरी नहीं करने दी जाती। वे लोग मुझे रोज ही टॉर्चर करते हैं। वे लोग मुझे वार्ड से बाहर कर देते हैं।’ एमएस जनरल सर्जरी के थर्ड ईयर के स्टूडेंट डॉक्टर मरिराज ने अपने समकक्षों और प्रोफेसर्स पर जातिगत भेदभाव करने का आरोप लगाया है।

वीडियो में मरिराज ने आरोप लगाया है, ‘जिस दिन से मैं यहां आया, उसी दिन से मुजे जाति संबंधी भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। वे लोग मुझसे चाय सर्व करवाकर मेरी बेइज्जती करते हैं। मुझे वार्ड के बाहर खड़ा कर दिया जाता है। मुझे ऑपरेशन थिएटर के अंदर नहीं जाने दिया जाता। मेरे नंबर को ब्लॉक कर दिया गया है ताकि मैं किसी मरीज के केस के बारे में कोई भी बात ना कर सकूं। वे लोग मेरी डिग्री जांचते रहते हैं, उन्हें लगता है कि मेरी डिग्री फेक है। मुझे गुजराती में भला-बुरा कहा जाता है। हर किसी के सामने मेरी बेइज्जती की जाती है।

मरिराज की मां इंदिरा ने पिछले साल सितंबर में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के राष्ट्रीय आयोग (एनसीएससी) में इस बात की शिकायत भी की थी। इंदिरा ने अपनी शिकायत में लिखा था कि अगर उसके बेटे को कुछ होता है तो उसके लिए अहमदाबाद बीजे मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर जेवी पारिख, डॉ. पार्थ दलाल और सर्जरी विभाग के हेड डॉ. पंकज आर मोदी जिम्मेदार होंगे। इंदिरा ने शिकातय में लिखा था, ‘मेरे बेटे के अलावा सभी रेसिडेंट डॉक्टर्स को विभाग की सेमिनार क्लासेस अटेंड करने दिया जाता है। डॉ. पंकज मोदी ने मेरे बेटे को किसी भी सेमिनार क्लास में जाने से मना किया है।’ वहीं डॉ मोदी ने मरिराज के साथ किसी भी तरह का जातिगत भेदभाव होने की बात से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि उन्हें तो पता भी नहीं था कि मरिराज दलित हैं। जब जांच कमिटी बनी तब उन्हें पता चला कि वह दलित है।

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  1. शैलेश सिंह
    Jan 8, 2018 at 9:28 am
    मरीजो का जीवन अनमोल है इस हॉस्पिटल के लिए ।
    (0)(0)
    Reply
    1. Dr. Naresh Kumar
      Jan 7, 2018 at 7:18 pm
      The only barrier in the develepment of India is Brahmanisation.
      (8)(1)
      Reply